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Exclusive: कानपुर में डायबिटीज टाइप-5 के 15 हजार मरीज, पैदाइशी कुपोषण से होती है यह बीमारी

Mon, 21 Apr 2025 11:09 AM IST
शिखा पांडेय रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर
रजा शास्त्री, अमर उजाला, कानपुर Published by: शिखा पांडेय Updated Mon, 21 Apr 2025 11:09 AM IST
सार

Kanpur News: इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन ने रोग की श्रेणी को मान्यता दी है। मल्टी सुपर स्पेशियलिटी के इंडोक्रोनोलॉजी विभाग में रोगियों का डाटा बैंक बनेगा।

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There are 15 thousand patients of diabetes type-5 in Kanpur, this disease is caused by congenital malnutrition
डायबिटीज की जांच - फोटो : UNICEF

विस्तार

पैदाइशी कुपोषण के कारण पूरी क्षमता से काम करने की युवावस्था में डायबिटीज टाइप-5 हो रही है। शहर में करीब 15 हजार मरीज इस बीमारी का शिकार हैं। इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन (आईडीएफ) ने डायबिटीज टाइप-5 को मान्यता दे दी है। हैलट के मल्टी सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल एंड पीजीआई के इंडोक्रोनोलॉजी विभाग में डायबिटीज टाइप-5 के रोगियों का डाटा बैंक बनाने की तैयारी शुरू हो गई। 
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विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज टाइप-5 टाइप-2 से मिलती-जुलती है। टाइप-5 से ग्रसित होने वाला रोगी दुबला-पतला होता है, फिर भी उसका ब्लड शुगर लेवल हाई रहता है। रोगी में इंसुलिन की कमी होती है। रोगी ज्यादा की जगह कम भोजन करता है। खास बात यह कि रोगियों का आयु वर्ग 20 से 25 साल के बीच होता है। इंडोक्राइन क्लीनिक के नोडल और मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ. विशाल कुमार गुप्ता ने बताया कि जो बच्चे कम वजन के पैदा होते हैं, कुपोषित होते हैं, उनमें डायबिटीज टाइप-5 होने का खतरा रहता है। बड़े होने पर उनमें भले ही मोटापा न हो, फिर भी इंसुलिन की कमी हो जाती है।
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डॉ. गुप्ता ने बताया कि आईडीएफ ने डायबिटीज टाइप-5 को वर्गीकृत कर दिया है। इंडोक्राइन क्लीनिक में आने वाले इस श्रेणी के रोगियों के आंकड़े जुटाए जाएंगे और डाटा बैंक बनेगा। इससे डायबिटीज की इस श्रेणी में शोध कार्य किया जा सकेगा। इस श्रेणी के रोगी अभी भी आते हैं लेकिन उन्हें सामान्य डायबिटीज रोगियों की श्रेणी में ही रखा जाता है। हैलट के इंडोक्रोनोलॉजी विभाग के पूर्व प्रभारी और इस समय एसजीपीजीआई लखनऊ के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. शिवेंद्र वर्मा ने बताया कि डायबिटीज के कुल रोगियों में इस श्रेणी के रोगियों की संख्या पांच से 10 प्रतिशत होती है। इस श्रेणी पर अब विस्तृत शोध कार्य शुरू किए जाएंगे। शहर के विभिन्न अस्पतालों में डायबिटीज रोगियों की संख्या डेढ़ लाख है।
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पहला रोगी वर्ष 1955 में मिला था

डॉ. विशाल कुमार गुप्ता ने बताया कि टाइप-5 डायबिटीज का पहला रोगी वर्ष 1955 में अफ्रीकी देश जमैका में मिला था। इसके बाद विश्व स्वास्थ्य संगठन ने वर्ष 1985 में इस संबंध में रिपोर्ट दी कि पैदाइशी कुपोषण से नई तरह की डायबिटीज हो रही है लेकिन तब यह डायबिटीज वर्गीकृत नहीं हुई थी। इसकी टाइप तय नहीं थी। इसी माह अप्रैल में बैंकाॅक में आईडीएफ के अध्यक्ष पीटर स्वार्ट्स ने इसे मान्यता दे दी। अब यह मामला जून में शिकागो में होने वाली अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन की कॉन्फ्रेंस में रखा जाएगा। डायबिटीज टाइप-5 के रोगियों की संख्या भारत, श्रीलंका, बांग्लादेश, युगांडा, इथोपिया आदि देशों में अधिक है।

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