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यूपी: अरुण मिश्रा ने सरकारी खजाने को लगाई 152 करोड़ की चपत, यूपीसीडा को समझा घर की खेती
Sun, 01 Nov 2020 09:34 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
Published by: प्रभापुंज मिश्रा
Updated Sun, 01 Nov 2020 09:34 PM IST
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UPSIDC का चीफ इंजीनियर अरुण मिश्रा
- फोटो : amar ujala
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उत्तर प्रदेश औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) का प्रधान महाप्रबंधक अरुण मिश्रा भ्रष्टाचार के आरोप में पहली बार वर्ष 1988 में निलंबित हुआ। इसके बाद अभी तक छह बार निलंबित हो चुका है। बर्खास्तगी का आदेश हुआ तो न्यायालय से स्टे ले आया। इस पर वर्ष 2007 में गाजियाबाद स्थित ट्रोनिका सिटी में 400 से ज्यादा औद्योगिक प्लाट बेचने में भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे।
सके बाद लखनऊ के अमौसी औद्योगिक क्षेत्र में एक्जिबिशन सेंटर की जगह पर पांच मजिला इमारत बनवाने में गलत तरीके से ठेकेदार और सलाहकार चुनकर करीब 27 करोड़ रुपये का भुगतान किया। महंगे प्लाटों को सस्ते दर पर बेच कर सरकारी राजस्व को 152 करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगाई। अरुण मिश्रा पर लगे आरोपों की लंबी फेहरिस्त है।
नौकरी केदो साल बाद से ही इसके कारनामे उजागर होने लगे। वर्ष 2007 में कैग की एक जांच रिपोर्ट में ट्रोनिका सिटी में प्लाट आवंटन को लेकर अरुण मिश्रा का बड़ा खेल सामने आया। यहां 96,600 वर्ग मीटर ग्रुप हाउसिंग और 76,640 वर्ग मीटर कॉमर्शियल के प्लाट आवंटित हुए थे। ग्रुप हाउसिंग के प्लाटों का मूल्य 12 से 13 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर के बीच रखा गया था।
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सके बाद लखनऊ के अमौसी औद्योगिक क्षेत्र में एक्जिबिशन सेंटर की जगह पर पांच मजिला इमारत बनवाने में गलत तरीके से ठेकेदार और सलाहकार चुनकर करीब 27 करोड़ रुपये का भुगतान किया। महंगे प्लाटों को सस्ते दर पर बेच कर सरकारी राजस्व को 152 करोड़ रुपये से अधिक की चपत लगाई। अरुण मिश्रा पर लगे आरोपों की लंबी फेहरिस्त है।
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नौकरी केदो साल बाद से ही इसके कारनामे उजागर होने लगे। वर्ष 2007 में कैग की एक जांच रिपोर्ट में ट्रोनिका सिटी में प्लाट आवंटन को लेकर अरुण मिश्रा का बड़ा खेल सामने आया। यहां 96,600 वर्ग मीटर ग्रुप हाउसिंग और 76,640 वर्ग मीटर कॉमर्शियल के प्लाट आवंटित हुए थे। ग्रुप हाउसिंग के प्लाटों का मूल्य 12 से 13 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर के बीच रखा गया था।
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लेकिन अरुण ने इन्हेें 3200 से 4475 की दर पर बेच दिया। इसी तरह 15 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर के कॉमर्शियल प्लाट 5500 से 11500 तक रुपये में बेच डाले। इससे सरकारी खजाने को 152 करोड़ से अधिक की चपत लगी। कानपुर स्थित गंगा बैराज किनारे बसाई जा रही ट्रांसगंगा सिटी में भी बिना काम के छह करोड़ रुपये का भुगतान कर दिया। इन बिलों पर सहायक अभियंता के हस्ताक्षर भी नहीं हुए थे।
कोलकाता की बोगस कंपनी के पैसे से बनवाया स्कूल
बेनामी संपत्तियोें को लेकर हुई शिकायत के बाद जब आयकर विभाग ने अरुण मिश्रा के कारनामों की जांच की तो उसके एक बड़े स्कूल का भी पता चला। बाराबंकी के कुर्सी रोड स्थित एशिया स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट का संचालन अप्रत्यक्ष रूप से अरुण मिश्रा ही करता पाया गया। उसकी बेनामी संपत्तियों की देखरेख करने के पीछे एक महिला का भी नाम सामने आया। यही महिला इस कॉलेज को संभाल रही थी। इस कॉलेज को कोलकाता की एक बोगस कंपनी से फंड मिला था। स्कूल भवन का नक्शा तक पास नहीं था।
ईडी ने फिर शुरू की जांच
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अरुण मिश्रा के खिलाफ जांच की फाइल एक बार फिर से खोल दी है। इसके खिलाफ सबसे बड़ा मामला आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार का है। जांच में फर्जी खातों से हुए करोड़ों के लेनदेन की पड़ताल की जाएगी।
कोलकाता की बोगस कंपनी के पैसे से बनवाया स्कूल
बेनामी संपत्तियोें को लेकर हुई शिकायत के बाद जब आयकर विभाग ने अरुण मिश्रा के कारनामों की जांच की तो उसके एक बड़े स्कूल का भी पता चला। बाराबंकी के कुर्सी रोड स्थित एशिया स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग एंड मैनेजमेंट का संचालन अप्रत्यक्ष रूप से अरुण मिश्रा ही करता पाया गया। उसकी बेनामी संपत्तियों की देखरेख करने के पीछे एक महिला का भी नाम सामने आया। यही महिला इस कॉलेज को संभाल रही थी। इस कॉलेज को कोलकाता की एक बोगस कंपनी से फंड मिला था। स्कूल भवन का नक्शा तक पास नहीं था।
ईडी ने फिर शुरू की जांच
प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने अरुण मिश्रा के खिलाफ जांच की फाइल एक बार फिर से खोल दी है। इसके खिलाफ सबसे बड़ा मामला आय से अधिक संपत्ति और भ्रष्टाचार का है। जांच में फर्जी खातों से हुए करोड़ों के लेनदेन की पड़ताल की जाएगी।