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यूट्यूब के जरिए दुनिया में छा रहे युवा चित्रकार
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Updated Wed, 26 Sep 2018 01:21 AM IST
सार
- विश्वविद्यालय में चल रहा है राष्ट्रीय चित्रकार शिविर
- चित्रों के वीडियो रोज यूट्यूब पर पोस्ट कर रहे छात्र
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विश्वविद्यालय में चल रहा है राष्ट्रीय चित्रकार शिविर
विस्तार
छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू),कानपुर के फाइन आर्ट्स विभाग में चल रहे राष्ट्रीय चित्रकार शिविर में युवा कलाकारों की ओर से तैयार किए जा रहे चित्रों को यूट्यूब पर खूब पसंद किया जा रहा है। इसका वीडियो फाइन आर्ट्स विभाग के छात्र तैयार करके रोजाना यूट्यूब पर पोस्ट कर रहे हैं। वीडियो को अभी तक करीब 50 हजार से ज्यादा लोग देख चुके हैं।
विभाग के प्रभारी डॉ. बृजेश कटियार ने बताया कि वीडियो तैयार करने का मकसद भी यही है कि दूरदराज बैठे लोग भी वीडियो के माध्यम से चित्रकला की विधि सीख सकें। मंगलवार को बरेली से आईं डॉ. मंजू पुंडीर ने अपनी कलाकृतियों से हर किसी का दिल जीत लिया। उन्होंने चंद मिनटों में ऐसा चित्र तैयार किया जिसमें जल की खूबसूरती और उसका महत्व प्रदर्शित किया गया। जल प्रलय का प्रकोप भी चित्र में समाहित था।
जोधपुर विश्वविद्यालय की डॉ. नम्रता स्वर्णकार, बरेली की डॉ. गीता अग्रवाल और दिल्ली कॉलेज के प्रो. शशांक शुक्ला ने भी विभिन्न पेंटिंग बनाईं। शिविर में सहारनपुर से आए डॉ. राम शब्द सिंह ने अपने स्लाइड शो में देश के विभिन्न अंचलों की लोककला पर महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया। डॉ. आलोक भावसार, रघु नेवारे, डॉ. आनंद देव, राजेंद्र निगम, अशोक कुमार सिंह ने भी छात्रों से अपने अनुभव साझा किए। इस मौके पर आयोजक और विभागाध्यक्ष डॉ. बृजेश कटियार, डॉ. संदीप सिंह, पूर्व सीएमओ डॉ. सुबोध तिवारी, डॉ. हृदय गुप्ता, अजय कुमार मौर्या आदि मौजूद रहे।
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नारी के जीवन को किया चित्रित
डीएवी कॉलेज की डॉ. कुमुद बाला ने नारी के जीवन को अपने चित्रों के माध्यम से चित्रित किया। डॉ. अखिलेश श्रीवास्तव ने अपने चित्र में तंत्र के विभिन्न रूपों को साकार किया। शिवांगी कनौजिया ने समाचार पत्रों की कतरनों से कोलाज का सृजन किया। मेरठ से आए डॉ. अमृत लाल ने लोक कला के माध्यम से हाथ व पैरों की छाप से एक युवती की विवाह पूर्व और विवाह के बाद की स्थितियों का चित्रण किया। आगरा के चित्रकार प्रो. अशोक कुमार सिंह ने पर्वत से मैदानी इलाकों तक का चित्रण किया।
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विभाग के प्रभारी डॉ. बृजेश कटियार ने बताया कि वीडियो तैयार करने का मकसद भी यही है कि दूरदराज बैठे लोग भी वीडियो के माध्यम से चित्रकला की विधि सीख सकें। मंगलवार को बरेली से आईं डॉ. मंजू पुंडीर ने अपनी कलाकृतियों से हर किसी का दिल जीत लिया। उन्होंने चंद मिनटों में ऐसा चित्र तैयार किया जिसमें जल की खूबसूरती और उसका महत्व प्रदर्शित किया गया। जल प्रलय का प्रकोप भी चित्र में समाहित था।
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जोधपुर विश्वविद्यालय की डॉ. नम्रता स्वर्णकार, बरेली की डॉ. गीता अग्रवाल और दिल्ली कॉलेज के प्रो. शशांक शुक्ला ने भी विभिन्न पेंटिंग बनाईं। शिविर में सहारनपुर से आए डॉ. राम शब्द सिंह ने अपने स्लाइड शो में देश के विभिन्न अंचलों की लोककला पर महत्वपूर्ण व्याख्यान दिया। डॉ. आलोक भावसार, रघु नेवारे, डॉ. आनंद देव, राजेंद्र निगम, अशोक कुमार सिंह ने भी छात्रों से अपने अनुभव साझा किए। इस मौके पर आयोजक और विभागाध्यक्ष डॉ. बृजेश कटियार, डॉ. संदीप सिंह, पूर्व सीएमओ डॉ. सुबोध तिवारी, डॉ. हृदय गुप्ता, अजय कुमार मौर्या आदि मौजूद रहे।
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नारी के जीवन को किया चित्रित
डीएवी कॉलेज की डॉ. कुमुद बाला ने नारी के जीवन को अपने चित्रों के माध्यम से चित्रित किया। डॉ. अखिलेश श्रीवास्तव ने अपने चित्र में तंत्र के विभिन्न रूपों को साकार किया। शिवांगी कनौजिया ने समाचार पत्रों की कतरनों से कोलाज का सृजन किया। मेरठ से आए डॉ. अमृत लाल ने लोक कला के माध्यम से हाथ व पैरों की छाप से एक युवती की विवाह पूर्व और विवाह के बाद की स्थितियों का चित्रण किया। आगरा के चित्रकार प्रो. अशोक कुमार सिंह ने पर्वत से मैदानी इलाकों तक का चित्रण किया।