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दो सौ वर्ष पुराने कुएं का शुरू कराया जीर्णोद्धार
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सरवनखेड़ा। ब्लॉक के सैंथा गांव में बदहाली के शिकार दो सौ वर्ष पुराने कुएं का जीर्णोद्धार कराने की पहल ग्राम पंचायत ने शुरू की है। ग्राम प्रधान की ओर से पुरानी धरोहर सहेजने की पहल करने पर ग्रामीणों में खुशी जताई है। वहीं जानकारों के अनुसार यह जिले का सबसे बड़ा कुआं भी है। इसमें अब पानी तो नहीं है लेकिन ग्रामीण यहां पूजा अर्चना करते हैं।
सैंथा ग्राम पंचायत का गठन होने के बाद सबसे पहले गांव में मौजूद ऐतिहासिक दो सौ वर्ष पुराने कुएं को सहेजने की पहल शुरू की गई है। ग्राम प्रधान ने विकास समिति के साथ बैठक कर कुएं के जीर्णोद्धार का खाका खींचा और काम भी शुरू करा दिया। कुएं का व्यास करीब 20 फीट है। लगभग 32 फिट की चौड़ाई में बने इस कुएं की चारो तरफ की दीवारें टूट जाने से यह बदहाल हो गया था।
वर्ष 1995 में तत्कालीन प्रधान राम प्रताप सिंह ने इसका जीर्णोद्धार कराया था। तब कुएं में पर्याप्त पानी भी था, लेकिन अब पानी पूरी तरह से सूख गया है। पंचायत ने इसकी तरफ कभी ध्यान नहीं दिया इससे इसका अस्तित्व खत्म होता जा रहा था। धार्मिक मान्यता के चलते आज भी पूरे गांव की महिलाएं बेटे की बरात से पहले कुआं पूजन की रस्म इसी जगह पर करती हैं।
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गांव के 90 वर्षीय बुजुर्ग छिद्दू सिंह परिहार ने बताया कि छह दशक पहले गांव में यही एकमात्र कुआं था। पानी के लिए पूरे गांव के लोग यहीं एकत्र होते थे। उन्होंने बताया कि ये कुआं लगभग दो सौ वर्ष पुराना है। 70 वर्षीय बसंती देवी ने बताया कि वर्ष 2005 तक इस कुएं में पानी था। गांव की महिलाएं हैंड पाइप होने के बावजूद इसी कुएं का पानी खाना बनाने में प्रयोग करती थीं। ग्राम सभा के मजरा गंगागंज के निवासी भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि जिले में यह सबसे बड़ा कुआं है। डीएम व सीडीओ से बात करके ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने में ग्राम पंचायत की मदद करेंगे।
गांव में 200 साल पुराना ऐतिहासिक कुआं बदहाल हो गया था। शादी के समय महिलाएं कुआं पूजन की रस्म इसी जगह पर करती हैं। गांव की आस्था व ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने के लिए सबसे पहले पंचायत की तरफ से ये काम शुरू कराया गया है। कुएं में खोदाई कराकर पानी निकालने का भी प्रयास किया जाएगा। - कासिम खान, प्रधान सैंथा
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सैंथा ग्राम पंचायत का गठन होने के बाद सबसे पहले गांव में मौजूद ऐतिहासिक दो सौ वर्ष पुराने कुएं को सहेजने की पहल शुरू की गई है। ग्राम प्रधान ने विकास समिति के साथ बैठक कर कुएं के जीर्णोद्धार का खाका खींचा और काम भी शुरू करा दिया। कुएं का व्यास करीब 20 फीट है। लगभग 32 फिट की चौड़ाई में बने इस कुएं की चारो तरफ की दीवारें टूट जाने से यह बदहाल हो गया था।
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वर्ष 1995 में तत्कालीन प्रधान राम प्रताप सिंह ने इसका जीर्णोद्धार कराया था। तब कुएं में पर्याप्त पानी भी था, लेकिन अब पानी पूरी तरह से सूख गया है। पंचायत ने इसकी तरफ कभी ध्यान नहीं दिया इससे इसका अस्तित्व खत्म होता जा रहा था। धार्मिक मान्यता के चलते आज भी पूरे गांव की महिलाएं बेटे की बरात से पहले कुआं पूजन की रस्म इसी जगह पर करती हैं।
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गांव के 90 वर्षीय बुजुर्ग छिद्दू सिंह परिहार ने बताया कि छह दशक पहले गांव में यही एकमात्र कुआं था। पानी के लिए पूरे गांव के लोग यहीं एकत्र होते थे। उन्होंने बताया कि ये कुआं लगभग दो सौ वर्ष पुराना है। 70 वर्षीय बसंती देवी ने बताया कि वर्ष 2005 तक इस कुएं में पानी था। गांव की महिलाएं हैंड पाइप होने के बावजूद इसी कुएं का पानी खाना बनाने में प्रयोग करती थीं। ग्राम सभा के मजरा गंगागंज के निवासी भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष राजेंद्र सिंह चौहान ने बताया कि जिले में यह सबसे बड़ा कुआं है। डीएम व सीडीओ से बात करके ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने में ग्राम पंचायत की मदद करेंगे।
गांव में 200 साल पुराना ऐतिहासिक कुआं बदहाल हो गया था। शादी के समय महिलाएं कुआं पूजन की रस्म इसी जगह पर करती हैं। गांव की आस्था व ऐतिहासिक धरोहर को सहेजने के लिए सबसे पहले पंचायत की तरफ से ये काम शुरू कराया गया है। कुएं में खोदाई कराकर पानी निकालने का भी प्रयास किया जाएगा। - कासिम खान, प्रधान सैंथा