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दुश्मनों के रडार पर नहीं आएंगे विमान
अमर उजाला ब्यूरो/कानपुर
Updated Mon, 08 Feb 2016 01:31 AM IST
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भारतीय लड़ाकू विमान या फिर टोही विमान अब दुश्मनों के रडार पर नहीं आ सकेंगे। इस दिशा में डीएमएसआरडीई के विज्ञानियों ने काम शुरू कर दिया है। आधुनिक तकनीक के पेंट, पॉलिमर, मैटीरियल और डिजाइन इस तरह से बनाए जा रहे हैं, जो तरंगों को आब्जर्व कर लेंगे।
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इससे तरंगे मिलेंगी जरूर, लेकिन दुश्मनों के रडार तक वापस नहीं जाएंगी। इस तरह की तकनीकी अमेरिका, इजराइल और स्वीडन के पास हैं। यह जानकारी डीएमएसआरडीई के साइंटिस्ट टीएस सामी ने दी। वह रविवार को एचबीटीआई के इलेक्ट्रानिक्स इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की दो दिवसीय कार्यशाला ‘टेकएरा’ के समापन समारोह में जानकारी दे रहे थे।
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टेकएरा का समापन समारोह रविवार को हुआ। अंतिम दिन डीएमएसआरडीई के साइंटिस्ट ने कहा कि विमानों में स्टिल्थ टेक्नोलॉजी का प्रयोग किया जा रहा। ऐसा पेंट लगाया जा रहा, जो तरंगों को वापस नहीं भेजेगा।
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डिजाइन भी अपडेट की जा रही है। अब जमाना औद्योगिक और शैक्षिक संस्थानों को मिलकर काम करने का है। एचबीटीआई और डीएमएसआरडीई को भी मिलकर काम करना चाहिए, तभी अच्छे इंजीनियर, साइंटिस्ट तैयार किए जा सकेंगे। एचबीटीआई में पेंट टेक्नोलॉजी की कक्षाएं भी लगती हैं। इस दिशा में अभी तक काम नहीं हुआ।
अमेरिका सहित तमाम विकसित देशों में भारतीय साइंटिस्ट काम कर रहे हैं। अच्छा रिजल्ट भी है लेकिन भारत में ऐसा नहीं हो पा रहा। इसकी मुख्य वजह औद्योगिक इकाइयों की शैक्षिक संस्थानों से दूरी है।
इलेक्ट्रानिक्स विभागाध्यक्ष डॉ. रचना अस्थाना, संयोजक रजनी विष्ट, डॉ. कृष्ण राज और डॉ. मनोज शुक्ला ने भी एयरो प्लेन की कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी पर चर्चा की। इससे पहले 13 टेक्निकल इवेंट हुए और इनके विजेताओं को सम्मानित किया गया।
टेक्निकल इवेंट के रिजल्ट (फर्स्ट और सेकेंड)
रोबोवार
एकता यादव
आकाश गुप्ता
मार्स रोवर
विशाल मिश्रा
शुभम कुमार
माइंड स्पार्क
विश्वेंद्र नागर
दिव्यांश अग्रवाल
पोस्टर प्रजेंटेशन
पारूल चंदेल
श्वेता सिंह
वॉटर रॉकेट
पुनीत त्रिपाठी
कनिका और अदिति सिंह
सुपर कंडक्टर बचाएगा बिजली, लाइन लॉस होगा कम
कानपुर। सुपर कंडक्टर लगाकर बिजली बचाई जा सकती है। इस तकनीक को रूम टेंपरेचर (30-40 डिग्री सेल्सियस) पर लाने की कोशिश चल रही है। सफलता मिली तो लाइन लॉस कम हो जाएगा।
यह जानकारी रविवार को आईआईटी में फिजिक्स के प्रो. बुरानी ने दी। वे फिजिक्स की तीन दिवसीय (5 से 7 फरवरी) कार्यशाला के समापन के दौरान बोल रहे थे। आउटरिच आडिटोरियम में रविवार को सम्मानित प्रोफेसर जगदिश्वर मोहंती फिजिक्स लेक्चर सिरीज का समापन हुआ।
अंतिम दिन फिजिक्स के प्रो. बुरानी ने कहा कि सुपर कंडक्टविटी की मदद से 260 केल्विन यानी माइनस 160 सेंटीग्रेड टेंपरेचर बनाया जा सका है। इसे अब रूम टेंपरेचर के बराबर लाने की कोशिश है।
कॉपर वायर की जगह सुपर कंडक्टर लगाकर बिजली बचाने की तकनीक भी बनाई जा रही है। बिजली इस्तेमाल में सुपर कंडक्टर का प्रयोग बड़ा बदलाव लाएगा। भारत सहित दुनिया भर को बिजली संकट से निजात मिल सकेगी।