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बिजली समस्या पर ग्रामीणों का प्रदर्शन
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डीएम से बिजली की समस्या को लेकर शिकायत करने जाते ग्रामीण
- फोटो : ORAI
उरई। औता फीडर से जुड़े औता, ककहरा, जगतपुरा बुजुर्ग, बिनौरा वैध, हजरतपुरा, सिहारी दाऊदपुर, अटरिया, जलालपुर, लहूरा, अमगुवा, जगदेवपुर, बनफरा, पडूली, गुढ़ा समेत एक दर्जन से अधिक गांवों के लोगों ने बिजली कटौती को लेकर कलक्ट्रेट में नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। इन लोगों का कहना है कि फीडर लोड नहीं ले पा रहा है, जिसकी वजह से गांव में बिजली नहीं आ पा रही है।
ककहरा के पूर्व प्रधान कृष्णपाल सिंह के नेतृत्व में संजीव सिंह जगतपुर बुजुर्ग, सुतीक्षण औता, प्रशांत औता, नरेंद्र सिंह जलालपुर, सिद्धेश्वर सिहारी, आशीष जगदेवपुर, धर्मवीर अगगुआ समेत एक दर्जन गांवों के किसानों ने डीएम को ज्ञापन देकर बताया कि इन सभी गांवों का बिजली लोड करीब तीन सौ एमवी का है। जबकि औता फीडर में जो ट्रांसफार्मर रखा है, वह केवल 150 एमवी का लोड ले पा रहा है।
इसके चलते गांवों की बिजली आपूर्ति सुचारु रुप से नहीं हो पा रही है। शासन का निर्देश है कि गांव को 16 घंटे बिजली दी जाए पर इन गांवों के लोगों को टुकड़ों में बिजली मिलती है। जिसकी वजह से किसानों की धान की फसल सूखने की कगार पर है। कई बार लोड बढ़ाने की मांग को लेकर जेई और एसडीओ को प्रार्थनापत्र दे चुके है पर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। यदि जल्द औता फीडर का लोड बढ़ाने के लिए दूसरा ट्रांसफार्मर नहीं रखा जाता है तो किसान भुखमरी की कगार पर आ जाएगा।
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ककहरा के पूर्व प्रधान कृष्णपाल सिंह के नेतृत्व में संजीव सिंह जगतपुर बुजुर्ग, सुतीक्षण औता, प्रशांत औता, नरेंद्र सिंह जलालपुर, सिद्धेश्वर सिहारी, आशीष जगदेवपुर, धर्मवीर अगगुआ समेत एक दर्जन गांवों के किसानों ने डीएम को ज्ञापन देकर बताया कि इन सभी गांवों का बिजली लोड करीब तीन सौ एमवी का है। जबकि औता फीडर में जो ट्रांसफार्मर रखा है, वह केवल 150 एमवी का लोड ले पा रहा है।
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इसके चलते गांवों की बिजली आपूर्ति सुचारु रुप से नहीं हो पा रही है। शासन का निर्देश है कि गांव को 16 घंटे बिजली दी जाए पर इन गांवों के लोगों को टुकड़ों में बिजली मिलती है। जिसकी वजह से किसानों की धान की फसल सूखने की कगार पर है। कई बार लोड बढ़ाने की मांग को लेकर जेई और एसडीओ को प्रार्थनापत्र दे चुके है पर अब तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। यदि जल्द औता फीडर का लोड बढ़ाने के लिए दूसरा ट्रांसफार्मर नहीं रखा जाता है तो किसान भुखमरी की कगार पर आ जाएगा।
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