इस राजा ने काटा था मां कर्णा का धड़, खाैलते तेल में खड़े हाेकर करता था पूजा
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कहते हैं मां दुर्गा अपने सभी भक्ताें की प्रार्थना सुनती हैं। सच्चे मन से जिसने भी उन्हें याद किया उसकी मुरादें जरूर पूरी हाेती हैं। मां की इन्हीं शक्तियाें का कायल हुअा एक राजा उन्हें प्रसन्न करने के लिए खाैलते हुए तेल में पूजा करता था। इस राजा की पूजा से प्रसन्न हाेकर मां ने राजा काे वरदान मांगने काे कहा, लेकिन फिर कुछ एेसा हुअा जिसे सुन अाप भी हैरान हाे जाएंगे...
सवा मन साेना वरदान के रूप में देती थीं मां
दरअसल औरैया व जालौन क्षेत्र में करना खेरा पड़ता है। यह राजा करन की नगरी थी। राजा करन भी महाभारत के राजा करन की ही तरह दानवीर थे। वह मां दुर्गा के कर्णा रूप की पूजा करते थे। उनकी भक्ति से मां कर्णा इतना खुश हाे गई थीं की उन्हाेंने राजा काे राेजाना सवा मन सोना देने का वरदान दिया था। इसे राजा अपनी प्रजा में बांट देते थे। यह बात जब दूसरे राज्याें में फैली ताे उज्जैन के राजा विक्रमादित्य भी मां के दर्शन करने यहां अा गए।
खुद भी खड़े हाे गए खाैलते तेल में
राजा विक्रमादित्य ने राजा करन के पूजा करने का तरीका देखा ताे वह हैरान रह गए। राजा करन खाैलते तेल की कढ़ाई में खड़े हाेकर मां की पूजा करते थे। खैर, राजा विक्रमादित्य ने भी यह ठान लिया अाैर उन्हाेंने राजा करन की वेश धारण कर खाैलते तेल की कढ़ाई में खड़े हाेकर पूजा करनी शुरू कर दी। मां यह देख उनसे प्रसन्न हाे गई अाैर उनसे वरदान मांगने काे बाेला। इसपर राजा विक्रमादित्य उन्हें अपने साथ उज्जैन चलने की बात कहने लगे। मां ने इससे इंकार किया ताे राजा ने मां की मूर्ति का धड़ तलवार से काट लिया अाैर उसे उज्जैन लेते गए।
अाैर गुस्से में काट दी मां की मूर्ति