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Kanpur News: सूखे पड़े हैं तालाब, प्यास लगने पर पशु-पक्षी बेहाल
Thu, 01 May 2025 12:48 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
संवाद न्यूज एजेंसी, कानपुर
Updated Thu, 01 May 2025 12:48 AM IST
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खमहैला में सूखा तालाब।
- फोटो : संवाद
झींझक। तेज धूप की वजह से गर्मी बढ़ गई है। इधर ब्लाॅक क्षेत्र के गांवों में तालाबों में पानी नहीं है। सूखे तालाब की वजह से प्यास लगने पर पशु-पक्षी बेहाल होते हैं। नहर भी सूखी हैं तो तालाब में पानी नहीं भराया जा पा रहा है।
ब्लॉक के खमहैला, चिरखरी, लगरथा, औरंगाबाद आदि गांवों में तालाब हैं। मगर अधिकांश तालाब सूखे पड़े हैं। कुछ में तली में ही पानी बचा है। तेज धूप की वजह से पड़ रही गर्मी में तली में बचे पानी वाले तालाब सूखने की कगार पर हैं। सूख चुके तालाबों की तली में घास उग गई है। बिन जल सूने पड़े तालाब से जल संरक्षण की मंशा धराशायी हो रही है।
लोगों का आरोप है कि लाखों खर्च कर बनाए गए तालाबों में पानी भरा हो इसके लिए जिम्मेदार संजीदा नहीं हैं। प्यास लगने पर पशु व पक्षी इधर उधर भटकते हैं। अप्रैल में क्षेत्र के करीब पचास फीसदी तालाब सूख चुके हैं। जलाशय में पक्षी प्यास बुझाने के लिए आते हैं मगर यहां पानी न होने पर मायूस होकर उड़ जाते हैं। लगरथा के अजय, औरंगाबाद के पुष्पेंद्र ने बताया कि गांवों में तालाब सूखे पड़े है, लेकिन जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। एडीओ पंचायत झींझक उमाशंकर ने बताया कि ग्राम सचिवों से तालाबों में नहर से पानी को भरवाने को कहा गया है।
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ब्लॉक के खमहैला, चिरखरी, लगरथा, औरंगाबाद आदि गांवों में तालाब हैं। मगर अधिकांश तालाब सूखे पड़े हैं। कुछ में तली में ही पानी बचा है। तेज धूप की वजह से पड़ रही गर्मी में तली में बचे पानी वाले तालाब सूखने की कगार पर हैं। सूख चुके तालाबों की तली में घास उग गई है। बिन जल सूने पड़े तालाब से जल संरक्षण की मंशा धराशायी हो रही है।
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लोगों का आरोप है कि लाखों खर्च कर बनाए गए तालाबों में पानी भरा हो इसके लिए जिम्मेदार संजीदा नहीं हैं। प्यास लगने पर पशु व पक्षी इधर उधर भटकते हैं। अप्रैल में क्षेत्र के करीब पचास फीसदी तालाब सूख चुके हैं। जलाशय में पक्षी प्यास बुझाने के लिए आते हैं मगर यहां पानी न होने पर मायूस होकर उड़ जाते हैं। लगरथा के अजय, औरंगाबाद के पुष्पेंद्र ने बताया कि गांवों में तालाब सूखे पड़े है, लेकिन जिम्मेदार ध्यान नहीं दे रहे हैं। एडीओ पंचायत झींझक उमाशंकर ने बताया कि ग्राम सचिवों से तालाबों में नहर से पानी को भरवाने को कहा गया है।
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