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Kasganj News: जन्म के साथ मिलने वाली सुरक्षा पर ब्रेक, 15 दिन से नहीं है हेपेटाइटिस-बी वैक्सीन
Sun, 21 Jun 2026 12:28 AM IST
आगरा ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
संवाद न्यूज एजेंसी, कासगंज
Updated Sun, 21 Jun 2026 12:28 AM IST
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कासगंज। जन्म लेते ही गंभीर बीमारियों से बचाव के लिए मिलने वाला पहला सुरक्षा कवच इन दिनों जिले में उपलब्ध नहीं है। हेपेटाइटिस-बी की बर्थ डोज पिछले 15 दिनों से खत्म होने के कारण नवजात शिशुओं का नियमित टीकाकरण प्रभावित हो रहा है। जिला अस्पताल से लेकर ब्लॉक स्तरीय स्वास्थ्य केंद्रों तक वैक्सीन की कमी बनी हुई है, जिससे अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। जिले में प्रतिमाह करीब दो हजार नवजातों को यह टीका लगाया जाता है।
राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत हेपेटाइटिस-बी की पहली खुराक जन्म के 24 घंटे के भीतर दी जाती है। चिकित्सकों के अनुसार यह डोज नवजात को संक्रमण से बचाने में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके बाद ढाई माह और छह माह की आयु पर अगली खुराक दी जाती है। जन्म के समय टीका न लगने से संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है, विशेषकर उन बच्चों में जिनकी माताएं हेपेटाइटिस-बी संक्रमण से प्रभावित हों।
विशेषज्ञों का कहना है कि हेपेटाइटिस-बी वायरस सीधे लिवर को प्रभावित करता है। नवजात और छोटे बच्चों में शुरुआती चरण में बीमारी के लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते, लेकिन आगे चलकर पीलिया, भूख न लगना, लगातार थकान, उल्टी, पेट दर्द और लिवर संबंधी गंभीर जटिलताएं विकसित हो सकती हैं। कई मामलों में संक्रमण लंबे समय तक शरीर में बना रह सकता है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में वैक्सीन की आपूर्ति पिछले 15 दिनों से नहीं हो सकी है।
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क्यों जरूरी है बर्थ डोज
-जन्म के 24 घंटे के भीतर लगाई जाती है पहली खुराक
-हेपेटाइटिस-बी संक्रमण से शुरुआती सुरक्षा प्रदान करती है
-लीवर संबंधी गंभीर बीमारियों के खतरे को कम करती है
हेपेटाइटिस-बी के संभावित लक्षण
-पीलिया (आंखों और त्वचा का पीला पड़ना)
-भूख कम लगना
-उल्टी और कमजोरी
-पेट दर्द
-अत्यधिक थकान
-लिवर संबंधी जटिलताएं
जिले में स्थिति
-15 दिन से बर्थ डोज का स्टॉक खत्म
-हर माह करीब 2000 नवजातों को लगती है वैक्सीन
-जिला अस्पताल समेत सभी स्वास्थ्य केंद्र प्रभावित
वर्जन
वैक्सीन की उपलब्धता के लिए अलीगढ़, आगरा और लखनऊ स्तर पर भी जानकारी की गई, लेकिन वहां भी स्टॉक उपलब्ध नहीं है। नई खेप मिलते ही टीकाकरण कार्य पुनः शुरू कर दिया जाएगा।- डॉ. कुलदीप, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
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राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम के तहत हेपेटाइटिस-बी की पहली खुराक जन्म के 24 घंटे के भीतर दी जाती है। चिकित्सकों के अनुसार यह डोज नवजात को संक्रमण से बचाने में सबसे महत्वपूर्ण मानी जाती है। इसके बाद ढाई माह और छह माह की आयु पर अगली खुराक दी जाती है। जन्म के समय टीका न लगने से संक्रमण का जोखिम बढ़ सकता है, विशेषकर उन बच्चों में जिनकी माताएं हेपेटाइटिस-बी संक्रमण से प्रभावित हों।
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विशेषज्ञों का कहना है कि हेपेटाइटिस-बी वायरस सीधे लिवर को प्रभावित करता है। नवजात और छोटे बच्चों में शुरुआती चरण में बीमारी के लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते, लेकिन आगे चलकर पीलिया, भूख न लगना, लगातार थकान, उल्टी, पेट दर्द और लिवर संबंधी गंभीर जटिलताएं विकसित हो सकती हैं। कई मामलों में संक्रमण लंबे समय तक शरीर में बना रह सकता है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में वैक्सीन की आपूर्ति पिछले 15 दिनों से नहीं हो सकी है।
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क्यों जरूरी है बर्थ डोज
-जन्म के 24 घंटे के भीतर लगाई जाती है पहली खुराक
-हेपेटाइटिस-बी संक्रमण से शुरुआती सुरक्षा प्रदान करती है
-लीवर संबंधी गंभीर बीमारियों के खतरे को कम करती है
हेपेटाइटिस-बी के संभावित लक्षण
-पीलिया (आंखों और त्वचा का पीला पड़ना)
-भूख कम लगना
-उल्टी और कमजोरी
-पेट दर्द
-अत्यधिक थकान
-लिवर संबंधी जटिलताएं
जिले में स्थिति
-15 दिन से बर्थ डोज का स्टॉक खत्म
-हर माह करीब 2000 नवजातों को लगती है वैक्सीन
-जिला अस्पताल समेत सभी स्वास्थ्य केंद्र प्रभावित
वर्जन
वैक्सीन की उपलब्धता के लिए अलीगढ़, आगरा और लखनऊ स्तर पर भी जानकारी की गई, लेकिन वहां भी स्टॉक उपलब्ध नहीं है। नई खेप मिलते ही टीकाकरण कार्य पुनः शुरू कर दिया जाएगा।- डॉ. कुलदीप, जिला प्रतिरक्षण अधिकारी