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यूपी: बिकरू कांड में शहीद सिपाही की पत्नी ने लगाया भेदभाव का आरोप, सीएम को पत्र और मेल भेज पूछा ये सवाल

Sat, 23 Oct 2021 03:16 AM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Sat, 23 Oct 2021 03:16 AM IST
सार

दो जुलाई 2020 की रात बिकरू में बदमाशों के हमले में सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। सीएम योगी आदित्यनाथ ने शहीदों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सरकारी नौकरी, पेंशन और आर्थिक मदद का वादा किया था।

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Wife of martyr soldier alleges discrimination in Bikru case
कानपुर एनकाउंटर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

गोरखपुर में हुए मनीष हत्याकांड के बाद उनकी पत्नी मीनाक्षी को केडीए में ओएसडी के पद पर नौकरी दिए जाने के बाद बिकरू कांड में शहीद हुए सिपाही राहुल की पत्नी दिव्या ने भेदभाव का आरोप लगा सीएम को पत्र और मेल भेजा है।
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उन्होंने जल्द जवाब न मिलने पर कोर्ट की शरण लेकर ओएसडी पद पर नौकरी मांगने की बात कही। गुरुवार को पुलिस लाइन में स्मृति दिवस के मौके पर आयोजित कार्यक्रम को भी पुलिस विभाग की ओर से की जाने वाली रस्म अदायगी बताई।
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दो जुलाई 2020 की रात बिकरू में बदमाशों के हमले में सीओ देवेंद्र मिश्रा समेत 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। सीएम योगी आदित्यनाथ ने शहीदों के परिजनों से मुलाकात कर उन्हें सरकारी नौकरी, पेंशन और आर्थिक मदद का वादा किया था। सीओ देवेंद्र मिश्रा की बेटी को करीब दो माह पूर्व विभाग में ही ओएसडी पद पर नौकरी दे दी गई थी।
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सिपाही बबलू कुमार के भाई का भी सिपाही पद के लिए चयन हो गया था। एसआई नेबू लाल, महेश कुमार व सिपाही जितेंद्र पाल के परिजनों ने शासन से समय मांग लिया था। वहीं, शहीद एसआई अनूप सिंह, सिपाही सुल्तान की पत्नियां दौड़ नहीं निकाल सकी थीं।

इसके बाद से उन्हें शासन और विभाग की ओर से कोई आश्वासन नहीं मिला। दिल्ली निवासी सिपाही राहुल की पत्नी दिव्या ने बताया कि उन्होंने दौड़ निकालने के बाद लिखित परीक्षा दी थी, जिसके परिणाम का इंतजार कर रही हैं।

उनका कहना है कि एक साल में वह तीन बार सीएम को पत्राचार और मेल भेज चुकी हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। अब तो उन्हें सीएम से मिलने तक नहीं दिया जाता है। पुलिस विभाग की बेरुखी पर नाराजगी व्यक्त की।

जब जान की कीमत समान तो हक बराबर मिलना चाहिए
दिव्या का कहना है कि सीओ की बेटी को ओएसडी पद पर नौकरी दी गई थी। जब उन्होंने भी ओएसडी पद पर नौकरी मांगी तो पति के सिपाही पद का हवाला दिया गया। ऐसे में मनीष की पत्नी को ओएसडी पद पर नौकरी दिए जाने को लेकर उन्होंने कहा कि जब सभी की जान की कीमत समान है, तो सभी को बराबर हक मिलना चाहिए।
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