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दोआबा में स्टेटस सिंबल बना लाइसेंसी असलहा
Updated Sun, 02 Dec 2018 12:30 AM IST
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मंझनपुर। दोआबा में शस्त्र के शौकीनों की संख्या घटने का नाम नहीं ले रही है। कलक्ट्रेट के शस्त्र अनुभाग में फार्म लेने वाले आवेदकों की भीड़ रोज लगी रहती है। बिक चुके फार्मों के आंकड़ों पर जाएं तो शस्त्र लाइसेंस लेने के लिए लोग चार हजार से अधिक फार्म खरीद चुके हैं। इससे साफ है कि जिले के लोगों के लिए शस्त्र लेना आज भी स्टेटस सिंबल बना हुआ है।
दोआबा में नल व नाल दो दसक पहले से स्टेटस सिंबल बना हुआ है। समय के साथ नल की मांगे तो घट गई पर नाल के शौकीनों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। पिछले चार सालों से असलहों के आवेदन पर रोक लग गई थी। इधर बीच रोक हटी तो शस्त्र लाइसेंस लेने वालाें की होड़ सी लग गई है। एक माह के भीतर शस्त्र अनुभाग से आवेदन करने के लिए 4545 लोग फार्म खरीद चुके हैं। इनमें से 1265 आवेदकों ने पुलिस लाइन में बुधवार तक शस्त्र चलाने का प्रशिक्षण भी प्राप्त कर लिया है। असलहा क्लर्क सदाशिव का कहना है कि कार्यालय खुलते ही आवेदन फार्म लेने वालों की भारी भीड़ लग जाती है। एक व्यक्ति एक बार में दो से चार फार्म तक की डिमांड करता है। बहरहाल कुछ भी हो माह भर के भीतर बिक चुके शस्त्र आवेदन के फार्मों से साफ हो गया है कि आज भी दोआबा में शस्त्र लाइसेंस स्टेटस सिंबल बना हुआ है।
रोजी कमाने का भी है चक्कर
जिले में शिक्षा का स्तर अन्य शहरों की तुलना में काफी नीचे है। इसके चलते बेरोजगार युवाओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। युवा शस्त्र लाइसेंस के सहारे रोजगार की भी तलाश में है। उनका मानना है कि लाइसेंस मिलने के बाद वह किसी बड़े कारोबारी का सुरक्षा गार्ड बनकर इज्जत से रोजी कमा सकेंगे। यही कारण है कि असलहा लेने की दौड़ में अधिकतर युवा ही शामिल हैं। खुद की सुरक्षा से उनका विशेष लेना-देना नहीं है।
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नहीं आते एकनाली बंदूक के आवेदन
शस्त्र लाइसेंस पर लगी रोक हटने के बाद शस्त्र कार्यालय में आवेदन का शिलसिला शुरू हो गया है। शासन द्वारा नए लाइसेंसों को कम व वरासत के लाइसेंस को अधिक वरीयता देने का निर्देश है। बावजूद इसके वरासत के आवेदन कम आ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि पहले के शस्त्रधारकों के पास एकनाली बंदूक ही ज्यादातर थी। लेकिन अब जमाना रायफल व पिस्टल/रिवाल्वर का है। ऐसे में आज का युवा दुकान व थाने में सड़ रहे पूर्वजों के एकनाली बूंद की वरासत नहीं कराना चाह रहे हैं। मौजूदा वक्त में लोग सिंगल अथवा डबल बैरल बंदूक के लिए महज 10 पीसदी ही आवेदन कर रहे हैं। जबकि 50 फ़ीसदी लोग राइफल व 40 प्रतिशत पिस्टल अथवा रिवाल्वर के लिए आवेदन कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक जिलाधिकारी की ओर से लाइसेंस कब से और किसको जारी किए जाएंगे। इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
आसान नहीं होगा नया शस्त्र लाइसेंस लेना
शस्त्र लाइसेंस पर लगी रोक हटे हुए लगभग एक माह का समय पूरा हो गया। रोक हटते ही बड़ी संख्या में लोगों ने दनादन आवेदन भी कर दिया। सूत्रों की मानें तो जिले के एक दिग्गज नेता के बेटे का फार्म सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद डीएम के पास स्वीकृति के लिए पड़ा है। इसे स्वीकृति करने के लिए आवेदक ने कई बार डीएम से सिफारिश भी किया। पखवारे भर का समय बीत गया पर पत्रावली पर डीएम की मूहर नहीं लगी। जब दिग्गज नेता के बेटे को शस्त्र लाइसेंस लेने में इतनी कठिनाई हो रही है तो आम आवेदकों के लिए यह कितना आसान होगा सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
इन्हें मिलेगी वरीयता
अपराध पीड़ित, विरासत, व्यापारी, उद्यमी, बैंक कर्मी, संस्थागत, वित्तीय संस्थान, प्रवर्तन में कार्य करने वाले कर्मचारी, सैनिक और अर्द्धसैनिक पुलिस बल के कर्मी, एमएलए, एमपी, एमएलसी, राज्य, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर का निशानेबाज को शस्त्र लाइसेंस में वरीयता मिलेगी।
