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Kanpur News: महिला के पेट से ट्यूमर निकालकर बचाई जान
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कानपुर। हैलट अस्पताल में 51 वर्षीय महिला की जटिल सर्जरी कर लिवर से ट्यूमर निकालकर जान बचाई गई। प्राचार्य डॉ. संजय काला और उनकी टीम ने जटिल सर्जरी की।
हमीरपुर निवासी महिला पिछले 15 वर्षों से दाहिनी ओर पेट में दर्द से परेशान थी। रोगी डॉ. काला की देखरेख में भर्ती हुई। यहां डॉ. आरके जौहरी, डॉ. अभिषेक, डॉ. सचिन कुमार, डॉ. कविता, डॉ. कमल ने साढ़े तीन घंटे की जटिल सर्जरी की। रोगी के लिवर में ट्यूमर हेमांगीओमा 80x85 मिमी आकार का (एक छोटे सेब के बराबर) था। यह सर्जरी लिवर ट्रांसप्लांट की दिशा में अहम है। सर्जरी को सटीक और सुरक्षित बनाने के लिए मैक्स अस्पताल नई दिल्ली के लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. वासुदेवन ने भी मार्गदर्शन किया।
प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि मरीज की स्थिति अब पूरी तरह स्थिर डॉक्टरों की निगरानी में है। सर्जरी में एनेस्थीसिया की टीम से डॉ. वीणा, डॉ. शैलेंद्र, डॉ. मुदिता, डॉ. शिवम, डॉ. मुकेश, डॉ. अमित की टीम शामिल रही। डॉ. काला ने बताया कि जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज अब जटिल यकृत शल्य चिकित्सा एवं भविष्य के लिवर ट्रांसप्लांट कार्यक्रमों के लिए पूरी तरह तैयार है। यह सर्जरी दक्षता का प्रमाण है। आने वाले समय में और भी कई जटिल सर्जरी हो सकेंगी। यह उपलब्धि और कई जटिल सर्जरी की राह खोलने वाली साबित होगी, जिससे उत्तर भारत में जटिल हेपेटोबिलियरी सर्जरी की नई परिभाषा गढ़ी जाएगी।
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हमीरपुर निवासी महिला पिछले 15 वर्षों से दाहिनी ओर पेट में दर्द से परेशान थी। रोगी डॉ. काला की देखरेख में भर्ती हुई। यहां डॉ. आरके जौहरी, डॉ. अभिषेक, डॉ. सचिन कुमार, डॉ. कविता, डॉ. कमल ने साढ़े तीन घंटे की जटिल सर्जरी की। रोगी के लिवर में ट्यूमर हेमांगीओमा 80x85 मिमी आकार का (एक छोटे सेब के बराबर) था। यह सर्जरी लिवर ट्रांसप्लांट की दिशा में अहम है। सर्जरी को सटीक और सुरक्षित बनाने के लिए मैक्स अस्पताल नई दिल्ली के लिवर ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ. वासुदेवन ने भी मार्गदर्शन किया।
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प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि मरीज की स्थिति अब पूरी तरह स्थिर डॉक्टरों की निगरानी में है। सर्जरी में एनेस्थीसिया की टीम से डॉ. वीणा, डॉ. शैलेंद्र, डॉ. मुदिता, डॉ. शिवम, डॉ. मुकेश, डॉ. अमित की टीम शामिल रही। डॉ. काला ने बताया कि जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज अब जटिल यकृत शल्य चिकित्सा एवं भविष्य के लिवर ट्रांसप्लांट कार्यक्रमों के लिए पूरी तरह तैयार है। यह सर्जरी दक्षता का प्रमाण है। आने वाले समय में और भी कई जटिल सर्जरी हो सकेंगी। यह उपलब्धि और कई जटिल सर्जरी की राह खोलने वाली साबित होगी, जिससे उत्तर भारत में जटिल हेपेटोबिलियरी सर्जरी की नई परिभाषा गढ़ी जाएगी।
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