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Kasganj News: पाले से बर्बाद हो रही खेतों तैयार मटर की फसल
Thu, 15 Jan 2026 11:01 PM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Updated Thu, 15 Jan 2026 11:01 PM IST
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फोटो23मोहनपुरा में पाले से खराब हुई मटर की फली। संवाद
कासगंज/मोहनपुरा। लगातार पड़ रही कड़ाके की ठंड फसलों के लिए भी नुकसानदायक साबित होने लगा है। पाला गिरने से मटर की फलियां सफेद होने लगी हैं अब उनमें दाना नहीं पड़ेगा। वहीं आलू की फसल पर भी आंशिक असर नजर आने से किसान चिंतित हो उठे हैं। किसान लगातार पाले से बचाव के लिए खेतों में उपाय कर रहे हैं।
पाले का प्रभाव कम करने के लिए किसान खेतों में सिंचाई भी कर रहे हैं। बुधवार रात और बृहस्पतिवार की सुबह जबरदस्त पाला पड़ा। खेतों में पाले की सफेद परत फसल पर जमी नजर आई। जिले में करीब 6000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में किसान मटर की फसल करते हैं। यह किसानों की नकदी फसल है। खेतों में मटर का उत्पादन कम हो पा रहा है। जिससे किसानों की लागत निकलना मुश्किल हो रहा है।
गांव नगला सुम्मी के किसान दिनेश चौहान बताते हैं कि मटर की फसल में फूल आ रहा है। पाला गिरने से फूल झड़ गए हैं। बचाव के लिए स्प्रिंकल से हल्की सिंचाई की है। वहीं रामपुर के गंगा प्रसाद बताते हैं कि कुछ दिन पहले ही मटर की फसल में फलियां लगी थीं। पाला गिरने से फलियां सफेद पड़ गई हैं। करीब 50 प्रतिशत उत्पादन प्रभावित हो गया। निजामपुर के विपिन चौहान का कहना है कि आलू की फसल में पानी लगाया है। साथ ही पाला से फसल को बचाव के उपाय कर रहे हैं। यदि और पाला लगातार गिरता है तो ज्यादा नुकसान हो सकता है। कांतौर के रामखिलाड़ी बताते हैं कि खेत में मटर, आलू और सब्जियां उगाई हैं। पाले का असर नजर आने लगा है। पाले का लगातार गिरना सभी फसलों के लिए हानिकारक है। कृषि विज्ञान केंद्र मोहनपुरा के कृषि वैज्ञानिक उद्यानिकी, डॉ. अंकित सिंह भदौरिया बताते हैं कि पाले से बचाव के लिए सभी किसान खेतों में नमी बनाकर रखें जिससे तापमान नियंत्रित रह सके। इसके अतिरिक्त खेत के चारों तरफ धुआं कर दें। अधिक जानकारी अथवा सहायता के लिए कृषि विज्ञान केंद्र मोहनपुरा में संबंधित वैज्ञानिक से संपर्क कर सकते हैं।
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पाले का प्रभाव कम करने के लिए किसान खेतों में सिंचाई भी कर रहे हैं। बुधवार रात और बृहस्पतिवार की सुबह जबरदस्त पाला पड़ा। खेतों में पाले की सफेद परत फसल पर जमी नजर आई। जिले में करीब 6000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में किसान मटर की फसल करते हैं। यह किसानों की नकदी फसल है। खेतों में मटर का उत्पादन कम हो पा रहा है। जिससे किसानों की लागत निकलना मुश्किल हो रहा है।
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गांव नगला सुम्मी के किसान दिनेश चौहान बताते हैं कि मटर की फसल में फूल आ रहा है। पाला गिरने से फूल झड़ गए हैं। बचाव के लिए स्प्रिंकल से हल्की सिंचाई की है। वहीं रामपुर के गंगा प्रसाद बताते हैं कि कुछ दिन पहले ही मटर की फसल में फलियां लगी थीं। पाला गिरने से फलियां सफेद पड़ गई हैं। करीब 50 प्रतिशत उत्पादन प्रभावित हो गया। निजामपुर के विपिन चौहान का कहना है कि आलू की फसल में पानी लगाया है। साथ ही पाला से फसल को बचाव के उपाय कर रहे हैं। यदि और पाला लगातार गिरता है तो ज्यादा नुकसान हो सकता है। कांतौर के रामखिलाड़ी बताते हैं कि खेत में मटर, आलू और सब्जियां उगाई हैं। पाले का असर नजर आने लगा है। पाले का लगातार गिरना सभी फसलों के लिए हानिकारक है। कृषि विज्ञान केंद्र मोहनपुरा के कृषि वैज्ञानिक उद्यानिकी, डॉ. अंकित सिंह भदौरिया बताते हैं कि पाले से बचाव के लिए सभी किसान खेतों में नमी बनाकर रखें जिससे तापमान नियंत्रित रह सके। इसके अतिरिक्त खेत के चारों तरफ धुआं कर दें। अधिक जानकारी अथवा सहायता के लिए कृषि विज्ञान केंद्र मोहनपुरा में संबंधित वैज्ञानिक से संपर्क कर सकते हैं।
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