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यूपी: कानपुर के सर्वश्रेष्ठ निर्यातक से कैसे हुए दीवालिया, एसएफआईओ करेगा आर्थिक स्थिति का आकलन
Tue, 09 Feb 2021 01:37 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Tue, 09 Feb 2021 01:37 AM IST
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विक्रम कोठारी
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कानपुर के सबसे बड़े बैंक डिफाल्टर रोटोमैक ग्रुप के मालिक विक्रम कोठारी को मिला सर्वश्रेष्ठ निर्यातक का अवार्ड भी जांच के दायरे में है। वर्ष-1997 में तत्कालीन प्रधानमंत्री ने कोठारी को देश के सर्वश्रेष्ठ निर्यातक का अवार्ड दिया था।
अब कंपनी संबंधी मामलों के मंत्रालय की विशेष जांच शाखा सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) उस दौरान बैंकों में रोटोमैक ग्रुप की आर्थिक स्थिति का आकलन करेगा। दस साल में बीस हजार करोड़ रुपये की कंपनी का लक्ष्य तय करने की फाइलों को भी जांच एजेंसी ने सीज किया है।
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अब कंपनी संबंधी मामलों के मंत्रालय की विशेष जांच शाखा सीरियस फ्रॉड इन्वेस्टिगेशन ऑफिस (एसएफआईओ) उस दौरान बैंकों में रोटोमैक ग्रुप की आर्थिक स्थिति का आकलन करेगा। दस साल में बीस हजार करोड़ रुपये की कंपनी का लक्ष्य तय करने की फाइलों को भी जांच एजेंसी ने सीज किया है।
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साढ़े चार हजार करोड़ से ज्यादा के बैंक डिफाल्टर विक्रम कोठारी की कंपनी रोटोमैक समूह की जांच तीन एजेंसियां कर रही हैं। सबसे पहले सीबीआई ने बैंक डिफाल्टर मामले की जांच शुरू की। भारी आर्थिक अनियमितताओं के चलते मामले की जांच ईडी (प्रवर्तन निदेशालय) को सौंपी गई।
अब एसएफआईओ इसकी जांच कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, 25 साल पुराने रिकॉर्ड में देखा जाएगा कि उस समय बैंकों से लिए गए कर्ज की स्थिति क्या थी और लोन देने के लिए बैंकों ने नियमों का पालन किया था या नहीं? जांच में इस तथ्य को भी शामिल किया जाएगा कि वर्ष-1995 में शुरू हुई रोटोमैक दस साल में 100 करोड़ की पूंजी वाली कैंपनी कैसे बन गई।
साथ ही रोटोमैक को 20 हजार करोड़ की कंपनी बनाने का लक्ष्य तय करने का क्या आधार था? कोठारी परिवार का गुजरात कनेक्शन भी सामने आया है। जांच में गुजरात के तीन उद्योगपतियों से कारोबारी लेनदेन का ब्योरा मिला है। इनमें से दो के नाम आरोपपत्र में शामिल करने के बाद इनसे पूछताछ हो रही है। मामले की तह तक जाने के लिए जांच एजेंसियां गुजरात के कुछ अन्य उद्योगपतियों से भी पूछताछ कर सकती हैं।
अब एसएफआईओ इसकी जांच कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक, 25 साल पुराने रिकॉर्ड में देखा जाएगा कि उस समय बैंकों से लिए गए कर्ज की स्थिति क्या थी और लोन देने के लिए बैंकों ने नियमों का पालन किया था या नहीं? जांच में इस तथ्य को भी शामिल किया जाएगा कि वर्ष-1995 में शुरू हुई रोटोमैक दस साल में 100 करोड़ की पूंजी वाली कैंपनी कैसे बन गई।
साथ ही रोटोमैक को 20 हजार करोड़ की कंपनी बनाने का लक्ष्य तय करने का क्या आधार था? कोठारी परिवार का गुजरात कनेक्शन भी सामने आया है। जांच में गुजरात के तीन उद्योगपतियों से कारोबारी लेनदेन का ब्योरा मिला है। इनमें से दो के नाम आरोपपत्र में शामिल करने के बाद इनसे पूछताछ हो रही है। मामले की तह तक जाने के लिए जांच एजेंसियां गुजरात के कुछ अन्य उद्योगपतियों से भी पूछताछ कर सकती हैं।