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Kasganj News: फर्जी रसीद लगाकर ट्रैक्टर छुड़ाने वाले आरोपियों की जमानत याचिका खारिज
Sat, 23 May 2026 11:38 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Updated Sat, 23 May 2026 11:38 PM IST
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कासगंज। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रत्नेश कुमार श्रीवास्तव की अदालत ने कूटरचित और फर्जी दस्तावेज तैयार कर धोखाधड़ी से थाने से वाहन छुड़ाने के मामले में दो आरोपियों की जमानत याचिका को खारिज कर दिया। आरोपी अनीता जिला बुलंदशहर के थाना नूरा में रतनपुर की निवासी है, जबकि आरोपी सतीश थाना गंजडुंडवारा के गांव अंडऊआ का नगला का रहने वाला है।
खनिज विभाग के निरीक्षक मोहम्मद एजाज खान ने 30 मार्च, 2026 को थाना गंजडुंडवारा में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि आरोपी सतीश के कब्जे से एक ट्रैक्टर लोडर को किसी मामले में सीज किया गया था, जिसकी मालिक अनीता देवी हैं। इस वाहन को छुड़ाने के लिए नियमानुसार कोषागार या सरकारी पोर्टल पर निर्धारित शमन शुल्क जमा करना था। जब इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार के कोशवानी पोर्टल पर ऑनलाइन जांच की गई तो एक बड़ा फर्जीवाड़ा प्रकाश में आया था। जांच में पाया गया कि वाहन स्वामी अनीता देवी ने वास्तविक देय राशि 2,50,000 रुपये के स्थान पर केवल 10,000 रुपये ही जमा किए गए थे। आरोपी सतीश और अनीता देवी ने सरकारी राजस्व को बचाने और सरकार को धोखा देने की नीयत से फर्जी व कूटरचित दस्तावेज तैयार किए थे। आरोपियों ने 10,000 रुपये की वास्तविक जमा रसीद में हेरफेर कर उसे ढाई लाख रुपये की रसीद के रूप में प्रदर्शित किया था। इस फर्जी रसीद का इस्तेमाल कर आरोपियों ने पुलिस प्रशासन को गुमराह किया और ट्रैक्टर लोडर को गंजडुंडवारा थाने से छुड़ा लिया था। आरोपियों ने सीधे तौर पर सरकारी खजाने को वित्तीय नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया था।
फर्जीवाड़े के मामले में आरोपियों ने कोर्ट में जमानत के लिए याचिका लगाई। इस पर सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से उनके अधिवक्ता ने शपथपत्र प्रस्तुत कर जमानत की मांग की। मामले में न्यायाधीश रत्नेश कुमार श्रीवास्तव ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपियों ने राजस्व की चोरी करने और व्यवस्था को धोखा देने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने का गंभीर अपराध किया है। ऐसे आरोपियों को राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने दोनों आरोपियों की जमानत याचिका को निरस्त कर दिया।
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खनिज विभाग के निरीक्षक मोहम्मद एजाज खान ने 30 मार्च, 2026 को थाना गंजडुंडवारा में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि आरोपी सतीश के कब्जे से एक ट्रैक्टर लोडर को किसी मामले में सीज किया गया था, जिसकी मालिक अनीता देवी हैं। इस वाहन को छुड़ाने के लिए नियमानुसार कोषागार या सरकारी पोर्टल पर निर्धारित शमन शुल्क जमा करना था। जब इस संबंध में उत्तर प्रदेश सरकार के कोशवानी पोर्टल पर ऑनलाइन जांच की गई तो एक बड़ा फर्जीवाड़ा प्रकाश में आया था। जांच में पाया गया कि वाहन स्वामी अनीता देवी ने वास्तविक देय राशि 2,50,000 रुपये के स्थान पर केवल 10,000 रुपये ही जमा किए गए थे। आरोपी सतीश और अनीता देवी ने सरकारी राजस्व को बचाने और सरकार को धोखा देने की नीयत से फर्जी व कूटरचित दस्तावेज तैयार किए थे। आरोपियों ने 10,000 रुपये की वास्तविक जमा रसीद में हेरफेर कर उसे ढाई लाख रुपये की रसीद के रूप में प्रदर्शित किया था। इस फर्जी रसीद का इस्तेमाल कर आरोपियों ने पुलिस प्रशासन को गुमराह किया और ट्रैक्टर लोडर को गंजडुंडवारा थाने से छुड़ा लिया था। आरोपियों ने सीधे तौर पर सरकारी खजाने को वित्तीय नुकसान पहुंचाने का प्रयास किया था।
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फर्जीवाड़े के मामले में आरोपियों ने कोर्ट में जमानत के लिए याचिका लगाई। इस पर सुनवाई के दौरान आरोपियों की ओर से उनके अधिवक्ता ने शपथपत्र प्रस्तुत कर जमानत की मांग की। मामले में न्यायाधीश रत्नेश कुमार श्रीवास्तव ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि आरोपियों ने राजस्व की चोरी करने और व्यवस्था को धोखा देने के लिए फर्जी दस्तावेज तैयार करने का गंभीर अपराध किया है। ऐसे आरोपियों को राहत नहीं दी जा सकती। कोर्ट ने दोनों आरोपियों की जमानत याचिका को निरस्त कर दिया।
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