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Kanpur News: स्कंदमाता की उपासना से भरती है खाली गोद

Thu, 15 Oct 2026 02:03 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 15 Oct 2026 02:03 AM IST
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Worship of Skandamata fills an empty lap.
कानपुर। नवरात्र के पांचवें दिन मां दुर्गा के पांचवें स्वरूप स्कंदमाता की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यता है कि स्कंदमाता की उपासना से संतान की प्राप्ति होती है। सीएसजेएमयू के दीनदयाल शोध केंद्र के आचार्य संगम बाजपेई ने बताया कि मार्कंडेय पुराण के दुर्गा सप्तशती, स्कंद पुराण और शिवपुराण में देवी की कथा का उल्लेख है।
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आचार्य बाजपेई के अनुसार, शास्त्रों में नवरात्र के पांचवें दिन की उपासना का विशेष महत्व है। इस दिन साधक का मन बाहरी क्रियाओं और सांसारिक बंधनों से मुक्त होकर विशुद्ध चैतन्य स्वरूप की ओर अग्रसर होता है। वह पद्मासना स्कंदमाता के स्वरूप में तल्लीन रहता है।
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स्कंदमातृस्वरूपिणी देवी की चार भुजाएं हैं। दाहिनी ओर की ऊपरी भुजा में भगवान स्कंद विराजमान हैं, जबकि निचली भुजा में कमल पुष्प है। बाईं ओर की ऊपरी भुजा वर मुद्रा में है और निचली भुजा में भी कमल पुष्प सुशोभित है। देवी कमल के आसन पर विराजमान रहती हैं, इसलिए उन्हें पद्मासना देवी भी कहा जाता है।
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