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Kanpur News: जिले के सरकारी अस्पतालों में नहीं है एमआरआई जांच की सुविधा
Wed, 27 Aug 2025 12:11 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Wed, 27 Aug 2025 12:11 AM IST
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बांदा। जिले के सरकारी अस्पतालों में एमआरआई जांच की सुविधा न होने से लोगों को प्राइवेट में अपनी एमआरआई जांच करानी पड़ती है। सरकारी अस्पताल में जहां यह जांच एक रुपये के पर्चे में निशुल्क हो सकती है, वहीं प्राइवेट में यह जांच पांच हजार से लेकर 20 हजार तक की होती है। यह जांच ऐसे मरीजों की कराई जाती है, जिस मरीज के अल्ट्रासाउंड, एक्सरे व सीटी में मर्ज का पता नहीं चल पाता है।
जिले के तीन बड़े सरकारी अस्पतालों जिला पुरुष अस्पताल, जिला महिला अस्पताल व रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में एमआरआई जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। मजबूर होकर जिले के मरीजों को प्राइवेट में या फिर कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज आदि शहरों में जाकर इस जांच को कराना मजबूर होता है। जिला अस्पताल में तैनात वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. विनीत सचान ने बताया कि एमआरआई जांच से शरीर के आंतरिक अंग पेट, छाती, और पेल्विक के अंग जैसे यकृत, गुर्दा, अग्नाशय, ह्दय, गर्भाशय, प्रोस्टेट, मूत्राशय आदि अदरूनी हिस्सों की जांच की जाती है। इसके अलावा मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी, चोट, ट्यूमर या अन्य तंत्रिका संबंधी रोगों की जांच करके निदान किया जाता है। टेंडन, लिगामेंट, कार्टिलेज, या मांसपेशियों को होने वाली चोटों, सूजन या क्षति का पता लगाया जा सकता है, जो एक्स-रे में दिखाई नहीं देती हैं। प्राइवेट में यह जांच पांच हजार से लेकर 20 हजार तक रुपये की है। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में यह जांच सुविधा उपलब्ध कराने के लिए शासन को पत्राचार किया गया है। हालांकि अब तक किसी भी सरकारी अस्पताल में यह सुविधा मरीजों को नहीं मिल रही है।
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वर्जन
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एमआरआई जांच के लिए शासन को पत्राचार किया गया है। मेडिकल कॉलेज की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। जल्द ही एमआरआई जांच की सुविधा मरीजों को मिलेगी।
डॉ. एसके कौशल,प्रधानाचार्य, रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बांदा।
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क्या है एमआरआई जांच
एमआरआई (चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग) शरीर के अंदर की विस्तृत और स्पष्ट तस्वीरें लेने के लिए एक गैर-आक्रामक इमेजिंग तकनीक है, जिसका उपयोग रोगों का पता लगाने, निदान करने, उपचार की योजना बनाने और इलाज की निगरानी के लिए किया जाता है। यह शक्तिशाली चुंबक, रेडियो तरंगों और कंप्यूटर का उपयोग करता है और विकिरण का उपयोग नहीं करता। एमआरआई से अंगों, हड्डियों, मांसपेशियों, रक्त वाहिकाओं, जोड़ों और ऊतकों जैसी आंतरिक संरचनाओं की सटीक जानकारी मिलती है, जो एक्स-रे या अन्य तरीकों से नहीं मिल पाती है।
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मुशर्रफ खां
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जिले के तीन बड़े सरकारी अस्पतालों जिला पुरुष अस्पताल, जिला महिला अस्पताल व रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में एमआरआई जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं है। मजबूर होकर जिले के मरीजों को प्राइवेट में या फिर कानपुर, लखनऊ, प्रयागराज आदि शहरों में जाकर इस जांच को कराना मजबूर होता है। जिला अस्पताल में तैनात वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. विनीत सचान ने बताया कि एमआरआई जांच से शरीर के आंतरिक अंग पेट, छाती, और पेल्विक के अंग जैसे यकृत, गुर्दा, अग्नाशय, ह्दय, गर्भाशय, प्रोस्टेट, मूत्राशय आदि अदरूनी हिस्सों की जांच की जाती है। इसके अलावा मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी, चोट, ट्यूमर या अन्य तंत्रिका संबंधी रोगों की जांच करके निदान किया जाता है। टेंडन, लिगामेंट, कार्टिलेज, या मांसपेशियों को होने वाली चोटों, सूजन या क्षति का पता लगाया जा सकता है, जो एक्स-रे में दिखाई नहीं देती हैं। प्राइवेट में यह जांच पांच हजार से लेकर 20 हजार तक रुपये की है। रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज में यह जांच सुविधा उपलब्ध कराने के लिए शासन को पत्राचार किया गया है। हालांकि अब तक किसी भी सरकारी अस्पताल में यह सुविधा मरीजों को नहीं मिल रही है।
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एमआरआई जांच के लिए शासन को पत्राचार किया गया है। मेडिकल कॉलेज की ओर से शासन को प्रस्ताव भेजा गया है। जल्द ही एमआरआई जांच की सुविधा मरीजों को मिलेगी।
डॉ. एसके कौशल,प्रधानाचार्य, रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज, बांदा।
क्या है एमआरआई जांच
एमआरआई (चुंबकीय अनुनाद इमेजिंग) शरीर के अंदर की विस्तृत और स्पष्ट तस्वीरें लेने के लिए एक गैर-आक्रामक इमेजिंग तकनीक है, जिसका उपयोग रोगों का पता लगाने, निदान करने, उपचार की योजना बनाने और इलाज की निगरानी के लिए किया जाता है। यह शक्तिशाली चुंबक, रेडियो तरंगों और कंप्यूटर का उपयोग करता है और विकिरण का उपयोग नहीं करता। एमआरआई से अंगों, हड्डियों, मांसपेशियों, रक्त वाहिकाओं, जोड़ों और ऊतकों जैसी आंतरिक संरचनाओं की सटीक जानकारी मिलती है, जो एक्स-रे या अन्य तरीकों से नहीं मिल पाती है।
मुशर्रफ खां