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यूनिवर्सिटी कराएगी अपना पीएचडी एंट्रेंस
अमर उजाला ब्यूरो, कानपुर
Updated Wed, 26 Aug 2015 02:39 AM IST
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छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी अब पीएचडी का अपना एंट्रेंस टेस्ट कराएगी। इस पर सहमति बन गई है। एंट्रेंस टेस्ट के आवेदन फार्म अक्तूबर से बेचे जाएंगे। वेबसाइट www.kanpuruniversity.org की मदद से ऑनलाइन फार्म भी भरे जा सकेंगे।
कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन का कहना है कि 2015-16 की एडमिशन प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। प्रवेश परीक्षा, सेमेस्टर कोर्स और रिसर्च का खाका तैयार कर लिया गया है। प्रवेश परीक्षा में सामान्य, ओबीसी के अभ्यर्थियों को 50 फीसदी और एससी, एसटी, हैंडीकैप्ड को 45 फीसदी मार्क्स लाने होंगे। 2014-15 की सीटें कॉमन एडमिशन टेस्ट से भरी थीं।
छह महीने के सेमेस्टर कोर्स को 50 फीसदी अंकों के साथ पास करना जरूरी होगा। रिसर्च मैथडोलॉजी और कंप्यूटर अप्लीकेशन के पेपर में भी 50-50 फीसदी मार्क्स लाने होंगे। इससे कम मार्क्स हुए तो सेमेस्टर कोर्स की पढ़ाई नए सिरे से करनी होगी। दूसरी बार फेल होने पर तीसरा मौका नहीं मिलेगा।
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थीसिस जमा करने की अधिकतम समयसीमा छह साल है। इसके बाद भी थीसिस नहीं जमा की गई तो रजिस्ट्रेशन निरस्त हो जाएगा। इसके अलावा रिसर्च स्कॉलर चाहें तो दो साल में ही थीसिस जमा कर सकते हैं। इसकी अधिकतम समयसीमा चार साल है। यदि इस दौरान भी थीसिस नहीं जमा हुई तो रिसर्च डिग्री कमेटी (आरडीसी) से अनुमति लेकर दो साल का एक्सटेंशन और लिया जा सकेगा।
छह महीने का सेमेस्टर कोर्स पास करने वाले रिसर्च स्कॉलर टॉपिक चुनेंगे, फिर सिनॉप्सिस तैयार करके तीन सुपरवाइजर का नाम सेलेक्ट करेंगे। पूरा मामला रिसर्च डेवलपमेंट कमेटी (आरडीसी) के समक्ष जाएगा। इसके चेयरमैन कुलपति होंगे। डीन, एचओडी और कुलपति के नामित दो सदस्य भी रहेंगे।
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कुलपति प्रो. जेवी वैशंपायन का कहना है कि 2015-16 की एडमिशन प्रक्रिया जल्द शुरू होगी। प्रवेश परीक्षा, सेमेस्टर कोर्स और रिसर्च का खाका तैयार कर लिया गया है। प्रवेश परीक्षा में सामान्य, ओबीसी के अभ्यर्थियों को 50 फीसदी और एससी, एसटी, हैंडीकैप्ड को 45 फीसदी मार्क्स लाने होंगे। 2014-15 की सीटें कॉमन एडमिशन टेस्ट से भरी थीं।
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छह महीने के सेमेस्टर कोर्स को 50 फीसदी अंकों के साथ पास करना जरूरी होगा। रिसर्च मैथडोलॉजी और कंप्यूटर अप्लीकेशन के पेपर में भी 50-50 फीसदी मार्क्स लाने होंगे। इससे कम मार्क्स हुए तो सेमेस्टर कोर्स की पढ़ाई नए सिरे से करनी होगी। दूसरी बार फेल होने पर तीसरा मौका नहीं मिलेगा।
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थीसिस जमा करने की अधिकतम समयसीमा छह साल है। इसके बाद भी थीसिस नहीं जमा की गई तो रजिस्ट्रेशन निरस्त हो जाएगा। इसके अलावा रिसर्च स्कॉलर चाहें तो दो साल में ही थीसिस जमा कर सकते हैं। इसकी अधिकतम समयसीमा चार साल है। यदि इस दौरान भी थीसिस नहीं जमा हुई तो रिसर्च डिग्री कमेटी (आरडीसी) से अनुमति लेकर दो साल का एक्सटेंशन और लिया जा सकेगा।
छह महीने का सेमेस्टर कोर्स पास करने वाले रिसर्च स्कॉलर टॉपिक चुनेंगे, फिर सिनॉप्सिस तैयार करके तीन सुपरवाइजर का नाम सेलेक्ट करेंगे। पूरा मामला रिसर्च डेवलपमेंट कमेटी (आरडीसी) के समक्ष जाएगा। इसके चेयरमैन कुलपति होंगे। डीन, एचओडी और कुलपति के नामित दो सदस्य भी रहेंगे।