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Kanpur News: जिला अस्पताल और पैरामेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में आग बुझाने के इंतजाम नहीं
Sun, 17 Nov 2024 01:53 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Sun, 17 Nov 2024 01:53 AM IST
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फोटो 25 से फोटो 28
- 2008 में बने जिला संयुक्त चिकित्सालय को अभी तक नहीं मिल सकी एनओसी
- मेडिकल कॉलेज और पैरामेडिकल कॉलेज में सात साल पहले उपकरण लगवाए थे, आज तक नहीं हुई टेस्टिंग
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। जिला अस्पताल और आयुर्विज्ञान विवि के पैरामेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में आग बुझाने के इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में किसी भी तरह के अग्निकांड होने पर मरीजों, तीमारदारों और छात्रों की जान बचाना मुश्किल होगा। हैरत की बात यह है कि संयुक्त चिकित्सालय 2008 में शुरू होने के बाद से आज तक एनओसी नहीं मिल सकी है।
झांसी मेडिकल कॉलेज के एनआईसीयू वार्ड में आग लगने से 10 मासूमों की जान चली गई। इस हादसे के बाद शनिवार को अमर उजाला की ओर से जिला अस्पताल और आयुर्विज्ञान विवि के अग्निमश्मन उपकरणों की पड़ताल की गई तो जिला संयुक्त चिकित्सालय में आग बुझाने के इंतजाम नहीं मिले।
संयुक्त चिकित्सालय शुरू होने के बाद से आज तक एनओसी नहीं मिल सकी है। वहीं यही स्थिति आयुर्विज्ञान विवि के हॉस्टल की है। यहां भी आग बुझाने के इंतजाम न होने की वजह से अग्निशमन विभाग ने एनओसी नहीं दी है। ऐसे में जिला संयुक्त चिकित्सालय में संचालित पुरुष और महिला अस्पताल में यदि हादसा होता है तो कई लोग चपेट में आ सकते हैं।
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बता दें कि प्रतिदिन ओपीडी में दिखाने आने वाले जिला पुरुष और महिला अस्पताल में दो हजार मरीजों, वहीं दोनों अस्पतालों में भर्ती मरीज और उनके तीमारदार समेत लगभग पांच सौ लोग रहते हैं। हादसा होने पर यहां आग बुझाने के लिए सिर्फ छोटे सिलिंडर रखे हैं, जो नाकाफी होंगे।
मेडिकल कॉलेज और पैरामेडिकल कॉलेज में लगभग सात साल पहले आग बुझाने के करोड़ों रुपये के उपकरण लगवाए थे। सूत्रों के अनुसार, उस समय टेस्टिंग होने के बाद से आज तक कभी दोबारा टेस्टिंग नहीं कराई गई है। ऐसे में इन उपकरणों का मेंटीनेस नहीं हो सका और यह कबाड़ हो गए।
पुरुष अस्पताल में उपकरण ही नहीं लगे, महिला अस्पताल के उपकरण हो गए खराब
जिला पुरुष अस्पताल में उपकरण न लग पाने की वजह से कोई इंतजाम ही नहीं है। इमरजेंसी और ओपीडी में सिर्फ सिलिंडर के भरोसे आग बुझाने के इंतजाम हैं। वहीं, महिला अस्पताल की नई बनी 100 शैया बिल्डिंग में पांच हाईडेंट तो लगाए गए हैं, लेकिन किसी का कहीं पाइप निकला हुआ तो कहीं पैनल खाली पड़े हैं। इनकी पाइप लाइनों को टंकी से भी नहीं जोड़ा गया है। यहां पर भी अंदर बिल्डिंग में कुछ सिलेंडरों के सहारे व्यवस्था है।
इंतजाम अधूरे होने पर नहीं दी जा रही एनओसी
प्रभारी अग्निशमन विभाग पुलिस लाइन सनत पटेल ने बताया कि जिला संयुक्त चिकित्सालय में आग बुझाने के इंतजाम पूरे नहीं हैं। इसलिए एनओसी नहीं दी गई है। फिलहाल किसी कंपनी को उपकरण लगाने की जानकारी मिली है। जैसे ही पूरे उपकरण लग जाएंगे एनओसी दे दी जाएगी।
पैरामेडिकल कॉलेज में छात्रों की जान खतरे में, आग बुझाने के नहीं कोई इंतजाम
