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आईजीआरएस पोर्टल पर शिकायतों का फर्जी निस्तारण
Updated Fri, 28 Sep 2018 12:27 AM IST
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दोआबा की पुलिस मुख्यमंत्री के जनसुनवाई पोर्टल की धज्जियां उड़ा रही है। पोर्टल पर दर्ज होने वाली शिकायतों का फर्जी निस्तारण किया जा रहा है। इसे लेकर शिकायतकर्ता परेशान हैं और अफसर शासन को शत-प्रतिशत निस्तारण की रिपोर्ट भेजकर मौज काट रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आम जनता की शिकायतों का आसानी से निस्तारण कराने के लिए जनसुनवाई पोर्टल लांच कराया है।
शासन का मकसद लोगों को घर बैठे इंसाफ दिलाने का है। पर, जिले के पुलिस अधिकारियों की मनमानी की वजह से सरकार की इस मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है। बताया जाता है कि पोर्टल पर दर्ज होने वाले अधिकतर मामलों की जांच तक नहीं की जाती। अफसर दफ्तर में बैठे-बैठे निस्तारण की रिपोर्ट लगा देते हैं। शिकायतकर्ताओं के आरोपों को जांच के बिना ही उन्हें झूठा साबित कर दिया जाता है। इसे लेकर शिकायत दर्ज कराने वाले परेशान हैं। वह पोर्टल पर मनमानी की शिकायत भी करते हैं। पर, कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं होता। यही वजह है कि आम लोगों का विश्वास अब इस पोर्टल से उठता जा रहा है।
केस-1
पूरामुफ्ती निवासी जाकिर सईद ने सात जनवरी को आईजीआरएस पोर्टल पर मारपीट और लूट की शिकायत की थी। उसका आरोप है कि पुलिस वाले जांच करने तक नहीं आए। सीओ ने स्थानीय थाने से आख्या लेकर ऐसी कोई घटना ही नहीं होने की फर्जी रिपोर्ट लगा दी।
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केस-2
कोखराज के बम्हरौली निवासी नरेन्द्र दुबे ने करीब पांच महीने पहले मवेशी तस्करी की शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि पुलिस ने जांच के बिना ही शिकायत को झूठा करार दे दिया और फर्जी शिकायत किए जाने की रिपोर्ट लगा दी। जबकि उनके पास तस्करी का प्रमाण भी है।
केस-3
चायल ब्लॉक प्रमुख सोनू कुमार ने बताया कि उन्होंने आईजीआरएस पोर्टल पर जानमाल की सुरक्षा के लिए चार महीने के बीच करीब आठ बार शिकायत दर्ज कराई। हर दफा अधिकारियों ने फर्जी तरीके से निस्तारण कर दिया। बाद में सीधी शिकायत पर शासन ने महीने भर पहले सुरक्षा कर्मचारी उपलब्ध कराया।
इनका कहना है
आईजीआरएस पोर्टल पर होेने वाली शिकायत कर निष्पक्ष जांच करके निस्तारण किया जाता है। किसी को कोई समस्या है तो वह सीधे शिकायत कर सकता है। जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
अशोक कुमार-एएसपी
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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आम जनता की शिकायतों का आसानी से निस्तारण कराने के लिए जनसुनवाई पोर्टल लांच कराया है।
शासन का मकसद लोगों को घर बैठे इंसाफ दिलाने का है। पर, जिले के पुलिस अधिकारियों की मनमानी की वजह से सरकार की इस मंशा पर पानी फिरता नजर आ रहा है। बताया जाता है कि पोर्टल पर दर्ज होने वाले अधिकतर मामलों की जांच तक नहीं की जाती। अफसर दफ्तर में बैठे-बैठे निस्तारण की रिपोर्ट लगा देते हैं। शिकायतकर्ताओं के आरोपों को जांच के बिना ही उन्हें झूठा साबित कर दिया जाता है। इसे लेकर शिकायत दर्ज कराने वाले परेशान हैं। वह पोर्टल पर मनमानी की शिकायत भी करते हैं। पर, कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं होता। यही वजह है कि आम लोगों का विश्वास अब इस पोर्टल से उठता जा रहा है।
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केस-1
पूरामुफ्ती निवासी जाकिर सईद ने सात जनवरी को आईजीआरएस पोर्टल पर मारपीट और लूट की शिकायत की थी। उसका आरोप है कि पुलिस वाले जांच करने तक नहीं आए। सीओ ने स्थानीय थाने से आख्या लेकर ऐसी कोई घटना ही नहीं होने की फर्जी रिपोर्ट लगा दी।
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केस-2
कोखराज के बम्हरौली निवासी नरेन्द्र दुबे ने करीब पांच महीने पहले मवेशी तस्करी की शिकायत दर्ज कराई थी। उनका आरोप है कि पुलिस ने जांच के बिना ही शिकायत को झूठा करार दे दिया और फर्जी शिकायत किए जाने की रिपोर्ट लगा दी। जबकि उनके पास तस्करी का प्रमाण भी है।
केस-3
चायल ब्लॉक प्रमुख सोनू कुमार ने बताया कि उन्होंने आईजीआरएस पोर्टल पर जानमाल की सुरक्षा के लिए चार महीने के बीच करीब आठ बार शिकायत दर्ज कराई। हर दफा अधिकारियों ने फर्जी तरीके से निस्तारण कर दिया। बाद में सीधी शिकायत पर शासन ने महीने भर पहले सुरक्षा कर्मचारी उपलब्ध कराया।
इनका कहना है
आईजीआरएस पोर्टल पर होेने वाली शिकायत कर निष्पक्ष जांच करके निस्तारण किया जाता है। किसी को कोई समस्या है तो वह सीधे शिकायत कर सकता है। जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।
अशोक कुमार-एएसपी