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बसपाई मतों के बिखराव पर टिकी भाजपा की निगाहें
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बसपाई मतों के बिखराव पर टिकी भाजपा की निगाहें
दलितों और पिछड़ों के सहारे दिख रही दिल्ली की राह
भाजपा से मोदी और सपा से अखिलेश डाल चुके हैं डोरे
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। कौशाम्बी संसदीय सीट (अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित) सीट से उतरे बड़े सियासी दलों का फोकस दलित और पिछड़े मतदाताओं को अपने पाले में करने का है। स्टार प्रचारक भी अपनी जनसभा में दलित कार्ड खेलने से पीछे नहीं रह रहे हैं। दलित मतों के बिखराव के पीछे कयास लगाए जा रहे हैं। यहां बसपा ने अपना सिम्बल नहीं दिया। ऐसे में भाजपा खास तौर पर दलित वोटरों पर डोरे डालने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
गठबंधन में कौशाम्बी संसदीय सीट सपा के खाते में गई है। यहां से सपा के राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत सरोज चुनाव लड़ रहे हैं। इंद्रजीत बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। ईवीएम में इस मर्तबा हाथी निशान नहीं होगा। इसे लेकर सभी दलों की निगाह दलित मतदाताओं पर है। 30 अप्रैल को कादीपुर मेला बाग में गठबंधन प्रत्याशी इंद्रजीत सरोज के समर्थन में जनसभा करने आए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी दलित वोटरों को साधने का भरसक प्रयास किया था। उन्होंने अपनी बात की शुरुआत बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर और राम मनोहर लोहिया के एक साथ काम करने की बात कहकर की। मंच पर बसपा के जिलाध्यक्ष महेंद्र गौतम पहुंचे लेकिन उन्होंने अपने संबोधन में पार्टी मुखिया की तरफ से मिले संदेश का जिक्र किए बगैर अपने संक्षिप्त भाषण में सिर्फ गठबंधन प्रत्याशी को जिताने की बात कही। एक मई को भाजपा प्रत्याशी विनोद सोनकर के समर्थन में भरवारी के भवंस मेहता में रैली करने आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दलित मतदाताओं को रिझाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। प्रयागराज के कुंभ में स्वच्छता का हवाला देते हुए कहा कि वहां की सफाई देखकर वह सफाई कर्मियों का पांव पखारने से खुद को नहीं रोक सके। यह उनके जीवन का सबसे सुखद अनुभव रहा। भाजपा प्रत्याशी विनोद सोनकर ने भी मंच से कहा कि बसपा के लोग संपर्क में है। उनके दल के साथ जुड़े सभी दलों को वोटरों से सिर्फ मनुहार करने की जरूरत है। जन सत्ता दल भी दलित वोटरों को साधने में ताकत लगाए हुए है। जनसत्ता दल के मंच पर भारत क्रांति रक्षक पार्टी के लाखन सिंह राजपासी और कोटेदार संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजीव पासवान की उपस्थित देखी जा रही है।
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दलितों और पिछड़ों के सहारे दिख रही दिल्ली की राह
भाजपा से मोदी और सपा से अखिलेश डाल चुके हैं डोरे
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। कौशाम्बी संसदीय सीट (अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित) सीट से उतरे बड़े सियासी दलों का फोकस दलित और पिछड़े मतदाताओं को अपने पाले में करने का है। स्टार प्रचारक भी अपनी जनसभा में दलित कार्ड खेलने से पीछे नहीं रह रहे हैं। दलित मतों के बिखराव के पीछे कयास लगाए जा रहे हैं। यहां बसपा ने अपना सिम्बल नहीं दिया। ऐसे में भाजपा खास तौर पर दलित वोटरों पर डोरे डालने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं।
गठबंधन में कौशाम्बी संसदीय सीट सपा के खाते में गई है। यहां से सपा के राष्ट्रीय महासचिव इंद्रजीत सरोज चुनाव लड़ रहे हैं। इंद्रजीत बसपा सरकार में कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं। ईवीएम में इस मर्तबा हाथी निशान नहीं होगा। इसे लेकर सभी दलों की निगाह दलित मतदाताओं पर है। 30 अप्रैल को कादीपुर मेला बाग में गठबंधन प्रत्याशी इंद्रजीत सरोज के समर्थन में जनसभा करने आए सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भी दलित वोटरों को साधने का भरसक प्रयास किया था। उन्होंने अपनी बात की शुरुआत बाबा साहेब भीम राव आंबेडकर और राम मनोहर लोहिया के एक साथ काम करने की बात कहकर की। मंच पर बसपा के जिलाध्यक्ष महेंद्र गौतम पहुंचे लेकिन उन्होंने अपने संबोधन में पार्टी मुखिया की तरफ से मिले संदेश का जिक्र किए बगैर अपने संक्षिप्त भाषण में सिर्फ गठबंधन प्रत्याशी को जिताने की बात कही। एक मई को भाजपा प्रत्याशी विनोद सोनकर के समर्थन में भरवारी के भवंस मेहता में रैली करने आए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी दलित मतदाताओं को रिझाने में कोई कसर नहीं छोड़ी। प्रयागराज के कुंभ में स्वच्छता का हवाला देते हुए कहा कि वहां की सफाई देखकर वह सफाई कर्मियों का पांव पखारने से खुद को नहीं रोक सके। यह उनके जीवन का सबसे सुखद अनुभव रहा। भाजपा प्रत्याशी विनोद सोनकर ने भी मंच से कहा कि बसपा के लोग संपर्क में है। उनके दल के साथ जुड़े सभी दलों को वोटरों से सिर्फ मनुहार करने की जरूरत है। जन सत्ता दल भी दलित वोटरों को साधने में ताकत लगाए हुए है। जनसत्ता दल के मंच पर भारत क्रांति रक्षक पार्टी के लाखन सिंह राजपासी और कोटेदार संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजीव पासवान की उपस्थित देखी जा रही है।
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