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यूपी: विक्रम कोठारी का नाम देश के 10 बड़े बकाएदारों में शामिल, 200 कारोबारियों पर 15 हजार करोड़ का कर्ज
Sun, 19 Jul 2020 01:29 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 19 Jul 2020 01:29 PM IST
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विक्रम कोठारी
- फोटो : अमर उजाला
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कानपुर के 200 से ज्यादा कारोबारियों ने 17 बैकों को करीब 15 हजार करोड़ की चोट पहुंचाई है। ये सभी कारोबारी पांच करोड़ रुपये से अधिक के बकाएदार हैं, और जानबूझकर कर्ज अदा नहीं कर रहे। इनमें से रोटोमैक कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी का नाम देश के 10 बड़े बकाएदारों में शामिल है।
ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन ने शनिवार को देश की 2426 ऐसी कंपनियों के नाम उजागर किए जिन्होंने जानबूझकर बैंकों का कर्ज अदा नहीं किया है। इन कंपनियों ने 17 बैंकों का एक लाख 47 हजार तीन सौ पचास करोड़ रुपये डुबा दिया है। संगठन लंबे समय से सरकार से ऐसे बकाएदारों के नाम सार्वजानिक करने की मांग कर रहा था।
लेकिन सरकार की ओर से ऐसा न होने पर संगठन ने खुद बड़े बकाएदारों के नाम जारी कर दिए हैं। कानपुर की बात करें तो विक्रम कोठारी पर करीब 4000 करोड़ तथा इनके मित्र हीरा कारोबारी उदय देसाई पर 3500 करोड़ का कर्ज है। इन्हीं दो कारोबारियों ने बैंकों को करीब 7500 करोड़ रुपये का चूना लगाया है।
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ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन ने शनिवार को देश की 2426 ऐसी कंपनियों के नाम उजागर किए जिन्होंने जानबूझकर बैंकों का कर्ज अदा नहीं किया है। इन कंपनियों ने 17 बैंकों का एक लाख 47 हजार तीन सौ पचास करोड़ रुपये डुबा दिया है। संगठन लंबे समय से सरकार से ऐसे बकाएदारों के नाम सार्वजानिक करने की मांग कर रहा था।
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लेकिन सरकार की ओर से ऐसा न होने पर संगठन ने खुद बड़े बकाएदारों के नाम जारी कर दिए हैं। कानपुर की बात करें तो विक्रम कोठारी पर करीब 4000 करोड़ तथा इनके मित्र हीरा कारोबारी उदय देसाई पर 3500 करोड़ का कर्ज है। इन्हीं दो कारोबारियों ने बैंकों को करीब 7500 करोड़ रुपये का चूना लगाया है।
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विक्रम कोठारी, उदय देसाई
- फोटो : अमर उजाला
तीसरा नाम लक्ष्मी कॉटसिन का है। इन्होंने भी बैंकों का करीब चार हजार करोड़ रुपये डुबा दिया है। अब इसकी वापसी की उम्मीद नहीं है। इन तीनों कारोबारियों की करीब तीन दर्जन कंपनियों के लोन खाते तीन से चार साल पहले एनपीए हो चुके हैं। बैंक अब इनकी संपत्तियों को बेचकर कर्ज वसूलने की प्रक्रिया में हैं। इस प्रकरण में विक्रम कोठारी और उदय देसाई तथा इनके बेटों को जेल भी हो चुकी है।
कर्जदार और भी पर सभी विलफुल डिफॉल्टर नहीं
ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन ने 30 सितंबर 2019 तक का आंकड़ा जुटाया है। इनमें वही नाम शामिल हैं जो जानबूझकर कर्ज नहीं चुका रहे हैं। हालांकि इनके अलावा भी बड़ी संख्या में खाते एनपीए हैं। मगर उन खातों को विलफुल डिफॉल्टर यानी जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों की श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है।
कुछ कारोबारी नुकसान की वजह से भी खाते एनपीए (डूबे) हैं। इसके अलावा 30 सितंबर 2019 के बाद कई बैंकों का आपस में विलय हो गया है। इस वजह से वर्तमान में कई बैंकों का अस्तित्व नहीं है। इनका एनपीए विलय वाले बैंकों में जुड़ गया है।
कर्जदार और भी पर सभी विलफुल डिफॉल्टर नहीं
ऑल इंडिया बैंक इंप्लाइज एसोसिएशन ने 30 सितंबर 2019 तक का आंकड़ा जुटाया है। इनमें वही नाम शामिल हैं जो जानबूझकर कर्ज नहीं चुका रहे हैं। हालांकि इनके अलावा भी बड़ी संख्या में खाते एनपीए हैं। मगर उन खातों को विलफुल डिफॉल्टर यानी जानबूझकर कर्ज न चुकाने वालों की श्रेणी में शामिल नहीं किया गया है।
कुछ कारोबारी नुकसान की वजह से भी खाते एनपीए (डूबे) हैं। इसके अलावा 30 सितंबर 2019 के बाद कई बैंकों का आपस में विलय हो गया है। इस वजह से वर्तमान में कई बैंकों का अस्तित्व नहीं है। इनका एनपीए विलय वाले बैंकों में जुड़ गया है।