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‘तीन तलाक का तरीका मुल्ला का, कुरान का नहीं’

Fri, 09 Dec 2016 09:38 AM IST
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर
टीम डिजिटल/ अमर उजाला, कानपुर Updated Fri, 09 Dec 2016 09:38 AM IST
सार

महिलाओं ने कहा कि कुरान के हिसाब से ही तलाक देना उचित
मुस्लिम पर्सनल लॉ में छेड़छाड़ मंजूर नहीं होगी, बहस हुई तेज

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triple talaq in muslims not the quran
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विस्तार

इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन तलाक को मुस्लिम महिलाओं के लिए क्रूरता मानना और कोई भी पर्सनल लॉ संविधान से ऊपर न होने की बात कहने पर मुस्लिम महिलाओं ने सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। महिलाओं ने कहा कि तीन तलाक का सही तरीका सिर्फ कुरान में है। एक साथ झटके में तीन तलाक देना गैर इस्लामिक तरीका है। यह किसी मुल्ला-मौलवी का तरीका हो सकता है लेकिन कुरान का नहीं है।
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डीजी गर्ल्स पीजी कॉलेज की उर्दू की प्रवक्ता डॉ. हिना अफशां ने कहा कि कुरान में किसी महिला को तलाक देने का साफ तरीका है। कुरान में एक झटके में नहीं बल्कि तोहर (अंतराल) में तलाक देने का हुक्म है। ऐसे में मुसलमान तो कुरान की बात मानेंगे। एक झटके में तीन तलाक देना किसी मुल्ला-मौलवी के निजी तरीके पर इस्लाम नहीं चलेगा।
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हालांकि पर्सनल लॉ पर कोई बहस न थी और न है। संविधान में मुस्लिम पर्सनल लॉ को पूरे अधिकार मिले हैं। फैसले भी कानून से होते हैं। शिया महिला शहरकाजी डॉ. हिना जहीर का कहना है कि तीन तलाक पर बहस लगातार हो रही है। कुरान ने अंतराल में तलाक देने का हुक्म दिया है और वही मान्य है। महिलाओं में तीन तलाक के बढ़े चलने से डर पैदा हुआ है। उनके अधिकारों का हनन होता है। तलाक के अलावा पर्सनल लॉ पर कोई भी टिप्पणी करना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
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अहले हदीस विचारधारा के कानपुर प्रमुख इकबाल मोहम्मदी ने कहा कि अगर कोई पुरुष किसी महिला को एक साथ तीन तलाक दे भी दे तो उसे एक ही माना जाएगा। इस तरह से मियां-बीवी का रिश्ता कायम भी रहेगा। उनके उलेमा इस बात को कुरान हदीस से साबित करते रहे हैं। बरेलवी विचारधारा के शहरकाजी मौलाना रियाज अहमद हशमती ने कहा कि तीन तलाक देने का सही तरीका कुरान में है। अगर कुछ लोग एक झटके में तलाक देते हैं तो वह मान्य है। मुस्लिम पर्सनल लॉ शरीअत है। अल्लाह का कानून है। कयामत तक उसमें कोई बदलाव नहीं होगा।
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