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नवजात शिशुओं के लिए जिला अस्पताल में खुलेगा पालना’
Updated Wed, 02 May 2018 08:00 PM IST
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मंझनपुर । नवजात शिशुओं की मौत पर नियंत्रण के लिए प्रदेश सरकार ने समेकित बाल संरक्षण योजना शुरू की है। इसके तहत जिला अस्पताल में पालना शिशु स्वास्थ्य केंद्र खोलने का निर्देश दिया गया है। शासकीय फरमान मिलते ही सीएमओ ने इसके लिए कवायद शुरू कर दी है।
अमान्य रिश्तों से जन्मे नवजात को लोकलाज के डर से लोग अक्सर इधर-उधर फेंक देते हैं। आए दिन मंदिर-मस्जिद की सीढ़ियों या फिर झाड़ियों में लावारिस नवजात मिलते रहते हैं। सही समय पर परवरिश नहीं होने के कारण इनमें से अधिकतर नवजात की चंद घंटे के भीतर ही मौत हो जाती है। कई बार तो यह भी देखने को मिलता है कि ऐसे नवजात हिंसक जानवरों के मुंह का निवाला बन जाते हैं। सरकार ऐसे बच्चों की सेहत और सुरक्षा को लेकर गंभीर हुई है। लावारिस बच्चों को सुरक्षित रख शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए शासन ने समेकित बाल संरक्षण योजना शुरू की है।
इसके तहत जिला अस्पताल में पालना शिशु स्वागत केंद्र खोला जाएग। यह केंद्र जिला अस्पताल परिसर स्थित ऐसे कक्ष में खोला जाएगा जहां आम लोगों का आवागमन कम होगा। इसमें कोई भी महिला चुपके से अपने नवजात को छोड़कर जा सकेगी। इसकी निगरानी डॉक्टर करेंगे। केंद्र की रखवाली के लिए तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के एक-एक कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। इन कर्मियों की जिम्मेदारी होगी कि पालने में जैसे ही कोई महिला अथवा पुरुष या फिर दंपति बच्चा छोड़कर बाहर निकले, फौरन इसकी सूचना इंचार्ज को देने के साथ ही नवजात को चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराएं। इसके बाद राजकीय बाल गृह ऐसे मासूमों को संरक्षण प्रदान करेंगे। प्रमुख सचिव का पत्र मिलते ही सीएमएस ने इसकी कवायद शुरू कर दी है।
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वहीं सीएमएस का कहना है कि समेकित बाल संरक्षण योजना के तहत जिला अस्पताल में पालना शिशु स्वागत केंद्र खोलने का निर्देश मिला है। शासकीय फरमान पर इसके लिए तैयारी की जा रही है। जल्द ही अस्पताल के एक हिस्से में उक्त केंद्र खोला जाएगा।
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अमान्य रिश्तों से जन्मे नवजात को लोकलाज के डर से लोग अक्सर इधर-उधर फेंक देते हैं। आए दिन मंदिर-मस्जिद की सीढ़ियों या फिर झाड़ियों में लावारिस नवजात मिलते रहते हैं। सही समय पर परवरिश नहीं होने के कारण इनमें से अधिकतर नवजात की चंद घंटे के भीतर ही मौत हो जाती है। कई बार तो यह भी देखने को मिलता है कि ऐसे नवजात हिंसक जानवरों के मुंह का निवाला बन जाते हैं। सरकार ऐसे बच्चों की सेहत और सुरक्षा को लेकर गंभीर हुई है। लावारिस बच्चों को सुरक्षित रख शिशु मृत्यु दर में कमी लाने के लिए शासन ने समेकित बाल संरक्षण योजना शुरू की है।
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इसके तहत जिला अस्पताल में पालना शिशु स्वागत केंद्र खोला जाएग। यह केंद्र जिला अस्पताल परिसर स्थित ऐसे कक्ष में खोला जाएगा जहां आम लोगों का आवागमन कम होगा। इसमें कोई भी महिला चुपके से अपने नवजात को छोड़कर जा सकेगी। इसकी निगरानी डॉक्टर करेंगे। केंद्र की रखवाली के लिए तृतीय और चतुर्थ श्रेणी के एक-एक कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। इन कर्मियों की जिम्मेदारी होगी कि पालने में जैसे ही कोई महिला अथवा पुरुष या फिर दंपति बच्चा छोड़कर बाहर निकले, फौरन इसकी सूचना इंचार्ज को देने के साथ ही नवजात को चिकित्सकीय सुविधा उपलब्ध कराएं। इसके बाद राजकीय बाल गृह ऐसे मासूमों को संरक्षण प्रदान करेंगे। प्रमुख सचिव का पत्र मिलते ही सीएमएस ने इसकी कवायद शुरू कर दी है।
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वहीं सीएमएस का कहना है कि समेकित बाल संरक्षण योजना के तहत जिला अस्पताल में पालना शिशु स्वागत केंद्र खोलने का निर्देश मिला है। शासकीय फरमान पर इसके लिए तैयारी की जा रही है। जल्द ही अस्पताल के एक हिस्से में उक्त केंद्र खोला जाएगा।