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लॉकडाउन: तपती धूप में राजस्थान से नंगे पैर पैदल 1900 किमी के सफर पर निकला युवक, पैरों में पड़े छाले
Fri, 08 May 2020 08:36 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उन्नाव
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Fri, 08 May 2020 08:36 PM IST
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नंगे पैर हरदोई के कस्बे प्रतापनगर जाता युवक।
- फोटो : amar ujala
राजस्थान के जिला जोधपुर से साथियों के साथ उत्तर प्रदेश के हरदोई जाने के लिए निकले युवक के साथी रास्ते में ही बिछड़ गए। फोन न होने से वह उनसे संपर्क भी नहीं कर पाया। इसपर वह करीब 1900 किमी लंबे सफर पर पैदल ही निकल पड़ा। 15 दिन के सफर में वह पुलिस से बचते हुए शुक्रवार को उन्नाव के गंजमुरादाबाद कस्बा पहुंचा।
उसके चप्पल टूट जाने से पैर में छाले पड़ गए। कस्बे में लोगों ने उसकी यह दशा देखी तो खाना खिलाया और चप्पल दीं। इसके बाद वह हरदोई जाने की बात कहकर चला गया। हरदोई के कस्बा प्रतापनगर चौराहा निवासी सूरजभान पुत्र गंगा प्रसाद कस्बे के कई साथियों के साथ जनवरी माह में राजस्थान के जिला जोधपुर में झाड़ू बनाने की फैक्टरी में काम करने गया था।
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उसके चप्पल टूट जाने से पैर में छाले पड़ गए। कस्बे में लोगों ने उसकी यह दशा देखी तो खाना खिलाया और चप्पल दीं। इसके बाद वह हरदोई जाने की बात कहकर चला गया। हरदोई के कस्बा प्रतापनगर चौराहा निवासी सूरजभान पुत्र गंगा प्रसाद कस्बे के कई साथियों के साथ जनवरी माह में राजस्थान के जिला जोधपुर में झाड़ू बनाने की फैक्टरी में काम करने गया था।
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कोरोना वायरस को लेकर हुए लॉकडाउन के कारण फैक्टरी बंद हो गई। सभी मजदूर बेरोजगार हो गए। मालिक ने घर जाने के लिए एक हजार रुपये दिए थे लेकिन साधन न मिलने के कारण वह घर वापस नहीं लौट सका था। जब उसके व साथियों के पास रुपये खत्म हो गए तो वह सभी पैदल ही वहां से निकल पड़े।
रास्ते में दोस्त भी बिछड़ गए। इसपर वह अकेले ही 1900 किमी सफर पर निकल पड़ा। उसने हिम्मत नहीं हारी और लगातार पैदल चलता रहा। उसकी चप्पलें टूट गईं तो नंगे पैर ही आगे बढ़ता गया। इससे पैरों में छाले पड़ गए। रास्ते में कुछ स्थानों पर लोगों ने भोजन दिया।
4 मई को इटावा में एक संस्था ने लंच पैकेट दिया था। शुक्रवार को लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे के रास्ते कस्बा गंजमुरादबाद पहुुचा। लोगों ने उसकी आपबीती सुनी तो उसे भोजन कराया। इसके बाद वह अपने घर हरदोई जाने की बात कहकर आगे बढ़ गया।
रास्ते में दोस्त भी बिछड़ गए। इसपर वह अकेले ही 1900 किमी सफर पर निकल पड़ा। उसने हिम्मत नहीं हारी और लगातार पैदल चलता रहा। उसकी चप्पलें टूट गईं तो नंगे पैर ही आगे बढ़ता गया। इससे पैरों में छाले पड़ गए। रास्ते में कुछ स्थानों पर लोगों ने भोजन दिया।
4 मई को इटावा में एक संस्था ने लंच पैकेट दिया था। शुक्रवार को लखनऊ-आगरा एक्सप्रेस वे के रास्ते कस्बा गंजमुरादबाद पहुुचा। लोगों ने उसकी आपबीती सुनी तो उसे भोजन कराया। इसके बाद वह अपने घर हरदोई जाने की बात कहकर आगे बढ़ गया।