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बीमार शरीर में ही रहता लाइलाज मर्ज का इलाज: कुदरत का दवाखाना है इंसान का जिस्म, स्टेम सेल से असाध्य रोगों का इलाज

Mon, 15 Nov 2021 11:57 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर Published by: प्रभापुंज मिश्रा Updated Mon, 15 Nov 2021 11:57 AM IST
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Treatment of incurable disease remains in the sick body: the drug of nature is the human body, treatment of incurable diseases with stem cells
हैलट में संक्रमण विभाग - फोटो : amar ujala
इंसान का जिस्म एक कुदरती दवाखाना भी है। रोगी को होने वाले लाइलाज मर्ज की दवा उसकी स्टेम सेल होती हैं। अब स्टेम सेल से अलग-अलग मर्ज के इलाज के साथ जिस्म के अलग-अलग हिस्सों में इन कोशिकाओं की तलाश भी कर ली गई है और उसका इस्तेमाल भी हो रहा है। कोरोना, डेंगू, दूसरे वायरल और बैक्टीरियल संक्रमणों से बेकार हो रहे अंगों को स्टेम सेल से सुधारा जा रहा है। हैलट में पैदाइशी बीमारियों के साथ अल्सर, न भरने वाले घावों के रोगियों में भी इसका इस्तेमाल हुआ है जो कामयाब रहा। 
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अभी तक यह माना जाता रहा है कि स्टेम सेल नवजात बच्चे की नाड़ में होती हैं। लेकिन अब विशेषज्ञ इसे रोगी की अस्थि मज्जा, उसके खून, नर्व टिश्यू, नाक के अंदर तरल पदार्थ (म्यूकोजा), दांत के पल्प से प्राप्त कर ले रहे हैं। इन्हें निकाल बीमार अंग में डाल दिया जाता है। इससे टिश्यू में सुधार होने लगता है और बीमार अंग सेहतमंद होने लगता है। जीएसवीएम मेडिकल कालेज के विजिटिंग प्रोफेसर और स्टेम सेल थेरेपी विशेषज्ञ डॉ. बीएस राजपूत कहते हैं कि रोगी के शरीर में ही स्टेम सेल मिल जाती है। 
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वैसे नाड़ की सेल का भी इस्तेमाल होता है। डॉ. राजपूत का कहना है कि मानव के शरीर के अंदर ही कुदरत ने दवा भी दे दी है। अभी सरकार ने सर्जिकल केस में इसकी अनुमति दी है। अभी और भी रास्ते खुलने वाले हैं। फेफड़ों, गुर्दों, लिवर के अलावा डायबिटीज से होने वाले घावों को भी स्टेम सेल के जरिये ठीक किया जा सकेगा। इसके साथ ही पैदाइशी बीमारियों में भी इसे दिया जा रहा है। नतीजे बहुत अच्छे हैं।
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स्टेम सेल बैंकों में सालों तक सुरक्षित रहती स्टेम सेल
स्टेम सेल बैंक बच्चे की नाड़ की स्टेम सेल निकालकर उन्हें प्रोसेस करके लिक्विड नाइट्रोजन में रख देते हैं। इसे माइनस 186 डिग्री सेल्सियस पर रखा जाता है। ये 60-70 साल से अधिक सुरक्षित रहती हैं। बैंक साल के हिसाब से पैसा लेते हैं। स्टेम सेल थेरेपी शुरू होने के बाद हैलट में भी स्टेम सेल बैंक का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। 


ऐसे होता है इस्तेमाल
स्टेम सेल को खून, नर्व सेल्स, डेंटल पल्प आदि से निकालकर खास तरीके से उपकरणों में प्रोसेस किया जाता है। इसके बाद उन्हें बीमार अंग में डाला जाता है। स्टेम से वहां की खराब कोशिकाओं का रूप लेने लगती है।
 
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