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किराए के तराजू में तौल रहे आचार संहिता

Tue, 07 Feb 2017 11:56 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर Updated Tue, 07 Feb 2017 11:56 PM IST
सार

- जीआईसी ग्राउंड में चुनावी सभा का मामला 
- किराया वसूलने का आधार ढूंढता रहा अमला
- राहुल-अखिलेश की सभा की अनुमति दी थी   

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weighing code of conduct in rent scales
डेमो

विस्तार

आचार संहिता का उल्लंघन कर प्रशासन अब उस पर मिट्टी डालने का हर संभव प्रयास कर रहा है। चुनाव आयोग की पाबंदी के बावजूद सरकारी संपत्ति (लालइमली चौराहे स्थित जीआईसी) में राहुल गांधी-अखिलेश यादव की जनसभा को अनुमति आला अधिकारियों ने दी थी। अमर उजाला द्वारा मुद्दा उठाने के बाद प्रशासनिक अमला किसी भी तरह जीआईसी मैदान देने की एवज में किराया वसूल कर उसे नियमानुसार सही ठहराने में जुटा है।
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तय हुआ है कि जनसभा के लिए जीआईसी ग्राउंड के उपयोग का आधा किराया कांग्रेस और आधा सपा से वसूला जाएगा। किराया किस आधार पर तय हो इसके लिए मंगलवार को जिला प्रशासन व जीआईसी का तंत्र गुणा-भाग में जुटा रहा। सूत्रों के अनुसार सीपीडब्लूडी (केंद्रीय लोक निर्माण विभाग), पीडब्लूडी (लोक निर्माण विभाग), रजिस्ट्री दफ्तर व अन्य संबंधित विभागों से किराए के मानक मांगे गए। लेकिन जीआईसी मैदान को लेकर कोई तय मानक नहीं मिल सका। एडीएम फाइनेंस संजय चौहान ने इस बात की पुष्टि की कि जीआईसी ग्राउंड का किराया तय करने के लिए क्षेत्र के सर्किल रेट का ब्योरा मांगा गया है। सूत्रों के अनुसार चुनाव आयोग या किसी तरह की कानूनी अड़चन से बचने के लिए प्रशासनिक अमला किराया वसूल लेना चाहता है। 
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किराए का गुणा-भाग
जीआईसी के वरिष्ठ प्रवक्ता अशफाक अहमद खान ने स्वीकारा कि किराया तय करने के लिए प्रशासन के साथ ही जीआईसी प्रबंधन भी प्रयासरत है। इस संबंध में मंगलवार को सीपीडब्लूडी और पीडब्लूडी विभाग से मिली जानकारी के अनुसार सरकारी रेस्टहाउस (निर्मित भवन) आदि का न्यूनतम किराया 20 रुपये वर्गफीट यानी 200 रुपये वर्गमीटर के हिसाब से वसूला जाता है। लेकिन मैदान का किराया वसूलने का कोई पैमाना नहीं मिल सका है।
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तो 6,60,000 वसूला जाएगा किराया  
सूत्रों के अनुसार प्रशासनिक अधिकारियों की राय है कि सरकारी भवन के किराए के प्रति वर्गमीटर मानक के एक चौथाई किराए के हिसाब से वसूली की जाए। सरकारी भवन का किराया 200 रुपये प्रति वर्गमीटर है। इसका एक चौथाई 50 रुपये हुआ। जिस जीआईसी मैदान में सभा हुई थी उसका क्षेत्रफल 13,200 वर्गमीटर है। इस हिसाब से किराया 6,60,000 रुपये होता है। जीआईसी की ओर से किराए का ब्योरा हर हाल में डीएम के पास बुधवार को पहुंचाने की तैयारी जोराें पर है। 

आयोग हटा क्यों नहीं देता ऐसे अधिकारी: संदीप पांडे
समाजसेवी और मैगसेसे पुरस्कार विजेता संदीप पांडे ने कानपुर जिला निर्वाचन से जुड़े अधिकारियों के गैरजिम्मेदार रवैये और चुनाव आयोग की अनदेखी पर आश्चर्य जताया है। पांडे ने अमर उजाला से कहा कि अब तक आयोग को संज्ञान लेकर ऐसे अधिकारियों को इस काम से ही हटा देना चाहिए था। जिला निवार्चन अधिकारी आयोग के ही प्रतिनिधि हैं और वे ही आचार संहिता तोड़ रहे हैं। क्या इसे उनकी अयोग्यता या सत्तारूढ और चहेते प्रत्याशियों के पक्ष में नियमों को दरकिनार करना नहीं माना जाए।


सेवा शर्तों का उल्लंघन है यह
एडवोकेट शिवाकांत दीक्षित ने कहा यह बड़े पदों पर बैठे सरकारी अधिकारियों द्वारा सेवा शर्तों के उल्लंघन और कार्यपालिका द्वारा व्यवस्था को चौपट करने का मामला है। आयोग को तत्काल ऐसे अधिकारियों पर सख्त विभागीय कार्रवाई करनी चाहिए।
 
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