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अखिलेश की एंबुलेंस में योगी सरकार नहीं भरा पा रही डीजल
Updated Sun, 18 Jun 2017 12:43 AM IST
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मंझनपुर। योगी सरकार पूर्व सीएम अखिलेश की एंबुलेंस में डीजल नहीं भरा पा रही है। यही कारण है कि यहां-वहां चालक एंबुलेंस को खड़ा करके गायब हो जाते हैं। अब तो स्थिति यह हो गई है कि कंट्रोल रूम से फोन आने पर भी चालक एंबुलेंस लेकर नहीं पहुंचते हैं। इसी अव्यवस्था का दो दिन पहले एक मासूम बच्ची शिकार हो गई थी।
सपा सरकार में 102 व 108 एंबुलेंस की सौगात जिले को मिली थी। लगभग 22 एंबुलेंस जिले में हैं। इनमें से अधिकांश एंबुलेंस यहां-वहां खड़ी रहती हैं। एक हफ्ते से ज्यादा का समय बीत गया, एंबुलेंस सेवा का समुचित लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। दो दिन पहले जिला अस्पताल में दुर्गापुर की रानी देवी की मासूम बच्ची एंबुलेंस न मिलने से मौत का शिकार हो गई थी। इसको लेकर जिला अस्पताल में जमकर हंगामा भी हुआ था।
कई मरीजों को भी एंबुलेंस सेवा का लाभ नहीं मिला। चर्चा है कि डीजल का बजट खत्म हो चुका है। डीजल न मिलने से चालक एंबुलेंस को खड़ी करके गायब हो जाते हैं। यह एंबुलेंस ऐसी जगह खड़ी की जाती हैं, जहां लोगों की निगाह न पड़े। मुख्य रोड से हटकर इनको खड़ा किया जाता है। इससे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी परेशान हैं। एक हफ्ते के भीतर तमाम शिकायतें अधिकारियों को मिलीं कि उन्होंने कंट्रोल रूम को फोन करके एंबुलेंस सेवा की मदद मांगी, लेकिन उनको इसका लाभ नहीं मिला। अधिकारियों ने हकीकत खंगलवाई तो वह भी हैरान रह गए।
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एंबुलेंस को डीजल व उसके कर्मचारियों को मानदेय एजेंसी देती है। इस एजेंसी का चयन शासन करता है। डीजल आदि की व्यवस्था की जिम्मेदारी भी एजेंसी के पास ही है।
डा. एसके उपाध्याय, सीएमओ
एंबुलेंस में योगी सरकार नहीं भरा पा रही डीजल
एंबुलेंस के अभाव में दम तोड़ रहे मरीज
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सपा सरकार में 102 व 108 एंबुलेंस की सौगात जिले को मिली थी। लगभग 22 एंबुलेंस जिले में हैं। इनमें से अधिकांश एंबुलेंस यहां-वहां खड़ी रहती हैं। एक हफ्ते से ज्यादा का समय बीत गया, एंबुलेंस सेवा का समुचित लाभ लोगों को नहीं मिल रहा है। दो दिन पहले जिला अस्पताल में दुर्गापुर की रानी देवी की मासूम बच्ची एंबुलेंस न मिलने से मौत का शिकार हो गई थी। इसको लेकर जिला अस्पताल में जमकर हंगामा भी हुआ था।
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कई मरीजों को भी एंबुलेंस सेवा का लाभ नहीं मिला। चर्चा है कि डीजल का बजट खत्म हो चुका है। डीजल न मिलने से चालक एंबुलेंस को खड़ी करके गायब हो जाते हैं। यह एंबुलेंस ऐसी जगह खड़ी की जाती हैं, जहां लोगों की निगाह न पड़े। मुख्य रोड से हटकर इनको खड़ा किया जाता है। इससे स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी परेशान हैं। एक हफ्ते के भीतर तमाम शिकायतें अधिकारियों को मिलीं कि उन्होंने कंट्रोल रूम को फोन करके एंबुलेंस सेवा की मदद मांगी, लेकिन उनको इसका लाभ नहीं मिला। अधिकारियों ने हकीकत खंगलवाई तो वह भी हैरान रह गए।
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एंबुलेंस को डीजल व उसके कर्मचारियों को मानदेय एजेंसी देती है। इस एजेंसी का चयन शासन करता है। डीजल आदि की व्यवस्था की जिम्मेदारी भी एजेंसी के पास ही है।
डा. एसके उपाध्याय, सीएमओ
एंबुलेंस में योगी सरकार नहीं भरा पा रही डीजल
एंबुलेंस के अभाव में दम तोड़ रहे मरीज