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Kasganj News: बदलते मौसम में बच्चों पर निमोनिया का खतरा, सात में मिले लक्षण
Mon, 26 Oct 2026 11:24 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Updated Mon, 26 Oct 2026 11:24 PM IST
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फोटो 21 जिला अस्पताल में बच्चों को देखती बाल रोग चिकित्सक। संवाद
कासगंज। बदलते मौसम में सर्दी, खांसी और बुखार की शिकायतों के बीच निमोनिया का खतरा भी बढ़ रहा है। सोमवार को जिला अस्पताल के बाल रोग विभाग में 122 बच्चे उपचार के लिए पहुंचे। इनमें से सात बच्चों में निमोनिया के लक्षण मिले। चिकित्सक अभिभावकों को बच्चों की सेहत पर नजर रखने और लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेने की हिदायत दे रहे हैं।
निमोनिया फेफड़ों में होने वाला संक्रमण है। इसमें फेफड़ों की वायु थैलियों में सूजन आ सकती है और उनमें तरल भरने से सांस लेने में परेशानी हो सकती है। छोटे बच्चों में यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। इसलिए तेज या लगातार बुखार, खांसी, तेज सांस चलने और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बच्चों को बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं न दें।
निमोनिया से बचाव के उपाय
-बच्चों को धूल और धुएं से बचाएं।
-घर में साफ-सफाई रखें और हाथ धोने की आदत डालें।
-बच्चों का टीकाकरण समय पर कराएं।
-पौष्टिक भोजन दें और बीमार लोगों के संपर्क से बचाएं।
इन लक्षणों पर रहें सतर्क
खांसी और बुखार
सांस लेते समय छाती का अंदर धंसना
दूध या भोजन लेने में परेशानी
असामान्य सुस्ती या होंठों का नीला पड़ना
शिशुओं में सांस लेने में परेशानी, पसलियों के नीचे छाती धंसने, दूध न पीने या असामान्य सुस्ती जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल ले जाएं। समय पर जांच और उपचार से गंभीर जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है। -डॉ. संजीव सक्सेना, सीएमएस
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निमोनिया फेफड़ों में होने वाला संक्रमण है। इसमें फेफड़ों की वायु थैलियों में सूजन आ सकती है और उनमें तरल भरने से सांस लेने में परेशानी हो सकती है। छोटे बच्चों में यह संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। इसलिए तेज या लगातार बुखार, खांसी, तेज सांस चलने और सांस लेने में कठिनाई जैसे लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। बच्चों को बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक या अन्य दवाएं न दें।
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निमोनिया से बचाव के उपाय
-बच्चों को धूल और धुएं से बचाएं।
-घर में साफ-सफाई रखें और हाथ धोने की आदत डालें।
-बच्चों का टीकाकरण समय पर कराएं।
-पौष्टिक भोजन दें और बीमार लोगों के संपर्क से बचाएं।
इन लक्षणों पर रहें सतर्क
खांसी और बुखार
सांस लेते समय छाती का अंदर धंसना
दूध या भोजन लेने में परेशानी
असामान्य सुस्ती या होंठों का नीला पड़ना
शिशुओं में सांस लेने में परेशानी, पसलियों के नीचे छाती धंसने, दूध न पीने या असामान्य सुस्ती जैसे लक्षण दिखें तो तुरंत अस्पताल ले जाएं। समय पर जांच और उपचार से गंभीर जटिलताओं का खतरा कम किया जा सकता है। -डॉ. संजीव सक्सेना, सीएमएस
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