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UP: हृदय रोगी बैग में रखेंगे डिवाइस, करेगी दिल का काम, प्रदेश में पहली बार मरीजों के लगाई जाएगी एलवीएडी
Mon, 16 Jun 2025 01:12 PM IST
शिखा पांडेय
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
Published by: शिखा पांडेय
Updated Mon, 16 Jun 2025 01:12 PM IST
सार
Kanpur News: प्रदेश में पहली बार कार्डियोलॉजी में मरीजों के नई डिवाइस एलवीएडी लगाई जाएगी। हृदय की कमजोर मांसपेशियों के रोगियों को राहत मिलेगी। 48 घंटे का बैटरी बैकअप रहेगा।
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कार्डियोलॉजी
- फोटो : amar ujala
विस्तार
दिल की कमजोर मांसपेशियों वाले कार्डियोमायोपैथी के जिन रोगियों में दवा काम नहीं कर रही, उनके लिए अच्छी खबर है। एलपीएस कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट में उन्हें लेफ्टवेंट्रिकल असिस्टेड डिवाइस (एलवीएडी) लगाई जाएगी। यह उपकरण दिल का काम करेगा। उपकरण रोगी के कंधे पर टंगे बैग में रहेगा और इसके दो पाइप हृदय में जोड़े जाएंगे। इससे हृदय में रक्त आपूर्ति बनी रहेगी और ब्लड प्रेशर भी सामान्य रहेगा। इस उपकरण का बैटरी बैकअप 48 घंटे का है। इसमें दो बैटरी रहेंगी।
कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट की ओपीडी में कार्डियोमायोपैथी के औसत साढ़े तीन हजार रोगी हर महीने आते हैं। इनकी दिल की मांसपेशियां इतनी कमजोर होती हैं कि खून ढंग से पंप नहीं कर पातीं और वे हार्ट फेल की स्थिति में चले जाते हैं। बहुत से कार्डियोमायोपैथी के रोगी अस्पताल तक पहुंचने के पहले ही मर जाते हैं। इस मर्ज में एक सीमा के बाद दवाओं का असर कम होने लगता है। आखिर में हृदय प्रत्यारोपण विकल्प बचता है, जिसकी सुविधा उपलब्ध नहीं है।
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कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट की ओपीडी में कार्डियोमायोपैथी के औसत साढ़े तीन हजार रोगी हर महीने आते हैं। इनकी दिल की मांसपेशियां इतनी कमजोर होती हैं कि खून ढंग से पंप नहीं कर पातीं और वे हार्ट फेल की स्थिति में चले जाते हैं। बहुत से कार्डियोमायोपैथी के रोगी अस्पताल तक पहुंचने के पहले ही मर जाते हैं। इस मर्ज में एक सीमा के बाद दवाओं का असर कम होने लगता है। आखिर में हृदय प्रत्यारोपण विकल्प बचता है, जिसकी सुविधा उपलब्ध नहीं है।
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इंस्टीट्यूट के निदेशक प्रोफेसर राकेश कुमार वर्मा ने बताया कि एलवीएडी लगाए जाने की सुविधा तीन महीने के अंदर संस्थान में मिलने लगेगी। इंस्टीट्यूट में रोगियों को उपकरण की व्यवस्था कराई जाएगी। अभी यह सुविधा एम्स दिल्ली में रोगियों को दी जा रही है। प्रदेश में इसकी शुरुआत कार्डियोलॉजी से होगी। प्रदेश के अन्य संस्थानों में इसकी सुविधा अभी उपलब्ध नहीं है।
उन्होंने बताया कि एलवीएडी शरीर रोगी के शरीर के बाहर रहता है। इससे जुड़े दो पाइप रोगी के हृदय में जोड़ दिए जाते हैं। इससे शरीर में रक्त की आपूर्ति बनी रहती है। रोगी को बैटरी चार्ज करनी पड़ती है। बैक अप में एक बैटरी और रहती है। बैटरी 48 घंटे तक काम कर सकती है। रोगी एलवीएडी को बैग में रखकर कहीं भी आ जा सकता है। एहतियात के साथ अपने दैनिक काम कर सकता है।
उन्होंने बताया कि एलवीएडी शरीर रोगी के शरीर के बाहर रहता है। इससे जुड़े दो पाइप रोगी के हृदय में जोड़ दिए जाते हैं। इससे शरीर में रक्त की आपूर्ति बनी रहती है। रोगी को बैटरी चार्ज करनी पड़ती है। बैक अप में एक बैटरी और रहती है। बैटरी 48 घंटे तक काम कर सकती है। रोगी एलवीएडी को बैग में रखकर कहीं भी आ जा सकता है। एहतियात के साथ अपने दैनिक काम कर सकता है।
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एलएवीडी ऐसे करती है काम
एलवीडी में दो पाइप होते हैं। एक हृदय के लेफ्ट वेंट्रिकल से जुड़ा होता है और दूसरा एओटा से। लेफ्ट वेंट्रिकल का काम प्रेशर से आक्सीजनयुक्त खून एओटा को पहुंचना होता है। यही खून शरीर के अन्य अंगों में जाता है। मांसपेशियां कमजोर होने से लेफ्ट वेंट्रिकल में प्रेशर के साथ पंपिंग नहीं हो पाती, जिससे खून आगे एओटा तक पहुंचने में मुश्किल होती है। एलवीडी का एक पाइप लेफ्ट वेंट्रिकल से खून लेता और दूसरा पाइप उसे एओटा तक पहुंचा देता है। इससे हृदय काम करता रहता है।
एलवीडी में दो पाइप होते हैं। एक हृदय के लेफ्ट वेंट्रिकल से जुड़ा होता है और दूसरा एओटा से। लेफ्ट वेंट्रिकल का काम प्रेशर से आक्सीजनयुक्त खून एओटा को पहुंचना होता है। यही खून शरीर के अन्य अंगों में जाता है। मांसपेशियां कमजोर होने से लेफ्ट वेंट्रिकल में प्रेशर के साथ पंपिंग नहीं हो पाती, जिससे खून आगे एओटा तक पहुंचने में मुश्किल होती है। एलवीडी का एक पाइप लेफ्ट वेंट्रिकल से खून लेता और दूसरा पाइप उसे एओटा तक पहुंचा देता है। इससे हृदय काम करता रहता है।
हृदय के कमजोर मांसपेशियों वाले रोगियों की बढ़ रही संख्या
निदेशक प्रोफेसर वर्मा ने बताया कि लंबे समय तक दवा खाने से हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। इसके अलावा नसों में खराबी आने, हृदय के वाल्व प्रभावित होने समेत कार्डियो मायोपैथी होने के कई कारण हैं। इसके रोगी बढ़ रहे हैं। हर ओपी़डी में औसत सौ रोगी इसके आते हैं।
निदेशक प्रोफेसर वर्मा ने बताया कि लंबे समय तक दवा खाने से हृदय की मांसपेशियां कमजोर हो जाती हैं। इसके अलावा नसों में खराबी आने, हृदय के वाल्व प्रभावित होने समेत कार्डियो मायोपैथी होने के कई कारण हैं। इसके रोगी बढ़ रहे हैं। हर ओपी़डी में औसत सौ रोगी इसके आते हैं।