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जानें, यूपी के प्रत्याशी मध्य प्रदेश में जाकर क्यों मांग रहे हैं वोट
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Tue, 07 Feb 2017 12:47 AM IST
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यूपी के कई प्रत्याशी एमपी में जाकर वोट मांगने को मजबूर हैं। ऐसा करने की वजह भी बड़ी खास है। सरहद की घालमेल के कारण प्रत्याशी और मतदाता परेशान हैं। चुनाव यूपी में हो रहा है और एमपी में चहल पहल बढ़ गई है। कारण मध्य प्रदेश की सीमा पर कुछ गांव में अजीबोगरीब स्थिति है। यूपी क्षेत्र का प्रत्याशी एमपी की सरहद पर बसे मतदाताओं से वोट मांग रहा है।
जिले की महोबा विधानसभा के कई गांव एमपी सीमा से जुड़े हैं। छोटी टपरियन, बड़ी टपरियन, कैमाहा, समशेरा, पुटेरा, उदयपुरा, कंचनपुरा, धवर्रा, मवई, पिपरा, अतरारमाफ, लुहेड़ी समेत कई गांव हैं। जहां मतदाताओं से मिलने के लिए एमपी में प्रवेश करना पड़ता है। यूपी के कई गांव की स्थिति यह है कि मकान यूपी में है और खपरैल का पानी एमपी में गिरता है। सीमा के इस घपले में इन दिनों प्रत्याशी और उनके प्रचारक सरहद की घालमेल के चक्कर में एमपी के लोगों से वोट मांग लेते है। इसी तरह विधानसभा चरखारी के चौका, सौरा, मानकी, चमरुआ, घिसल्ली समेत कई गांव एमपी की सरहद में बसे हुए है। सरहद पर बसे यूपी के मतदाता शिक्षा, चिकित्सा, पानी, सड़क जैसी सुविधाओं का लाभ एमपी का ले रहे है। इतना ही नहीं इन गांवों में पहुंचनेे के लिए पहले मध्य प्रदेश में प्रवेश करना पड़ता है। इसके बाद वोट मांगते है। हैरानी वाली बात यह है कि बिना एमपी में घुसे यूपी के गांव में दाखिला नहीं हो सकते हैं। कभी तो प्रत्याशी एमपी के मतदाताओं से वोट मांगकर चले आते हैं।
सीमाएं सील होने से होते परेशान
यूपी के गांव एमपी की सरहद में सटे होने के कारण विधानसभा चुनाव में मतदान के दिन सीमाएं सील हो जाने से एमपी के लोगों को भी आवागमन में खासी मशक्कत उठानी पड़ती है। चुनाव यूपी में होता है और दुश्वारिया एमपी के लोगों को झेलनी पड़ती है।
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निवासी यूपी के सुविधाएं एमपी की
यूपी एमपी की सरहद पर बसे जिले के मतदाता कहने को तो यूपी में निवास करते है। लेकिन वहां से जिला मुख्यालय की दूरी 50 से 60 किमी है। मगर एमपी की सरहद सटी हुई है। जिससे यूपी के लोग एमपी की चिकित्सा और शिक्षा और वहीं के पानी का लाभ लेते हैं।
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जिले की महोबा विधानसभा के कई गांव एमपी सीमा से जुड़े हैं। छोटी टपरियन, बड़ी टपरियन, कैमाहा, समशेरा, पुटेरा, उदयपुरा, कंचनपुरा, धवर्रा, मवई, पिपरा, अतरारमाफ, लुहेड़ी समेत कई गांव हैं। जहां मतदाताओं से मिलने के लिए एमपी में प्रवेश करना पड़ता है। यूपी के कई गांव की स्थिति यह है कि मकान यूपी में है और खपरैल का पानी एमपी में गिरता है। सीमा के इस घपले में इन दिनों प्रत्याशी और उनके प्रचारक सरहद की घालमेल के चक्कर में एमपी के लोगों से वोट मांग लेते है। इसी तरह विधानसभा चरखारी के चौका, सौरा, मानकी, चमरुआ, घिसल्ली समेत कई गांव एमपी की सरहद में बसे हुए है। सरहद पर बसे यूपी के मतदाता शिक्षा, चिकित्सा, पानी, सड़क जैसी सुविधाओं का लाभ एमपी का ले रहे है। इतना ही नहीं इन गांवों में पहुंचनेे के लिए पहले मध्य प्रदेश में प्रवेश करना पड़ता है। इसके बाद वोट मांगते है। हैरानी वाली बात यह है कि बिना एमपी में घुसे यूपी के गांव में दाखिला नहीं हो सकते हैं। कभी तो प्रत्याशी एमपी के मतदाताओं से वोट मांगकर चले आते हैं।
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सीमाएं सील होने से होते परेशान
यूपी के गांव एमपी की सरहद में सटे होने के कारण विधानसभा चुनाव में मतदान के दिन सीमाएं सील हो जाने से एमपी के लोगों को भी आवागमन में खासी मशक्कत उठानी पड़ती है। चुनाव यूपी में होता है और दुश्वारिया एमपी के लोगों को झेलनी पड़ती है।
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निवासी यूपी के सुविधाएं एमपी की
यूपी एमपी की सरहद पर बसे जिले के मतदाता कहने को तो यूपी में निवास करते है। लेकिन वहां से जिला मुख्यालय की दूरी 50 से 60 किमी है। मगर एमपी की सरहद सटी हुई है। जिससे यूपी के लोग एमपी की चिकित्सा और शिक्षा और वहीं के पानी का लाभ लेते हैं।