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मिजेल्स रुबेला: प्रतिरोधी परिवारों को मनाने में छूट रहा पसीना
Updated Thu, 13 Dec 2018 05:59 PM IST
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मिजेल्स रुबेला: प्रतिरोधी परिवारों को मनाने में छूट रहा पसीना
17 दिन में 45.65 फीसदी बच्चों को लगा टीका, प्रदेश में 11 वें
स्थान पर पहुंचा जिला
स्कूलों में पैरेंटस मीटिंग कर टीका लगवाने के लिए कर रहे प्रेरित
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। बहु प्रचारित मिजेल्स रुबेला अभियान की राह में अल्पसंख्यक परिवार रोड़ा बन रहे हैं। इन्हें मनाने में अफसरों को पसीना छूट रहा है। इसके चलते 17 दिन के भीतर 45.65 फीसदी बच्चों को ही टीका लगाया जा सका है। स्कूलों में पैरेंटस मीटिंग कर टीका लगवाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
बच्चों को विभिन्न जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मिजेल्स रुबेला अभियान चलाया है। इसके तहत शून्य से 15 वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण किया जा रहा है। 26 नवंबर से चल रहे अभियान के तहत जिले के 6,11,637 बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पहले चरण में बेसिक और माध्यमिक स्कूलों में पंजीकृत बच्चों को टीका लगाया जा रहा है। अभियान के नोडल अफसर डॉ हिंद मणि ने बताया कि 12 दिसंबर तक जिले के 2,79,195 बच्चों को टीका लगाया जा चुका है। इसी के साथ ही कौशाम्बी जनपद प्रदेश की सूची में 11 वें स्थान पर पहुंच गया है। पर, इस दौरान स्वास्थ्य टीमों को प्रतिरोधी परिवारों से जूझना पड़ रहा है। अल्पसंख्यक परिवार के लोग अपने बच्चों को टीका लगावाने से इंकार कर रहे हैं। इसके लिए वो तरह-तरह के बहाने बना रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग इसके लिए स्कूलों में पैरेंटस मीटिंग करा रहा है। मीटिंग में विभागीय के साथ प्रशासनिक अफसर पहुंचकर अभिभावकों को इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं।
सिराथू और कड़ा ब्लॉक की घटनाओं से बढ़ी समस्या
अभियान के शुरूआत में ही सिराथू और कड़ा ब्लॉक के तीन स्कूलों में टीका लगने के बाद दर्जन भर बच्चे बेहोश हो गए थे। हालांकि डॉक्टरों का कहना था कि उनकी बीमारी का कारण इंजेक्षन नहीं बल्कि खौफ था। खाली पेट रहे बच्चे इंजेक्शन के डर से बेसुध हो जा रहे थे। उसके बाद से बरती गई एहितियात के बाद कहीं भी कोई घटना नहीं हुई। फिर, भी इन घटनाओं से अभियान पर थोड़ा असर जरूर पड़ा है।
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मदरसों में भी चल रहा अभियान
जिले में 80 मदरसा पंजीकृत हैं। इनमें बच्चों की संख्या ठीकठाक है। इसके लिए डीएम मनीष कुमार वर्मा के निर्देश पर प्रधानाचार्यों की बैठक की जा चुकी है। नोडल अफसर डॉ हिंद मणि ने बताया कि मदरसा शिक्षकों का सकारात्मक सहयोग भी मिल रहा है।
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17 दिन में 45.65 फीसदी बच्चों को लगा टीका, प्रदेश में 11 वें
स्थान पर पहुंचा जिला
स्कूलों में पैरेंटस मीटिंग कर टीका लगवाने के लिए कर रहे प्रेरित
अमर उजाला ब्यूरो
मंझनपुर। बहु प्रचारित मिजेल्स रुबेला अभियान की राह में अल्पसंख्यक परिवार रोड़ा बन रहे हैं। इन्हें मनाने में अफसरों को पसीना छूट रहा है। इसके चलते 17 दिन के भीतर 45.65 फीसदी बच्चों को ही टीका लगाया जा सका है। स्कूलों में पैरेंटस मीटिंग कर टीका लगवाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
बच्चों को विभिन्न जानलेवा बीमारियों से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने मिजेल्स रुबेला अभियान चलाया है। इसके तहत शून्य से 15 वर्ष तक के बच्चों का टीकाकरण किया जा रहा है। 26 नवंबर से चल रहे अभियान के तहत जिले के 6,11,637 बच्चों को टीका लगाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। पहले चरण में बेसिक और माध्यमिक स्कूलों में पंजीकृत बच्चों को टीका लगाया जा रहा है। अभियान के नोडल अफसर डॉ हिंद मणि ने बताया कि 12 दिसंबर तक जिले के 2,79,195 बच्चों को टीका लगाया जा चुका है। इसी के साथ ही कौशाम्बी जनपद प्रदेश की सूची में 11 वें स्थान पर पहुंच गया है। पर, इस दौरान स्वास्थ्य टीमों को प्रतिरोधी परिवारों से जूझना पड़ रहा है। अल्पसंख्यक परिवार के लोग अपने बच्चों को टीका लगावाने से इंकार कर रहे हैं। इसके लिए वो तरह-तरह के बहाने बना रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग इसके लिए स्कूलों में पैरेंटस मीटिंग करा रहा है। मीटिंग में विभागीय के साथ प्रशासनिक अफसर पहुंचकर अभिभावकों को इसके लिए प्रेरित कर रहे हैं।
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सिराथू और कड़ा ब्लॉक की घटनाओं से बढ़ी समस्या
अभियान के शुरूआत में ही सिराथू और कड़ा ब्लॉक के तीन स्कूलों में टीका लगने के बाद दर्जन भर बच्चे बेहोश हो गए थे। हालांकि डॉक्टरों का कहना था कि उनकी बीमारी का कारण इंजेक्षन नहीं बल्कि खौफ था। खाली पेट रहे बच्चे इंजेक्शन के डर से बेसुध हो जा रहे थे। उसके बाद से बरती गई एहितियात के बाद कहीं भी कोई घटना नहीं हुई। फिर, भी इन घटनाओं से अभियान पर थोड़ा असर जरूर पड़ा है।
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मदरसों में भी चल रहा अभियान
जिले में 80 मदरसा पंजीकृत हैं। इनमें बच्चों की संख्या ठीकठाक है। इसके लिए डीएम मनीष कुमार वर्मा के निर्देश पर प्रधानाचार्यों की बैठक की जा चुकी है। नोडल अफसर डॉ हिंद मणि ने बताया कि मदरसा शिक्षकों का सकारात्मक सहयोग भी मिल रहा है।