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बिना दिल खोले बदल जाएगा वाल्व, विशेषज्ञों ने बताई नई तकनीक, गुर्दे का वैकल्पिक इलाज भी बताया
Mon, 10 Feb 2020 02:48 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Mon, 10 Feb 2020 02:48 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : अमर उजाला
इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के बैनर तले आयोजित सतत चिकित्सा शिक्षा (सीएमई) कार्यक्रम में बताया गया कि बिना ओपन हार्ट सर्जरी किए वाल्व बदलने की तकनीक आ गई है। एंजियोप्लास्टी की तरह जांघ के ऊपर के स्थान पर छेद करके तार डालकर इसे किया जाता है।
गैर सर्जिकल होने के कारण यह अधिक सुरक्षित है। कार्डियो थोरोसिस एंड वैस्कुलर सर्जकी ओपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल लखनऊ के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. विजयंत देवनराज ने बताया कि उनकी टीम ने अभी हाल में पहली बार तीन रोगियों का इस विधि से वाल्व बदला है।
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गैर सर्जिकल होने के कारण यह अधिक सुरक्षित है। कार्डियो थोरोसिस एंड वैस्कुलर सर्जकी ओपोलोमेडिक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल लखनऊ के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. विजयंत देवनराज ने बताया कि उनकी टीम ने अभी हाल में पहली बार तीन रोगियों का इस विधि से वाल्व बदला है।
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सीएमई का आयोजन आर्यनगर स्थित एक होटल में किया गया। डॉ. देवनराज ने बताया कि इस तकनीक से उन रोगियों को भी इलाज मिल जाता है जिनकी सर्जरी से डाक्टर मना कर देते हैं। एंजियोप्लास्टी में दवा की पर्त वाले स्टेनलेस स्टील के स्प्रिंग जैसे उपकरण डाले जाते हैं ये धमनियों की रुकावट हटाते हैं।
लेकिन रोगी के शरीर में इस धातु के रहने से कुछ नुकसान भी होता है। रोगी को रक्त पतला करने वाली दवा लेनी पड़ती है। इसके अलावा अब प्लास्टिक जैसे पदार्थ के स्टेंट आ गए हैं जो धमनियां खोलने के बाद धीरे-धीरे घुल जाते हैं। सीएमई में डॉ. राजेंद्र वी. फड़के ने छोटे चीरे से शरीर के उपचार के संबंध में बताया।
उन्होंने कहा कि छोटी सुइयों और तारों का उपयोग करके छोटे छेद के जरिये शरीर की अंदरुनी संरचनाओं तक पहुंचा जा सकता है। वहीं डॉ. अरुण कुमार ने रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी के संबंध में बताया। इस मौके पर आईएमए अध्यक्ष डॉ. रीता मित्तल, सचिव डॉ. गौरव दूबे, डॉ. गौरव चावला आदि रहे।
लेकिन रोगी के शरीर में इस धातु के रहने से कुछ नुकसान भी होता है। रोगी को रक्त पतला करने वाली दवा लेनी पड़ती है। इसके अलावा अब प्लास्टिक जैसे पदार्थ के स्टेंट आ गए हैं जो धमनियां खोलने के बाद धीरे-धीरे घुल जाते हैं। सीएमई में डॉ. राजेंद्र वी. फड़के ने छोटे चीरे से शरीर के उपचार के संबंध में बताया।
उन्होंने कहा कि छोटी सुइयों और तारों का उपयोग करके छोटे छेद के जरिये शरीर की अंदरुनी संरचनाओं तक पहुंचा जा सकता है। वहीं डॉ. अरुण कुमार ने रीनल रिप्लेसमेंट थेरेपी के संबंध में बताया। इस मौके पर आईएमए अध्यक्ष डॉ. रीता मित्तल, सचिव डॉ. गौरव दूबे, डॉ. गौरव चावला आदि रहे।