वरासत के जरूरतमंदों को लाइसेंस जारी किया जा रहा है। नए आवेदकों को शस्त्र लाइसेंस की कितनी जरूरत है इसे संज्ञान में लेकर उनकी पत्रावली को मंजूरी दी जाएगी। फिलहाल नए आवेदनों को अभी स्वीकृति नहीं दी जा रही है।
मनीष कुमार वर्मा, डीएम
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दोआबा में नल व नाल दो दसक पहले से स्टेटस सिंबल बना हुआ है। समय के साथ नल की मांगे तो घट गई पर नाल के शौकीनों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। पिछले चार सालों से असलहों के आवेदन पर रोक लग गई थी। इधर बीच रोक हटी तो शस्त्र लाइसेंस लेने वालाें की होड़ सी लग गई है। एक माह के भीतर शस्त्र अनुभाग से आवेदन करने के लिए 4545 लोग फार्म खरीद चुके हैं। इनमें से 1265 आवेदकों ने पुलिस लाइन में बुधवार तक शस्त्र चलाने का प्रशिक्षण भी प्राप्त कर लिया है। असलहा क्लर्क सदाशिव का कहना है कि कार्यालय खुलते ही आवेदन फार्म लेने वालों की भारी भीड़ लग जाती है। एक व्यक्ति एक बार में दो से चार फार्म तक की डिमांड करता है। बहरहाल कुछ भी हो माह भर के भीतर बिक चुके शस्त्र आवेदन के फार्मों से साफ हो गया है कि आज भी दोआबा में शस्त्र लाइसेंस स्टेटस सिंबल बना हुआ है।
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रोजी कमाने का भी है चक्कर
जिले में शिक्षा का स्तर अन्य शहरों की तुलना में काफी नीचे है। इसके चलते बेरोजगार युवाओं की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। युवा शस्त्र लाइसेंस के सहारे रोजगार की भी तलाश में है। उनका मानना है कि लाइसेंस मिलने के बाद वह किसी बड़े कारोबारी का सुरक्षा गार्ड बनकर इज्जत से रोजी कमा सकेंगे। यही कारण है कि असलहा लेने की दौड़ में अधिकतर युवा ही शामिल हैं। खुद की सुरक्षा से उनका विशेष लेना-देना नहीं है।
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नहीं आते एकनाली बंदूक के आवेदन
शस्त्र लाइसेंस पर लगी रोक हटने के बाद शस्त्र कार्यालय में आवेदन का शिलसिला शुरू हो गया है। शासन द्वारा नए लाइसेंसों को कम व वरासत के लाइसेंस को अधिक वरीयता देने का निर्देश है। बावजूद इसके वरासत के आवेदन कम आ रहे हैं। जानकारों का कहना है कि पहले के शस्त्रधारकों के पास एकनाली बंदूक ही ज्यादातर थी। लेकिन अब जमाना रायफल व पिस्टल/रिवाल्वर का है। ऐसे में आज का युवा दुकान व थाने में सड़ रहे पूर्वजों के एकनाली बूंद की वरासत नहीं कराना चाह रहे हैं। मौजूदा वक्त में लोग सिंगल अथवा डबल बैरल बंदूक के लिए महज 10 पीसदी ही आवेदन कर रहे हैं। जबकि 50 फ़ीसदी लोग राइफल व 40 प्रतिशत पिस्टल अथवा रिवाल्वर के लिए आवेदन कर रहे हैं। हालांकि, अभी तक जिलाधिकारी की ओर से लाइसेंस कब से और किसको जारी किए जाएंगे। इसे लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं की गई है।
आसान नहीं होगा नया शस्त्र लाइसेंस लेना
शस्त्र लाइसेंस पर लगी रोक हटे हुए लगभग एक माह का समय पूरा हो गया। रोक हटते ही बड़ी संख्या में लोगों ने दनादन आवेदन भी कर दिया। सूत्रों की मानें तो जिले के एक दिग्गज नेता के बेटे का फार्म सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद डीएम के पास स्वीकृति के लिए पड़ा है। इसे स्वीकृति करने के लिए आवेदक ने कई बार डीएम से सिफारिश भी किया। पखवारे भर का समय बीत गया पर पत्रावली पर डीएम की मूहर नहीं लगी। जब दिग्गज नेता के बेटे को शस्त्र लाइसेंस लेने में इतनी कठिनाई हो रही है तो आम आवेदकों के लिए यह कितना आसान होगा सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
इन्हें मिलेगी वरीयता
अपराध पीड़ित, विरासत, व्यापारी, उद्यमी, बैंक कर्मी, संस्थागत, वित्तीय संस्थान, प्रवर्तन में कार्य करने वाले कर्मचारी, सैनिक और अर्द्धसैनिक पुलिस बल के कर्मी, एमएलए, एमपी, एमएलसी, राज्य, राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय स्तर का निशानेबाज को शस्त्र लाइसेंस में वरीयता मिलेगी।
वरासत के जरूरतमंदों को लाइसेंस जारी किया जा रहा है। नए आवेदकों को शस्त्र लाइसेंस की कितनी जरूरत है इसे संज्ञान में लेकर उनकी पत्रावली को मंजूरी दी जाएगी। फिलहाल नए आवेदनों को अभी स्वीकृति नहीं दी जा रही है।
मनीष कुमार वर्मा, डीएम