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Kasganj News: तेज रफ्तार टैंकर की टक्कर से छात्रा की मौत, हंगामा

Fri, 07 Aug 2026 11:33 PM IST
Agra Bureau आगरा ब्यूरो
Updated Fri, 07 Aug 2026 11:33 PM IST
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Student killed after being hit by speeding tanker; commotion ensues.
फोटो16मृतक छात्रा ज्योति का फाइल फोटो।
कासगंज। ढोलना क्षेत्र में शुक्रवार की दोपहर तेज रफ्तार टैंकर ने स्कूल से घर लौट रही साइकिल सवार छात्रा को टक्कर मार दी। टक्कर लगने के बाद उसकी मौत हो गई। छात्रा की मौत के बाद परिजन व ग्रामीणों ने पुलिस के समक्ष आक्रोश व्यक्त किया। पुलिस ने टैंकर को अपने कब्जे में ले लिया है।
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गांव गंगाबास निवासी ज्योति (15) पुत्री प्रताप सिंह हिम्मतपुरसई के एक निजी स्कूल में पढ़ती थी। वह शुक्रवार की सुबह स्कूल में पढ़ने के लिए गई थी। पिता प्रताप सिंह ने बताया कि जब वह स्कूल से पढ़ने के बाद साइकिल पर सवार होकर घर लौट रही थी। इसी दौरान भगवंतपुर पुल के पास तेज रफ्तार टैंकर ने उसकी साइकिल में टक्कर मार दी।
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टक्कर इतनी जोरदार थी कि वह सड़क पर दूर जा गिरी और घायल हो गई। घटना के बाद राहगीर व आस-पास के लोग मौके की ओर दौड़ पड़े। घटना की सूचना किसी ने फोन कर पुलिस को दी। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंच गई। आनन-फानन में पुलिस ने छात्रा को जिला अस्पताल भेजा। जहां पर डॉक्टर ने से मृत घोषित कर दिया।
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उसकी मौत के बाद परिजन व ग्रामीणों ने पुलिस के समक्ष अपना आक्रोश व्यक्त किया। सदर सीओ आंचल चौहान मौके पर पहुंच गई। उन्होंने आक्रोशित परिजन व ग्रामीणों को समझाकर मामला शांत कराया। पुलिस कर्मियों ने टैंकर को अपने कब्जे में ले लिया। सदर सीओ आंचल चौहान ने बताया कि छात्रा के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा है। परिजन की ओर से तहरीर मिलने पर आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की जाएगी।

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डॉक्टर बनना चाहती थी ज्योति
कासगंज। छात्रा ज्योति कक्षा 10 में पढ़ती थी। उसके पिता प्रताप सिंह ने बताया कि तीन बच्चों में ज्योति सबसे बड़ी थी। उनके दो बेटे कुश (13) और रमाकांत (10) हैं। वह कृषि व मजदूरी करके परिवार का पालन पोषण करते हैं। उन्होंने बताया कि बेटी ज्योति पढ़ाई में बहुत होशियार थी। वह हमेश अव्वल नंबर से कक्षा में पास होती थी। उन्होंने बताया कि ज्योति डॉक्टर बनना चाहती थी। पढ़ने की ललक में वह 4 किलोमीटर दूर साइकिल से स्कूल जाती थी। बेटी की मौत के बाद उनकी आंखे नम थी। उन्होंने रोते हुए बताया कि बेटी के डॉक्टर बनने का सपना आंखों में सजोया था। जिला अस्पताल पर उसकी मां सुखदेवी व अन्य परिजन का रो-रोकर बुरा हाल है। संवाद
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