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खुशी काफूर, बाघिन पिंजड़े से दूर
ब्यूरो, अमर उजाला कानपुर
Updated Wed, 31 Dec 2014 02:45 AM IST
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पिछले एक माह से कटरी के कन्हवापुर गांव में खुली घूम रही बाघिन ने मंगलवार को भी वन विभाग को झटका दिया। रविवार की रात को पिंजड़े के अंदर तक घूमकर गोश्त खाने वाली चालाक बाघिन पिंजड़े का मैकेनिज्म ऑन होते ही सोमवार की रात को पिंजड़े के अंदर तो दूर उसके आसपास तक नहीं गई।
रविवार की रात को बाघिन के पिंजड़े के अंदर जाने से वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट के अधिकारी काफी खुश थे। उन्हें यकीन था कि वह सोमवार की रात भी पिंजड़े के अंदर आएगी, इसीलिए उन्होंने पिंजड़े का मैकेनिज्म ऑन कर दिया था, लेकिन उन्हें बाघिन ने निराश कर दिया।
वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट के डॉ. सौरभ संघई का इस बाबत कहना है कि सोमवार की रात को ठंड अधिक होने से बाघिन ने शिकार नहीं किया है। गांव में आसपास तक उसके कहीं भी पैरों के ताजा निशान नहीं मिले हैं। लगता है कि बाघिन ने ठंड के चलते कहीं डेरा डाल लिया है।
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आमतौर पर जानवर ऐसा करते हैं। ऐसे में भूख लगने पर ही वो अपने डेरे से उठते हैं। इसलिए हम निराश नहीं है। हमें पता है कि आज नहीं तो कल बाघिन शिकार के लिए पिंजड़े तक जरूर आएगी। इस बार पिंजड़े का मैकेनिज्म सिस्टम आन है, अंदर घुसते ही बाघिन पकड़ में आ जाएगी।
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रविवार की रात को बाघिन के पिंजड़े के अंदर जाने से वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट के अधिकारी काफी खुश थे। उन्हें यकीन था कि वह सोमवार की रात भी पिंजड़े के अंदर आएगी, इसीलिए उन्होंने पिंजड़े का मैकेनिज्म ऑन कर दिया था, लेकिन उन्हें बाघिन ने निराश कर दिया।
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वाइल्ड लाइफ ट्रस्ट के डॉ. सौरभ संघई का इस बाबत कहना है कि सोमवार की रात को ठंड अधिक होने से बाघिन ने शिकार नहीं किया है। गांव में आसपास तक उसके कहीं भी पैरों के ताजा निशान नहीं मिले हैं। लगता है कि बाघिन ने ठंड के चलते कहीं डेरा डाल लिया है।
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आमतौर पर जानवर ऐसा करते हैं। ऐसे में भूख लगने पर ही वो अपने डेरे से उठते हैं। इसलिए हम निराश नहीं है। हमें पता है कि आज नहीं तो कल बाघिन शिकार के लिए पिंजड़े तक जरूर आएगी। इस बार पिंजड़े का मैकेनिज्म सिस्टम आन है, अंदर घुसते ही बाघिन पकड़ में आ जाएगी।