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UP: बिना सिंदूर कोर्ट पहुंची पत्नी... इस सवाल का नहीं दे सकी जवाब, मंजूर हो गया तलाक; अदालत ने की यह टिप्पणी

Tue, 10 Dec 2024 08:42 AM IST
शाहरुख खान आशीष अग्रवाल, अमर उजाला, कानपुर
आशीष अग्रवाल, अमर उजाला, कानपुर Published by: शाहरुख खान Updated Tue, 10 Dec 2024 08:42 AM IST
सार

कानपुर में तलाक के मामले में सुनवाई के दौरान एक महिला बिना सिंदूर लगाए कोर्ट पहुंची। कोर्ट ने तलाक मंजूर कर लिया। लाइलाज बीमारी से पीड़ित पति और बुजुर्ग सास को छोड़कर पत्नी मायके में रहने लगी थी। 

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Wife reached court without vermilion, court granted divorce in kanpur
बिना सिंदूर लगाए कोर्ट पहुंची पत्नी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पत्नी का मांग में सिंदूर न लगाना यह संकेत है कि भावात्मक रूप से पति-पत्नी के संबंध खत्म हो चुके हैं, क्योंकि भारतीय परिवेश में मांग में सिंदूर लगाना विवाह की स्वीकार्यता से जुड़ा है। विवाह पर विश्वास करने वाली हर भारतीय नारी से अपेक्षा की जाती है कि वह मांग में सिंदूर भरने को पत्नी का कर्तव्य माने। 
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इस टिप्प्णी के साथ पारिवारिक न्यायालय तृतीय के अपर प्रधान न्यायाधीश आलोक कुमार ने पति की तलाक की अर्जी को मंजूर कर लिया। स्टेट बैंक से वीआरएस ले चुके नेहरूनगर निवासी 56 वर्षीय पति ने नवाबगंज निवासी 46 वर्षीय पत्नी से तलाक की मांग की थी। 
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पारिवारिक न्यायालय में दाखिल किए गए वाद में कहा था कि दिसंबर 2008 में आर्य समाज पद्धति से उनका विवाह हुआ। शादी के बाद से पत्नी 78 वर्षीय विधवा मां को घर से निकालने का दबाव बनाने लगी। नवंबर 2011 में पति को बर्जर नामक लाइलाज बीमारी हो जाने पर तलाक और 25 लाख रुपये हर्जाने की मांग की। 
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अक्तूबर 2014 में झूठे मुकदमों में फंसाने की धमकी देकर ससुराल छोड़कर चली गई। वहीं, पत्नी ने जवाब में दहेज में पांच लाख रुपये और जेवर की मांग पूरी न होने पर ससुरालीजनों द्वारा उसे पीटकर घर से निकाल देने की बात कही। 

पति-पत्नी की तलाक की डिक्री मंजूर
मुकदमे में जिरह के दौरान पत्नी मांग में सिंदूर लगाकर कोर्ट नहीं पहुंची। पति के अधिवक्ता द्वारा सवाल पूछे जाने पर पत्नी कोई स्पष्ट जवाब नहीं दे सकी। साथ ही विवाह आर्य समाज पद्धति से बिना दान दहेज के होना पति साबित करने में सफल रहा। तलाक के मुकदमे के बाद पत्नी द्वारा दहेज उत्पीड़न व घरेलू हिंसा के मुकदमे दर्ज कराए गए थे। इसे क्रूरता मानते हुए कोर्ट ने पति-पत्नी की तलाक की डिक्री मंजूर कर ली।
 

पत्नी को स्थायी भरण-पोषण के लिए 14.50 लाख रुपये देगा पति
पत्नी ने कोर्ट में भरण-पोषण के लिए धनराशि और स्त्रीधन की वापसी के लिए भी अलग से प्रार्थना पत्र दिए थे। पत्नी का कहना था कि पति स्टेट बैंक में सीनियर असिस्टेंट के पद से वीआरएस लेकर सेवानिवृत्त हुआ और सेवानिवृत्ति पर उसे 60 लाख रुपये व 40 हजार रुपये प्रतिमाह पेंशन मिलती है। 

 

उसने सारा स्त्रीधन भी रख लिया है। वहीं, पति का कहना था कि उसे मिला सारा रुपया उसकी बीमारी में खर्च हो गया है और पेंशन से वह अपना व अपनी वृद्ध मां का भरण-पोषण कर रहा है। स्त्रीधन पत्नी अपने साथ ले गई है। हालांकि दोनों ही पक्ष आय और व्यय का सही विवरण पेश नहीं कर सके। 
 

सबूतों के आधार पर कोर्ट ने पति को 14 लाख 50 हजार रुपये एकमुश्त भरण-पोषण राशि पत्नी को देने के निर्देश दिए। वहीं, स्त्रीधन पति के कब्जे में है या नहीं, यह साबित न कर पाने पर पत्नी की स्त्रीधन वापसी की अर्जी कोर्ट ने खारिज कर दी।
 
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