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फॉग सेफ्टी डिवाइस पर ट्रेन ड्राइवरों को भरोसा नहीं, जानें क्या है इसकी 'असली वजह'
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
Updated Fri, 29 Dec 2017 01:43 PM IST
सार
- ब्रह्मपुत्र मेल 24 घंटे, स्वतंत्रता सेनानी 14 घंटे की देरी से चल रही
- इक्का दुक्का छोड़कर कोई भी ट्रेन समय से नहीं आ जा रही
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विस्तार
कोहरे मेेें सिग्नल की जानकारी देने वाली फॉग सेफ्टी डिवाइस पर ट्रेन ड्राइवरों को भरोसा नहीं है। ड्राइवर पहले डिवाइस के भार की वजह से उसे ले जाने में आनाकानी कर रहे थे। अब उनका कहना है कि यह डिवाइस भरोसे के काबिल नहीं है।
ट्रेनों के कुछ ड्राइवर फॉग सेफ्टी डिवाइस ले जाने लगे हैं, लेकिन उनकी संख्या बहुत कम है। अधिकतर ड्राइवरों ने डिवाइस ले जाने से अब यह कहकर इनकार करना शुरू कर दिया है कि यह भरोसे योग्य नहीं है। इसके पहले ड्राइवर इस डिवाइस के भार की वजह से उसे ले जाने से इनकार कर रहे थे। इसका वजन आठ किलो है। हालांकि, डीआरएम इलाहाबाद ने आश्वासन दिया था कि डिवाइस को इंजन में चढ़ाने और उतारने की जिम्मेदारी क्रू कंट्रोलर की होगी, लेकिन स्टाफ की कमी की वजह से ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। एनसीआरएमयू की ड्राइवर यूनियन के नेता विक्रम यादव का कहना है कि सेफ्टी डिवाइस में लिखा है कि पूरी तरह से इसके भरोसे न रहें। कोहरे में ड्राइवरों को सिग्नल देखने में परेशानियां होती हैं, जिसकी वजह से ट्रेनें धीमी चलाई जाती हैं। जब डिवाइस में ही यह लिखा है कि इस पर पूरी तरह से निर्भर न रहें, तो पुरानी व्यवस्था के हिसाब से ही रहना पड़ेगा।
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ट्रेनों के कुछ ड्राइवर फॉग सेफ्टी डिवाइस ले जाने लगे हैं, लेकिन उनकी संख्या बहुत कम है। अधिकतर ड्राइवरों ने डिवाइस ले जाने से अब यह कहकर इनकार करना शुरू कर दिया है कि यह भरोसे योग्य नहीं है। इसके पहले ड्राइवर इस डिवाइस के भार की वजह से उसे ले जाने से इनकार कर रहे थे। इसका वजन आठ किलो है। हालांकि, डीआरएम इलाहाबाद ने आश्वासन दिया था कि डिवाइस को इंजन में चढ़ाने और उतारने की जिम्मेदारी क्रू कंट्रोलर की होगी, लेकिन स्टाफ की कमी की वजह से ऐसा संभव नहीं हो पा रहा है। एनसीआरएमयू की ड्राइवर यूनियन के नेता विक्रम यादव का कहना है कि सेफ्टी डिवाइस में लिखा है कि पूरी तरह से इसके भरोसे न रहें। कोहरे में ड्राइवरों को सिग्नल देखने में परेशानियां होती हैं, जिसकी वजह से ट्रेनें धीमी चलाई जाती हैं। जब डिवाइस में ही यह लिखा है कि इस पर पूरी तरह से निर्भर न रहें, तो पुरानी व्यवस्था के हिसाब से ही रहना पड़ेगा।
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यह ट्रेनें रहीं घंटों लेट
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कोहरे की वजह से कानपुर से आने-जाने वाली लगभग सभी ट्रेनें लेट चल रही हैं। डिब्रूगढ़ से दिल्ली जाने वाली ब्रह्मपुत्र मेल 24 घंटे की देरी से चल रही है। इस ट्रेन को बुधवार रात पौने 11 बजे आना था लेकिन यह ट्रेन 24 घंटे देरी से चल रही है। जय नगर दिल्ली स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एक्सप्रेस 14 घंटे लेट चल रही है। यह ट्रेन सुबह 6:10 के बजाय रात साढ़े आठ बजे आई। सियालदह-अजमेर एक्सप्रेस साढ़े सात घंटे, संगम एक्सप्रेस पौन घंटा, रिवर्स शताब्दी एक्सप्रेस एक घंटे देरी से दिल्ली से कानपुर आई। उद्योगकर्मी एक्सप्रेस सवा चार घंटे, शिवाजी टर्मिनल-गोरखपुर एक्सप्रेस 13 घंटे, साबरमती एक्सप्रेस साढ़े तीन घंटे, पनवेल-गोरखपुर एक्सप्रेस साढ़े नौ घंटे, अवध एक्सप्रेस पांच घंटे, महाबोधि एक्सप्रेस ढाई घंटे देरी से चल रही है।
बोले जिम्मेदार
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उत्तर मध्य रेलवे सीपीआरओ जीके बंसल ने बताया कि फॉग सेफ्टी डिवाइस ड्राइवरों की मदद के लिए है। इस डिवाइस को लगाने का मकसद कोहरे में ड्राइवर को सहूलियत देना है। सिग्नल के बारे में उसे जानकारी मिलती रहेगी। हालांकि ड्राइवरों को पहले की तरह ही सचेत रहना है। मसलन, हवाई जहाज के कॉकपिट में आटो पायलट की सुविधा होने से ड्राइवर की जिम्मेदारी कम नहीं हो जाती है। उसी तरह यह तकनीक भी ड्राइवर को आगाह करती है। इसका विवेकपूर्ण इस्तेमाल किया जाना चाहिए।