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यूजीसी ने क्राइस्टचर्च कॉलेज को दिया विरासत का दर्जा

Mon, 06 Jul 2015 01:43 AM IST
अमर उजाला, कानपुर
अमर उजाला, कानपुर Updated Mon, 06 Jul 2015 01:43 AM IST
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UGC given heritage status of Christchurch College
विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने 100 साल से अधिक पुराने कॉलेजों के कैंपस को संरक्षित करने के उद्देश्य से देशभर के 19 कॉलेजों व शिक्षण संस्थानों को विरासत का दर्जा दिया है, जिसमें महानगर का क्राइस्ट चर्च कॉलेज भी शामिल है। आयोग इन कॉलेजों को विरासत के संरक्षण, सुधार और अपग्रेडेशन के लिए वित्तीय मदद उपलब्ध कराएगा।
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शहर के प्रतिष्ठित कॉलेजों में शुमार क्राइस्टचर्च कॉलेज की स्थापना 1866 में हुई थी। जीएच वेस्कॉट, आरजी स्लॉटर, निनान अब्राहम जैसे अंग्रेज इसके एल्युमिनाई (पूर्व छात्र) थे। इसके अलावा पंडित मोतीलाल नेहरू, उमाशंकर दीक्षित, जियाउल्लाह रहमान अंसारी, द्वारिका प्रसाद मिश्रा, वाइस एडमिरल अविनाश भाटिया, प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी (एनएसए) के प्रमुख एके डोभाल, चीफ फाइनेंशियल आफीसर आफ व्हाइट
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हाउस (यूएसए) गोपाल खन्ना, मशहूर गायक अभिजीत भट्टाचार्य, यूपी के पूर्व स्वास्थ्य मंत्री अनंत मिश्रा, पूर्व केंद्रीय मंत्री राजीव शुक्ला ने इसी कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की है।
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क्राइस्ट चर्च कॉलेज की शुरूआत एसपीजी मिशन स्कूल के नाम से 1840 में औपचारिक रूप से की गई थी। इसमें ईसाई समाज के बच्चे ही पढ़ते थे। पहले इसे मिशन स्कूल के नाम से जाना जाता था। फिर इसका नाम क्राइस्टचर्च हुआ। स्थापना के समय कॉलेज कोलकाता यूनिवर्सिटी से संबद्ध था।

1892 में यह इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से संबद्ध हुआ। फिर 1927 से आगरा यूनिवर्सिटी से संबद्ध रहा। 1966 से कालेज कानपुर यूनिवर्सिटी से संबद्ध है। कॉलेज के इतिहास विभागाध्यक्ष प्रो. एसपी सिंह ने बताया कि कॉलेज का इतिहास गौरवशाली रहा है। 1857 के गदर के दौरान कॉलेज का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था। जिसे बाद में बनवाया गया। 1934 में महात्मा गांधी कॉलेज आए थे। इस दौरान उन्होंने स्टूडेंट की एक सभा की थी।


इसके अलावा सर्वजातीय-सर्वधर्म भोज भी कराया था। इसका मकसद था कि एक मंच पर सभी जाति व धर्म के लोग आएं और देश में मौजूद तमाम सामाजिक-धार्मिक बुराइयों को दूर करने में एक दूसरे के भागीदार बनें। उन्होंने बताया कि एक समय में कॉलेज की प्रतिष्ठा दिल्ली के सेंट स्टीफेन के समान पूरे उत्तर भारत में थी। देश के तमाम हिस्सों के लोग यहां पढ़ने की चाह रखते थे।
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