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Kasganj News: पिछड़ेपन के मूल कारणों और ओबीसी आरक्षण पर आयोग का मंथन
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फोटो 24- कासगंज कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह
कासगंज। उत्तर प्रदेश राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह की अध्यक्षता में शुक्रवार को रुद्राक्ष सभागार में जिले के पिछड़ेपन की स्थिति का अध्ययन करने के लिए बैठक की गई। बैठक में जिला पंचायत अध्यक्ष, प्रशासकों, ब्लॉक प्रमुखों, क्षेत्र पंचायत सदस्यों और ग्राम प्रधानों ने हिस्सा लिया व सुझाव और जानकारियां दीं।
न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में आयोग प्रदेशभर के जिलों का दौरा कर अन्य पिछड़ा वर्ग की सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और राजनीतिक वास्तविक स्थिति का आकलन कर रहा है। स्थानीय ग्रामीण निकायों में ओबीसी के राजनीतिक प्रतिनिधित्व एवं आरक्षण से जुड़े तथ्यों का गहन अध्ययन कर प्राप्त आपत्तियों और सुझावों के आधार पर सरकार को संस्तुतियां सौंपी जाएंगी।
सत्र के दौरान जनप्रतिनिधियों से प्रश्नोत्तर के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पिछड़ेपन के मूल कारणों और स्थानीय निकायों में ओबीसी की भागीदारी पर चर्चा की गई। जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीण अंचलों में शिक्षा के स्तर में सुधार लाने, रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर विशेष जोर दिया। जिला पंचायत अध्यक्ष रत्नेश कश्यप ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि जिले में पिछड़ा वर्ग की आबादी 7,17,009 है और वर्तमान में 6 जिला पंचायत सदस्य इसी वर्ग का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
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रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी
आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि पिछड़ेपन का सही आकलन केवल प्रामाणिक तथ्यों और जनसहभागिता के जरिए ही संभव है। प्राप्त सभी सूचनाओं और सुझावों को संकलित करके आयोग अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को प्रेषित करेगा। बैठक में आयोग के अन्य सदस्य बृजेश कुमार, संतोष कुमार विश्वकर्मा, डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया और एसपी सिंह भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में जिलाधिकारी प्रणय सिंह और मुख्य विकास अधिकारी वीरेंद्र सिंह ने आयोग के अध्यक्ष, सदस्यों तथा सभी जनप्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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न्यायमूर्ति राम औतार सिंह ने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के अनुपालन में आयोग प्रदेशभर के जिलों का दौरा कर अन्य पिछड़ा वर्ग की सामाजिक, शैक्षणिक, आर्थिक और राजनीतिक वास्तविक स्थिति का आकलन कर रहा है। स्थानीय ग्रामीण निकायों में ओबीसी के राजनीतिक प्रतिनिधित्व एवं आरक्षण से जुड़े तथ्यों का गहन अध्ययन कर प्राप्त आपत्तियों और सुझावों के आधार पर सरकार को संस्तुतियां सौंपी जाएंगी।
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सत्र के दौरान जनप्रतिनिधियों से प्रश्नोत्तर के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पिछड़ेपन के मूल कारणों और स्थानीय निकायों में ओबीसी की भागीदारी पर चर्चा की गई। जनप्रतिनिधियों ने ग्रामीण अंचलों में शिक्षा के स्तर में सुधार लाने, रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा देने और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित करने पर विशेष जोर दिया। जिला पंचायत अध्यक्ष रत्नेश कश्यप ने आंकड़े साझा करते हुए बताया कि जिले में पिछड़ा वर्ग की आबादी 7,17,009 है और वर्तमान में 6 जिला पंचायत सदस्य इसी वर्ग का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
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रिपोर्ट तैयार कर शासन को भेजी जाएगी
आयोग के अध्यक्ष ने कहा कि पिछड़ेपन का सही आकलन केवल प्रामाणिक तथ्यों और जनसहभागिता के जरिए ही संभव है। प्राप्त सभी सूचनाओं और सुझावों को संकलित करके आयोग अपनी विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर शासन को प्रेषित करेगा। बैठक में आयोग के अन्य सदस्य बृजेश कुमार, संतोष कुमार विश्वकर्मा, डॉ. अरविंद कुमार चौरसिया और एसपी सिंह भी मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में जिलाधिकारी प्रणय सिंह और मुख्य विकास अधिकारी वीरेंद्र सिंह ने आयोग के अध्यक्ष, सदस्यों तथा सभी जनप्रतिनिधियों के प्रति आभार व्यक्त किया।

फोटो 24- कासगंज कलेक्ट्रेट में जिलाधिकारी पिछड़ा वर्ग आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति राम औतार सिंह