सैफई। सैफई आयुर्विज्ञान विवि में बने पैरामेडिकल कॉलेज के पुरुष और महिला हॉस्टल में फायर अलार्म खराब पड़े हैं। सिलिंडर भी कबाड़ हो गए हैं। हाइडेंट बॉक्सों में पानी का डालने का पाइप ही गायब हो चुका है। अधिकांश सिलिंडर खराब हैं। बचे हुए जो सिलिंडर सही और भरे भी हैं उनके पाइप गायब होने से वह बेकार हो चुके हैं। बताया हर साल पूरे परिसर में आग की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के लिए शासन 2024 में बजट बढ़ाया गया और 25 लाख से अब 40 लाख कर सालाना का बजट भी खर्च दिखाया जाता है। पुरुष और महिला हॉस्टल में इंतजाम ध्वस्त पड़े हैं। इन दोनों हॉस्टलों में लगभग ढाई हजार छात्र-छात्राएं रह रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज का विद्युत पैनल भी खराब
मेडिकल कॉलेज में टिनशेड पार्किंग के पाास बने विद्युत पैनल भी लंबे समय से खराब है। ऐसे में यदि मेडिकल कॉलेज में आग लगी तो पंप तेजी से पानी नहीं फेंक सकेगा और आग काबू करना मुश्किल हो जाएगा। इस स्थिति में लैब में जांच कराने आने वाले मरीजों, स्टाफ और यहीं न्यू कैंपस में बने वरिष्ठ चिकित्सकों की जान खतरे में पड़ सकती है। वहीं पैरामेडिकल कॉलेज में स्थित फायर पंप रूम पर ताला लटकता हुआ मिला, जबकि वहां पर 24 घंटे किसी न किसी कर्मचारी को रहना आवश्यक होता है।
वर्जन
पैरामेडिकल कॉलेज की फायर संबंधी अव्यवस्थाओं की जानकारी की जाएगी। संबंधित जिम्मेदारों को तत्काल व्यवस्था दुरुस्त कराने के निर्देश दिए जाएंगे। पिछले वर्ष ओपीडी ट्रामा सेंटर की एनओसी प्राप्त हुई है। मेडिकल कॉलेज एवं पैरामेडिकल कॉलेज का भी ऑडिट कराया जा रहा है। - डॉ. चंद्रवीर सिंह, प्रभारी कुलसचिव
यूपीसीएल को मिला काम, जल्द उपकरण लगने का किया जा रहा दावा
सीएमएस डॉ. एमएम आर्या ने बताया कि उपकरण लगवाने के लिए कई बार पत्राचार किया जा चुका है। अभी हाल में हुए पत्राचार के बाद यूपीसीएल को अस्पताल में सभी उपकरण लगाने का काम दे दिया गया है। इसके लिए बजट भी सरकार से कंपनी को मिल गया है। उम्मीद है जल्द काम शुरू हो जाएगा। इसके बाद एनओसी मिल जाएगी। फिलहाल पर्याप्त सिलिंडरों की व्यवस्था अस्पताल में है।
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- 2008 में बने जिला संयुक्त चिकित्सालय को अभी तक नहीं मिल सकी एनओसी
- मेडिकल कॉलेज और पैरामेडिकल कॉलेज में सात साल पहले उपकरण लगवाए थे, आज तक नहीं हुई टेस्टिंग
संवाद न्यूज एजेंसी
इटावा। जिला अस्पताल और आयुर्विज्ञान विवि के पैरामेडिकल कॉलेज के हॉस्टल में आग बुझाने के इंतजाम नहीं हैं। ऐसे में किसी भी तरह के अग्निकांड होने पर मरीजों, तीमारदारों और छात्रों की जान बचाना मुश्किल होगा। हैरत की बात यह है कि संयुक्त चिकित्सालय 2008 में शुरू होने के बाद से आज तक एनओसी नहीं मिल सकी है।
झांसी मेडिकल कॉलेज के एनआईसीयू वार्ड में आग लगने से 10 मासूमों की जान चली गई। इस हादसे के बाद शनिवार को अमर उजाला की ओर से जिला अस्पताल और आयुर्विज्ञान विवि के अग्निमश्मन उपकरणों की पड़ताल की गई तो जिला संयुक्त चिकित्सालय में आग बुझाने के इंतजाम नहीं मिले।
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संयुक्त चिकित्सालय शुरू होने के बाद से आज तक एनओसी नहीं मिल सकी है। वहीं यही स्थिति आयुर्विज्ञान विवि के हॉस्टल की है। यहां भी आग बुझाने के इंतजाम न होने की वजह से अग्निशमन विभाग ने एनओसी नहीं दी है। ऐसे में जिला संयुक्त चिकित्सालय में संचालित पुरुष और महिला अस्पताल में यदि हादसा होता है तो कई लोग चपेट में आ सकते हैं।
