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...जब सीएम वीपी सिंह ने किया था बुलेट पर प्रचार
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 17 Jan 2017 07:58 AM IST
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वीपी सिंह उन्हें छोटे भाई की तरह मानते थे
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मई 1980 की भीषण गर्मी में कांग्रेस के तत्कालीन मुख्यमंत्री वीपी सिंह ने बांदा की तिंदवारी विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में राजेंद्र सिंह की बुलेट पर पीछे बैठकर प्रचार किया था। मुख्यमंत्री होते हुए भी चुनाव प्रचार के दौरान सरकारी अमला साथ नहीं लिया। कम से कम खर्च हो, इसके लिए चार पहियों की जगह दो पहियों से प्रचार किया। यह बात ग्रेटर नोएडा के अल्फा-1 सेक्टर निवासी और वीपी सिंह के मुख्य चुनाव संयोजक रहे राजेंद्र सिंह ने बताई।
मूलरूप से इलाहाबाद के मांडा निवासी राजेंद्र सिंह (75) पूर्व प्रधानमंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री वीपी सिंह के ही गांव के हैं। वीपी सिंह उन्हें छोटे भाई की तरह मानते थे। बताया कि जनवरी 1980 में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद उन्हें किसी विधानसभा से चुनाव लड़कर विधानसभा में पहुंचना जरूरी था। बांदा की तिंदवारी सीट पर मई में विधानसभा उपचुनाव की घोषणा के बाद वे केवल चार बार तिंदवारी क्षेत्र में प्रचार करने पहुंचे।
कार्यकर्ता भराते थे पेट्रोल
बताया कि चुनाव प्रचार में वीपी सिंह जहां भी गए, अपार जनसमर्थन मिला। उन्हें उपचुनाव में 92 फीसदी वोट मिले थे। प्रचार पर निकलते समय कार्यकर्ता उनका इतना सम्मान करते थे कि स्वयं पेट्रोल डलवाकर चुनाव प्रचार पर निकलते थे।
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तिंदवारी के लोग उनसे पहुंचाते थे अपनी मांग
चुनाव जीतने के बाद तिंदवारी की जनता राजेंद्र सिंह को इतना पहचान गई कि तत्कालीन मुख्यमंत्री वीपी सिंह तक तक अपनी बात पहुंचाने के लिए उनको अपनी बात बताते थे। 1989 में फतेहपुर लोकसभा सीट पर जब वीपी सिंह चुनाव लड़े तो इस बार भी उनके चुनाव की बागडोर संभाले रहे।
बड़े बेटे को स्वयं अपना जनाधार बनाने को कहा
राजेंद्र सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री बनने के बाद वीपी सिंह के बड़े बेटे ने जब उनसे राजनीति में आने की बात कही तो उन्होंने मदद से इनकार कर दिया। कहा खुद की मेहनत से राजनीति में स्थान बनाओ।
राजनीति में नहीं आए राजेंद्र
वीपी सिंह के इतने निकट होते हुए भी राजेंद्र सिंह ने कभी उनके नाम का फायदा नहीं उठाया और अंत तक राजनीति में नहीं आए। बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री के आगे-पीछे चक्कर लगाने वाले बड़े नेता तो क्या छोटे नेता भी उनके राजनीति में अलग-थलग पड़ने के बाद उनके आसपास नहीं आते थे। इस दौरान वे और कुछ सहयोगी हमेशा पूर्व प्रधानमंत्री के साथ रहे थे।
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मूलरूप से इलाहाबाद के मांडा निवासी राजेंद्र सिंह (75) पूर्व प्रधानमंत्री व पूर्व मुख्यमंत्री वीपी सिंह के ही गांव के हैं। वीपी सिंह उन्हें छोटे भाई की तरह मानते थे। बताया कि जनवरी 1980 में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालने के बाद उन्हें किसी विधानसभा से चुनाव लड़कर विधानसभा में पहुंचना जरूरी था। बांदा की तिंदवारी सीट पर मई में विधानसभा उपचुनाव की घोषणा के बाद वे केवल चार बार तिंदवारी क्षेत्र में प्रचार करने पहुंचे।
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कार्यकर्ता भराते थे पेट्रोल
बताया कि चुनाव प्रचार में वीपी सिंह जहां भी गए, अपार जनसमर्थन मिला। उन्हें उपचुनाव में 92 फीसदी वोट मिले थे। प्रचार पर निकलते समय कार्यकर्ता उनका इतना सम्मान करते थे कि स्वयं पेट्रोल डलवाकर चुनाव प्रचार पर निकलते थे।
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तिंदवारी के लोग उनसे पहुंचाते थे अपनी मांग
चुनाव जीतने के बाद तिंदवारी की जनता राजेंद्र सिंह को इतना पहचान गई कि तत्कालीन मुख्यमंत्री वीपी सिंह तक तक अपनी बात पहुंचाने के लिए उनको अपनी बात बताते थे। 1989 में फतेहपुर लोकसभा सीट पर जब वीपी सिंह चुनाव लड़े तो इस बार भी उनके चुनाव की बागडोर संभाले रहे।
बड़े बेटे को स्वयं अपना जनाधार बनाने को कहा
राजेंद्र सिंह ने बताया कि प्रधानमंत्री बनने के बाद वीपी सिंह के बड़े बेटे ने जब उनसे राजनीति में आने की बात कही तो उन्होंने मदद से इनकार कर दिया। कहा खुद की मेहनत से राजनीति में स्थान बनाओ।
राजनीति में नहीं आए राजेंद्र
वीपी सिंह के इतने निकट होते हुए भी राजेंद्र सिंह ने कभी उनके नाम का फायदा नहीं उठाया और अंत तक राजनीति में नहीं आए। बताया कि पूर्व प्रधानमंत्री के आगे-पीछे चक्कर लगाने वाले बड़े नेता तो क्या छोटे नेता भी उनके राजनीति में अलग-थलग पड़ने के बाद उनके आसपास नहीं आते थे। इस दौरान वे और कुछ सहयोगी हमेशा पूर्व प्रधानमंत्री के साथ रहे थे।