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महाशिवरात्रि: श्रद्धा का सफर और विश्वास की कांवड़
Sun, 15 Feb 2026 12:43 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Updated Sun, 15 Feb 2026 12:43 AM IST
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फोटो13कासगंज-सोरोंजी मार्ग से गुजरता कांवड़ियों का जत्था। संवाद
सोरोंजी (कासगंज)। इन दिनों तीर्थनगरी में श्रद्धा का सैलाब और भक्ति की बयार चरम पर है। शुक्रवार रात से उफने कांवड़ियों के ज्वार ने लहरा गंगाघाट से एटा रोड व सिकंदराराऊ रोड तक नजर आया। गंगा के इस रेतीले घाट पर जहां तक नजर जा रही थी वहां कांवड़िये ही नजर आ रहे थे। कोई कांवड़ सजा रहा था तो कोई गंगास्नान कर रहा था। हर किसी की जुबां पर शिव की भक्ति के गीत थे। श्रद्धा और भक्ति का ऐसा अद्भुत सैलाब पूरे दिन और रात भर बना रहा। घाट से भोलेनाथ की जय जयकार करते हुए हर उम्र के श्रद्धालु टोलियों के साथ गंतव्य की ओर रवाना हो रहे थे।
शुक्रवार की रात से शनिवार की देर रात तक करीब पांच लाख कांवड़ियों के कांवड़ भरकर ले जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। लहरा गंगाघाट से एटा रोड व सिकंदराराऊ रोड तक आस्था की पथ पर चल रहे कांवड़ियों की कतारें टूटने का नाम नहीं ले रहीं थीं। शिवभक्ति का यह अद्भुत मनमोहक नजारा 30 से 35 किलोमीटर के दायरे में लगातार बना हुआ था। शनिवार को पूरे दिन जितने कांवड़िये लहरा गंगाघाट से कांवड़ भरकर गंतव्य की ओर रवाना हो रहे थे उससे अधिक कांवड़ भरने के लिए घाट की ओर रवाना हो रहे थे। कांधे पर कांवड़, हाथों में बैंत, पैरों में घुंघरू और मुंह से सीटी बजाते कांवड़ियों की टोलियां तेजी से निकलती जा रहीं थीं। तड़के ही महाशिवरात्रि पर अभिषेक करने की चाहत में कांवड़िये गंतव्य के लिए रवाना हो रहे थे।
दूर दूर के कांवड़ियों की टोलियों में महिलाएं भी पुरुषों के कदमों के साथ कदम बढ़ाते हुए चल रहीं थीं। न किसी के चेहरे पर शिकन न थकान बस शिवभक्ति का उत्साह ही नजर आ रहा था। जगह जगह गंगा की तलहटी में रेत पर कांवडिय़ों की टोलियां ठहरी हुईं थीं। जो अपनी कांवड़ों की साज सज्जा कर रहीं थीं।
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तीर्थनगरी के कांवड़ बाजार से कांवड़े खरीदने के बाद लोग उन्हें सतरंगी रूप से सजा रहे थे। तमाम लोग अपनी पुरानीं कांवड़े लेकर पहुंचे। उन्होंने नई गंगाजली खरीदी और कांवड़ की साज सज्जा का सामान खरीदा। वहीं तमाम श्रद्धालु अपनी पुरानी कांवड़ों को लहरा गंगाघाट पर विसर्जित करते नजर आए। देर रात्रि तक कांवडिय़ों की टोलियां लगातार चलती रहीं।
सीओ आंचल चौहान का कहना है कि सही संख्या बताना तो मुश्किल है। लेकिन एक अनुमान के अनुसार करीब पांच लाख कांवड़िये कांवड़ भरकर ले गए हैं।
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शुक्रवार की रात से शनिवार की देर रात तक करीब पांच लाख कांवड़ियों के कांवड़ भरकर ले जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। लहरा गंगाघाट से एटा रोड व सिकंदराराऊ रोड तक आस्था की पथ पर चल रहे कांवड़ियों की कतारें टूटने का नाम नहीं ले रहीं थीं। शिवभक्ति का यह अद्भुत मनमोहक नजारा 30 से 35 किलोमीटर के दायरे में लगातार बना हुआ था। शनिवार को पूरे दिन जितने कांवड़िये लहरा गंगाघाट से कांवड़ भरकर गंतव्य की ओर रवाना हो रहे थे उससे अधिक कांवड़ भरने के लिए घाट की ओर रवाना हो रहे थे। कांधे पर कांवड़, हाथों में बैंत, पैरों में घुंघरू और मुंह से सीटी बजाते कांवड़ियों की टोलियां तेजी से निकलती जा रहीं थीं। तड़के ही महाशिवरात्रि पर अभिषेक करने की चाहत में कांवड़िये गंतव्य के लिए रवाना हो रहे थे।
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दूर दूर के कांवड़ियों की टोलियों में महिलाएं भी पुरुषों के कदमों के साथ कदम बढ़ाते हुए चल रहीं थीं। न किसी के चेहरे पर शिकन न थकान बस शिवभक्ति का उत्साह ही नजर आ रहा था। जगह जगह गंगा की तलहटी में रेत पर कांवडिय़ों की टोलियां ठहरी हुईं थीं। जो अपनी कांवड़ों की साज सज्जा कर रहीं थीं।
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तीर्थनगरी के कांवड़ बाजार से कांवड़े खरीदने के बाद लोग उन्हें सतरंगी रूप से सजा रहे थे। तमाम लोग अपनी पुरानीं कांवड़े लेकर पहुंचे। उन्होंने नई गंगाजली खरीदी और कांवड़ की साज सज्जा का सामान खरीदा। वहीं तमाम श्रद्धालु अपनी पुरानी कांवड़ों को लहरा गंगाघाट पर विसर्जित करते नजर आए। देर रात्रि तक कांवडिय़ों की टोलियां लगातार चलती रहीं।
सीओ आंचल चौहान का कहना है कि सही संख्या बताना तो मुश्किल है। लेकिन एक अनुमान के अनुसार करीब पांच लाख कांवड़िये कांवड़ भरकर ले गए हैं।