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आईआईटीयंस पर चलेगा रैगिंग का कोड़ा
अमर उजाला ब्यूरो /कानपुर
Updated Sat, 13 Aug 2016 02:00 AM IST
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प्रदर्शन के दौरान छात्रों में विरोधाभास भी दिखा था (फाइलफोटो)
- फोटो : amarujala
रिसर्च स्कॉलर (पीएचडी) आलोक कुमार पांडेय की मौत के बाद आंदोलन और क्लास छोड़ने के लिए जूनियरों से मारपीट करने वाले सीनियर आईआईटीयंस फंसेंगे। जूनियरों की मौखिक शिकायत के बाद आईआईटी प्रशासन ने इस मामले को रैगिंग माना है। अब कार्रवाई की तैयारी है।
रिसर्च स्कॉलर की मौत के बाद आईआईटीयंस ने तीन दिनों तक हंगामा किया। कक्षाएं और लैब बंद करा दीं। क्लास कर रहे कुछ जूनियर स्टूडेंटों से मारपीट की। जबरन कक्षाएं बंद करा दीं। इसकी मौखिक शिकायत हुई है।
अब आईआईटी प्रशासन ने जूनियर स्टूडेंटों से लिखित शिकायत मांगी गई है। मामला लिखित में आया तो आरोपी सीनियर स्टूडेंटों का प्रोग्राम से टर्मिनेशन संभव है। इंस्टीट्यूट एडवाइजरी कमेटी (आईएसी) ने आरोपी स्टूडेंटों को चेतावनी देने पर सहमति जताई है। सूत्रों ने बताया कि आईआईटी में पहली बार निदेशक, उप निदेशक, अधिष्ठाता छात्र कल्याण सहित तमाम शिक्षक, कर्मचारी और स्टूडेंटों से अभद्रता की गई है। इस पर आईएसी ने चिंता जताई। साथ ही कहा कि इस तरह की घटना दोबारा न हो, इसकी व्यवस्था सुनिश्चित करनी पड़ेगी।
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बयान की रिकार्डिंग
रिसर्च स्कॉलर की मौत के बाद गठित कमेटी ने शुक्रवार को भी जांच-पड़ताल की। मामले से संबंधित स्टूडेंटों के बयान दर्ज किए गए। इसकी रिकार्डिंग भी हुई है। डॉ. एसएस सिंघल की अगुवाई वाली कमेटी में दो स्टूडेंट प्रतिनिधि भी शामिल हैं। यह कमेटी जांच रिपोर्ट इसी सप्ताह देगी।
जेएनयू के स्टूडेेंटों ने दी हवा
आंदोलन और बवाल के पीछे बाहरी स्टूडेंटों का हाथ बताया जा रहा है। आईआईटी प्रशासन का कहना है कि जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) नई दिल्ली के स्टूडेंट भी कैंपस में देखे गए थे, जो आंदोलन को हवा दे रहे थे। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और एनएसयूआई के लोग भी कैंपस में आए थे। इस मामले को सुरक्षा में चूक से जोड़कर देखा जा रहा है। इसकी गाज सुरक्षा एजेंसी (एसआईएस) पर भी गिर सकती है।
पीजी स्टूडेंटों ने बिगाड़ा मामला
आईआईटी में पीजी स्टूडेेंटों के बढ़ने से अनुशासनहीनता का संकट बढ़ा है। प्रशासन का कहना है कि जेईई एडवांस से आने वाले स्टूडेंट पढ़ाई, रिसर्च पर फोकस करते हैं। पीएचडी, एमटेक, एमएससी, एमबीए, एमडैस और वीएलएफएम के स्टूडेंट राजनीति से संबंधित होते हैं। यूनिवर्सिटी से पढ़कर आते हैं। इस वजह से आंदोलन करते हैं।
रोहिता वेमुला जैसा केस बनाने की साजिश
आईआईटी में स्टूडेंट की मौत को हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के रोहित वेमुला की तरह फैलाने की साजिश रची गई थी। इसका खुलासा एक प्रोफेसर ने किया। रोहित वेमुला की मौत के बाद पूरे देश में बवाल हुआ था। प्रोफेसर का कहना है कि यदि किसी दलित स्टूडेंट की मौत हुई होती तो कइयों को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ती। उनका इशारा निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना और निदेशक प्रो. एके चतुर्वेदी की तरफ था। मृत स्टूडेंट का नाम आलोक कुमार पांडेय था, इसलिए आंदोलन को ज्यादा हवा नहीं मिल सकी।
