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Kanpur: गुर्दे की खराबी से युवाओं का ब्लड प्रेशर हाई, ये बातें जानना बेहद जरूरी
Mon, 07 Jul 2025 11:21 AM IST
शिखा पांडेय
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 07 Jul 2025 11:21 AM IST
सार
Kanpur News: रेनिन रसायन का स्राव बढ़ जाता है। जिससे बीपी एक दवा से नियंत्रित नहीं हो पाती। कॉम्बिनेशन वाली दवाएं देनी पड़ती हैं।
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
गुर्दे में खराबी युवाओं का ब्लड प्रेशर हाई हो रहा है। चिंता की बात यह है कि इन रोगियों का ब्लड प्रेशर एक दवा से कम नहीं होता, उन्हें दो-तीन दवाएं या फिर दवाओं का कॉम्बिनेशन लेना पड़ता है। खराबी गुर्दे में पहले होती है और पता पहले ब्लड प्रेशर का चलता है। मल्टी सुपर स्पेशियलिटी एंड पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट के नेफ्रोलॉजी विभाग के सैंपल सर्वे में यह तथ्य पता चला है। रोगियों की जांच से पता चला है कि गुर्दे की छन्नियों और नसों में पहले खराबी आती है जिससे रेनिन नामक रसायन निकलता है, जो ब्लड प्रेशर बढ़ा देता है।
नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. युवराज गुलाटी ने बताया कि ओपीडी में हर महीने औसत 1000 गुर्दा रोगी आते हैं। इनमें 100 रोगी ऐसे होते हैं, जिनका ब्लड प्रेशर बढ़ा होता है। उन्हें कई दवाएं बीपी के लिए देनी पड़ती हैं। इन रोगियों का आयु वर्ग 20 से 40 वर्ष के बीच होता है। इनके ब्लड प्रेशर बढ़ने का मुख्य कारण गुर्दे की खराब होना होता है। यह समस्या रोगी को पता नहीं होती। जांचों में गुर्दे की गड़बड़ी पकड़ में आती है। उन्होंने बताया कि गुर्दा रोग का यह एक नया तरह का ट्रेंड सामने आ रहा है। यह स्थिति बढ़ रही है। रोगियों की हिस्ट्री का अध्ययन किया गया तो कई तरह के बिंदु सामने आए हैं।
उन्होंने बताया कि कुछ में ऑटो इम्यून कारण होते हैं। शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली उसे नुकसान पहुंचाने लगती है। इससे रोगी के पेशाब से प्रोटीन निकलने लगता है। इससे गुर्दे में खराबी आती है और रेनिन तत्व का रिसाव शुरू हो जाता है। इसकी वजह से ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है। रेनिन का रिसाव होता रहता है तो बीपी जल्दी काबू में नहीं आता है। रोगी के पेशाब में खून भी आता है, लेकिन सामान्य तरीके से देखने पर यह पता नहीं चलता। जब माइक्रोस्कोप से देखा जाता है तो खून के कण दिखते हैं। इसके अलावा धूम्रपान, मोटापा भी गुर्दे में खराबी का बड़ा कारण होता है। रोगियों को बीमारी की असली वजह जांचों के बाद पता चल पाती है।
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ऐसे होते हैं गुर्दे खराब
शरीर में रेनिन एल्ट्रोस्टेरोन सिस्टम होता है। इसमें गड़बड़ी होने पर पेशाब से प्रोटीन जाने पर शरीर में पानी और नमक का जमाव बढ़ने लगता है। इससे शरीर का ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। इसके अलावा गुर्दे की नसें सिकुड़ने लगती हैं और छन्नियां खराब हो जाती हैं। ऐसा कोई संक्रमण होने, धूम्रपान से शरीर में निकोटीन तत्व बढ़ने और कोलेस्ट्राल बढ़ने से होता है।
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नेफ्रोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. युवराज गुलाटी ने बताया कि ओपीडी में हर महीने औसत 1000 गुर्दा रोगी आते हैं। इनमें 100 रोगी ऐसे होते हैं, जिनका ब्लड प्रेशर बढ़ा होता है। उन्हें कई दवाएं बीपी के लिए देनी पड़ती हैं। इन रोगियों का आयु वर्ग 20 से 40 वर्ष के बीच होता है। इनके ब्लड प्रेशर बढ़ने का मुख्य कारण गुर्दे की खराब होना होता है। यह समस्या रोगी को पता नहीं होती। जांचों में गुर्दे की गड़बड़ी पकड़ में आती है। उन्होंने बताया कि गुर्दा रोग का यह एक नया तरह का ट्रेंड सामने आ रहा है। यह स्थिति बढ़ रही है। रोगियों की हिस्ट्री का अध्ययन किया गया तो कई तरह के बिंदु सामने आए हैं।
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उन्होंने बताया कि कुछ में ऑटो इम्यून कारण होते हैं। शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली उसे नुकसान पहुंचाने लगती है। इससे रोगी के पेशाब से प्रोटीन निकलने लगता है। इससे गुर्दे में खराबी आती है और रेनिन तत्व का रिसाव शुरू हो जाता है। इसकी वजह से ब्लड प्रेशर बढ़ने लगता है। रेनिन का रिसाव होता रहता है तो बीपी जल्दी काबू में नहीं आता है। रोगी के पेशाब में खून भी आता है, लेकिन सामान्य तरीके से देखने पर यह पता नहीं चलता। जब माइक्रोस्कोप से देखा जाता है तो खून के कण दिखते हैं। इसके अलावा धूम्रपान, मोटापा भी गुर्दे में खराबी का बड़ा कारण होता है। रोगियों को बीमारी की असली वजह जांचों के बाद पता चल पाती है।
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ऐसे होते हैं गुर्दे खराब
शरीर में रेनिन एल्ट्रोस्टेरोन सिस्टम होता है। इसमें गड़बड़ी होने पर पेशाब से प्रोटीन जाने पर शरीर में पानी और नमक का जमाव बढ़ने लगता है। इससे शरीर का ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। इसके अलावा गुर्दे की नसें सिकुड़ने लगती हैं और छन्नियां खराब हो जाती हैं। ऐसा कोई संक्रमण होने, धूम्रपान से शरीर में निकोटीन तत्व बढ़ने और कोलेस्ट्राल बढ़ने से होता है।