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Vikas Dubey: दुबई और थाईलैंड में भी हैं विकास दुबे की कई संपत्तियां, ईडी करेगी जांच
Sat, 11 Jul 2020 01:00 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sat, 11 Jul 2020 01:00 PM IST
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विकास दुबे: संपत्तियों की जांच करेगी ईडी
- फोटो : अमर उजाला
जबरन कब्जा की गई जमीनों से करोड़ों की संपत्ति बनाने वाला विकास दुबे का नाम शासन-प्रशासन की भूमाफिया की टॉप-10 सूची में नहीं है। यही नहीं विकास की कई प्रॉपर्टी दुबई और थाईलैंड में भी है। प्रदेश की योगी सरकार ने सत्ता संभालते ही बदमाशों और भूमाफियाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की घोषणा की थी। कई बड़े भू माफियाओं को सरकार ने बेनकाब भी किया लेकिन विकास दुबे पर कोई आंच नहीं आई। आए भी कैसे, क्योंकि विकास दुबे के खिलाफ तहसील और थाना स्तर पर कब्जे की कोई शिकायत ही नहीं है। या यूं कहें किसी ने शिकायत कराने की हिम्मत ही नहीं जुटाई।
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यूपी एसटीएफ की अभी तक की जांच की मानें तो, विकास दुबे ने दुबई और थाईलैंड में प्रॉपर्टी खरीद रखी है। जिसकी कीमत करोड़ों रुपए है। विकास दुबे ने पिछले तीन सालों में 14 देशों का यात्राएं की है। हाल ही में उसने लखनऊ में एक घर खरीदा है जिसकी कीमत 20 करोड़ रुपए से ऊपर है। प्रवर्तन निदेशालय ने कानुपर पुलिस से गैंगस्टर विकास दुबे, उनके परिवार और करीबी सहयोगियों की चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा मांगा है।
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vikas dubey news
- फोटो : amar ujala
इसके अलावा कानपुर के अंदर ब्रह्मनगर में छह मकान, आर्यनगर के एक अपार्टमेंट में आठ फ्लैट और पनकी में एक ड्यूप्लैक्स कोठी की जानकारी मिल चुकी है। इनकी अनुमानित कीमत 28 करोड़ रुपए बताई जा रही है। विकास और उसके सहयोगी के बीच बैंक के जरिए लेनदेन के ठोस सबूत मिल चुके हैं।
सरकारी व्यवस्था के तहत किसी को भूमाफिया घोषित करने के लिए उसके खिलाफ दो स्तर से जांच की जाती है। पहली व्यवस्था के तहत यदि किसी ने सरकारी जमीन पर कब्जा किया है तो तहसील के माध्यम से जांच कर कब्जा करने वाले के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराकर जानकारी ऊपर भेजी जाती है।
सरकारी व्यवस्था के तहत किसी को भूमाफिया घोषित करने के लिए उसके खिलाफ दो स्तर से जांच की जाती है। पहली व्यवस्था के तहत यदि किसी ने सरकारी जमीन पर कब्जा किया है तो तहसील के माध्यम से जांच कर कब्जा करने वाले के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराकर जानकारी ऊपर भेजी जाती है।
विकास दुबे का खजांची जय बाजपेयी
- फोटो : amar ujala
दूसरी व्यवस्था के तहत यदि किसी ने प्राइवेट जमीन पर कब्जा किया है और जिसकी जमीन है, उसने थाने में मुकदमा दर्ज करा रखा है तो पुलिस की तरफ से कब्जे की रिपोर्ट ऊपर भेजी जाती है। इन दोनों माध्यमों से जो रिपोर्ट आती है, उसी आधार पर किसी को भूमाफिया घोषित करने की व्यवस्था है। विकास दुबे के खिलाफ तहसील और थाना स्तर पर किसी तरह की जमीन कब्जाने की रिपोर्ट दर्ज ही नहीं की गई है।
किसी ने प्रयास भी किया तो विकास दुबे अपने दबदबे से सब कुछ मैनेज कर लेता था। यही वजह है कि आज तक उसे भूमाफिया की श्रेणी में सूचीबद्ध नहीं किया जा सका है। बिकरू में हुई घटना के बाद अब शासन-प्रशासन प्रदेश स्तर पर उसकी जमीनों की जांच कर रही है। इसी आधार पर उसकी संपत्तियां नष्ट की जा सकती हैं। बिकरू में उसके आवास को ध्वस्त कर दिया गया है, कहा जा रहा यह आवास कब्जे की जमीन पर बना था।
किसी ने प्रयास भी किया तो विकास दुबे अपने दबदबे से सब कुछ मैनेज कर लेता था। यही वजह है कि आज तक उसे भूमाफिया की श्रेणी में सूचीबद्ध नहीं किया जा सका है। बिकरू में हुई घटना के बाद अब शासन-प्रशासन प्रदेश स्तर पर उसकी जमीनों की जांच कर रही है। इसी आधार पर उसकी संपत्तियां नष्ट की जा सकती हैं। बिकरू में उसके आवास को ध्वस्त कर दिया गया है, कहा जा रहा यह आवास कब्जे की जमीन पर बना था।