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रिसर्च स्कॉलर की मौत के बाद आईआईटीयंस ने तीन दिनों तक हंगामा किया। कक्षाएं और लैब बंद करा दीं। क्लास कर रहे कुछ जूनियर स्टूडेंटों से मारपीट की। जबरन कक्षाएं बंद करा दीं। इसकी मौखिक शिकायत हुई है।
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अब आईआईटी प्रशासन ने जूनियर स्टूडेंटों से लिखित शिकायत मांगी गई है। मामला लिखित में आया तो आरोपी सीनियर स्टूडेंटों का प्रोग्राम से टर्मिनेशन संभव है। इंस्टीट्यूट एडवाइजरी कमेटी (आईएसी) ने आरोपी स्टूडेंटों को चेतावनी देने पर सहमति जताई है। सूत्रों ने बताया कि आईआईटी में पहली बार निदेशक, उप निदेशक, अधिष्ठाता छात्र कल्याण सहित तमाम शिक्षक, कर्मचारी और स्टूडेंटों से अभद्रता की गई है। इस पर आईएसी ने चिंता जताई। साथ ही कहा कि इस तरह की घटना दोबारा न हो, इसकी व्यवस्था सुनिश्चित करनी पड़ेगी।
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बयान की रिकार्डिंग
रिसर्च स्कॉलर की मौत के बाद गठित कमेटी ने शुक्रवार को भी जांच-पड़ताल की। मामले से संबंधित स्टूडेंटों के बयान दर्ज किए गए। इसकी रिकार्डिंग भी हुई है। डॉ. एसएस सिंघल की अगुवाई वाली कमेटी में दो स्टूडेंट प्रतिनिधि भी शामिल हैं। यह कमेटी जांच रिपोर्ट इसी सप्ताह देगी।
जेएनयू के स्टूडेेंटों ने दी हवा
आंदोलन और बवाल के पीछे बाहरी स्टूडेंटों का हाथ बताया जा रहा है। आईआईटी प्रशासन का कहना है कि जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी (जेएनयू) नई दिल्ली के स्टूडेंट भी कैंपस में देखे गए थे, जो आंदोलन को हवा दे रहे थे। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) और एनएसयूआई के लोग भी कैंपस में आए थे। इस मामले को सुरक्षा में चूक से जोड़कर देखा जा रहा है। इसकी गाज सुरक्षा एजेंसी (एसआईएस) पर भी गिर सकती है।
पीजी स्टूडेंटों ने बिगाड़ा मामला
आईआईटी में पीजी स्टूडेेंटों के बढ़ने से अनुशासनहीनता का संकट बढ़ा है। प्रशासन का कहना है कि जेईई एडवांस से आने वाले स्टूडेंट पढ़ाई, रिसर्च पर फोकस करते हैं। पीएचडी, एमटेक, एमएससी, एमबीए, एमडैस और वीएलएफएम के स्टूडेंट राजनीति से संबंधित होते हैं। यूनिवर्सिटी से पढ़कर आते हैं। इस वजह से आंदोलन करते हैं।
रोहिता वेमुला जैसा केस बनाने की साजिश
आईआईटी में स्टूडेंट की मौत को हैदराबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी के रोहित वेमुला की तरह फैलाने की साजिश रची गई थी। इसका खुलासा एक प्रोफेसर ने किया। रोहित वेमुला की मौत के बाद पूरे देश में बवाल हुआ था। प्रोफेसर का कहना है कि यदि किसी दलित स्टूडेंट की मौत हुई होती तो कइयों को अपनी कुर्सी गंवानी पड़ती। उनका इशारा निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना और निदेशक प्रो. एके चतुर्वेदी की तरफ था। मृत स्टूडेंट का नाम आलोक कुमार पांडेय था, इसलिए आंदोलन को ज्यादा हवा नहीं मिल सकी।