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बता दें कि प्रतिदिन ओपीडी में दिखाने आने वाले जिला पुरुष और महिला अस्पताल में दो हजार मरीजों, वहीं दोनों अस्पतालों में भर्ती मरीज और उनके तीमारदार समेत लगभग पांच सौ लोग रहते हैं। हादसा होने पर यहां आग बुझाने के लिए सिर्फ छोटे सिलिंडर रखे हैं, जो नाकाफी होंगे।
मेडिकल कॉलेज और पैरामेडिकल कॉलेज में लगभग सात साल पहले आग बुझाने के करोड़ों रुपये के उपकरण लगवाए थे। सूत्रों के अनुसार, उस समय टेस्टिंग होने के बाद से आज तक कभी दोबारा टेस्टिंग नहीं कराई गई है। ऐसे में इन उपकरणों का मेंटीनेस नहीं हो सका और यह कबाड़ हो गए।
पुरुष अस्पताल में उपकरण ही नहीं लगे, महिला अस्पताल के उपकरण हो गए खराब
जिला पुरुष अस्पताल में उपकरण न लग पाने की वजह से कोई इंतजाम ही नहीं है। इमरजेंसी और ओपीडी में सिर्फ सिलिंडर के भरोसे आग बुझाने के इंतजाम हैं। वहीं, महिला अस्पताल की नई बनी 100 शैया बिल्डिंग में पांच हाईडेंट तो लगाए गए हैं, लेकिन किसी का कहीं पाइप निकला हुआ तो कहीं पैनल खाली पड़े हैं। इनकी पाइप लाइनों को टंकी से भी नहीं जोड़ा गया है। यहां पर भी अंदर बिल्डिंग में कुछ सिलेंडरों के सहारे व्यवस्था है।
इंतजाम अधूरे होने पर नहीं दी जा रही एनओसी
प्रभारी अग्निशमन विभाग पुलिस लाइन सनत पटेल ने बताया कि जिला संयुक्त चिकित्सालय में आग बुझाने के इंतजाम पूरे नहीं हैं। इसलिए एनओसी नहीं दी गई है। फिलहाल किसी कंपनी को उपकरण लगाने की जानकारी मिली है। जैसे ही पूरे उपकरण लग जाएंगे एनओसी दे दी जाएगी।
पैरामेडिकल कॉलेज में छात्रों की जान खतरे में, आग बुझाने के नहीं कोई इंतजाम
सैफई। सैफई आयुर्विज्ञान विवि में बने पैरामेडिकल कॉलेज के पुरुष और महिला हॉस्टल में फायर अलार्म खराब पड़े हैं। सिलिंडर भी कबाड़ हो गए हैं। हाइडेंट बॉक्सों में पानी का डालने का पाइप ही गायब हो चुका है। अधिकांश सिलिंडर खराब हैं। बचे हुए जो सिलिंडर सही और भरे भी हैं उनके पाइप गायब होने से वह बेकार हो चुके हैं। बताया हर साल पूरे परिसर में आग की व्यवस्थाएं दुरुस्त करने के लिए शासन 2024 में बजट बढ़ाया गया और 25 लाख से अब 40 लाख कर सालाना का बजट भी खर्च दिखाया जाता है। पुरुष और महिला हॉस्टल में इंतजाम ध्वस्त पड़े हैं। इन दोनों हॉस्टलों में लगभग ढाई हजार छात्र-छात्राएं रह रहे हैं।
मेडिकल कॉलेज का विद्युत पैनल भी खराब
मेडिकल कॉलेज में टिनशेड पार्किंग के पाास बने विद्युत पैनल भी लंबे समय से खराब है। ऐसे में यदि मेडिकल कॉलेज में आग लगी तो पंप तेजी से पानी नहीं फेंक सकेगा और आग काबू करना मुश्किल हो जाएगा। इस स्थिति में लैब में जांच कराने आने वाले मरीजों, स्टाफ और यहीं न्यू कैंपस में बने वरिष्ठ चिकित्सकों की जान खतरे में पड़ सकती है। वहीं पैरामेडिकल कॉलेज में स्थित फायर पंप रूम पर ताला लटकता हुआ मिला, जबकि वहां पर 24 घंटे किसी न किसी कर्मचारी को रहना आवश्यक होता है।
वर्जन
पैरामेडिकल कॉलेज की फायर संबंधी अव्यवस्थाओं की जानकारी की जाएगी। संबंधित जिम्मेदारों को तत्काल व्यवस्था दुरुस्त कराने के निर्देश दिए जाएंगे। पिछले वर्ष ओपीडी ट्रामा सेंटर की एनओसी प्राप्त हुई है। मेडिकल कॉलेज एवं पैरामेडिकल कॉलेज का भी ऑडिट कराया जा रहा है। - डॉ. चंद्रवीर सिंह, प्रभारी कुलसचिव
यूपीसीएल को मिला काम, जल्द उपकरण लगने का किया जा रहा दावा
सीएमएस डॉ. एमएम आर्या ने बताया कि उपकरण लगवाने के लिए कई बार पत्राचार किया जा चुका है। अभी हाल में हुए पत्राचार के बाद यूपीसीएल को अस्पताल में सभी उपकरण लगाने का काम दे दिया गया है। इसके लिए बजट भी सरकार से कंपनी को मिल गया है। उम्मीद है जल्द काम शुरू हो जाएगा। इसके बाद एनओसी मिल जाएगी। फिलहाल पर्याप्त सिलिंडरों की व्यवस्था अस्पताल में है।