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गजब: गांवों में एक ही तारीख को पैदा हुए लोग

Sat, 16 Mar 2019 08:34 PM IST
Allahabad Bureau इलाहाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 16 Mar 2019 08:34 PM IST
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गजब: गांवों में एक ही तारीख को पैदा हुए लोग
गजब: गांवों में एक ही तारीख को पैदा हुए लोग
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आधार कार्ड बनाने वालों की गड़बड़ी का खामियाजा भुगत रहे ग्रामीण
आधार, मनरेगा, राशन कार्ड और वोटर आईडी में लिखी है अलग-अलग जन्मतिथि
आदर्श श्रीवास्तव
मंझनपुर। आधार कार्ड बनाने वालों की मनमानी से गांव में रहने वाले ज्यादातर ग्रामीणों को एक ही तारीख में पैदा होना दिखाया गया है। अब राशन कार्ड, आधार कार्ड. मनरेगा जॉब कार्ड और वोटर कार्ड में लिखी अलग-अलग जन्मतिथि को लेकर ग्रामीण परेशान हैं।
केंद्र सरकार ने सभी के लिए आधार कार्ड अनिवार्य कर दिया है। बिना आधार कार्ड के लोगों को सरकारी योजना का लाभ नहीं दिया जाता है। इसे लेकर गांव-गांव कैंप लगाकर ऑपरेटरों ने आधार कार्ड बनाया। जो बच्चे हाल-फिलहाल पैदा हुए थे, उनकी जन्मतिथि तो घरवालों को मालूम थी। लेकिन गांव के कम पढ़े-लिखे लोगों को खुद के जन्म की तारीख नहीं मालूम थी। इसका ऑपरेटरों ने फायदा उठाया और एक ही दिन में गांव के लोगों को पैदा होना दर्ज कर दिया। अब आंगनबाड़ी केंद्रों और कोटेदारों के यहां लिंक आधार कार्ड में जन्मतिथि को लेकर चर्चा का बाजार गर्म है। ऑपरेटरों ने उम्र के हिसाब से पैदा होने वाले की आयु साल में बढ़ाई लेकिन जन्म दिन एक ही रखा था। सिराथू तहसील के निजामपुर नौगीरा गांव में रहने वाले दर्जन भर से ज्यादा लोगों को एक जनवरी को पैदा होना दिखाया गया। गांव के सुंदर लाल की जन्म तिथि एक जनवरी 1981 बताई गई। शिवमूरत की एक जनवरी 1980, सुरेश चंद्र की एक जनवरी 1987, राम सरन की 1997, राम कैलाश 2003, वीर भवन 1967, लक्षमिनिया 1971, नथिया 1960, गयादीन 1962, शकुंतला 1981, मालती 1990, कमलेश 1984, राम मोहन 1975, सेमिया 1982, गोविंद 1997 सहित तमाम ऐसे लोग हैं, जिनकी जन्मतिथि एक जनवरी लिखी है। यह हाल पूरे जिले का है। सौरई खुर्द गांव के कोटेदार त्रिभुवन त्रिपाठी उर्फ दादा का कहना है कि शमसाबाद, सौरई, मधवामई आदि गांवों में भी इसी तरह की दिक्कत हैं।
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पेस्ट करने को लेकर हुई दिक्कत
मंझनपुर। आधार कार्ड में नाम की गड़बड़ी के पीछे सबसे बड़ा कारण यह है कि जिन ऑपरेटरों ने गांवों में कैंप लगाकर आधार कार्ड बनाया, इन लोगों ने एक ही तारीख को सेव कर लिया था। सारे लोगों के कार्ड में जल्दबाजी के चक्कर में वह वही तारीख पेस्ट करते रहे। इसके चलते लोगों की जन्मतिथि में गड़बड़ी हो गई है।
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