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Kanpur News: पुलिस और स्वास्थ्य विभाग मां का हाथ नष्ट करने का बना रहा दबाव
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कानपुर। आईटीबीपी जवान विकास सिंह ने कृष्णा हॉस्पिटल के जिम्मेदारों पर कार्रवाई होने तक मां का हाथ सुरक्षित रखने की बात कही। उनके मुताबिक पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी उन पर कटा हुआ हाथ नष्ट करने को लेकर दबाव बना रहे हैं लेकिन वह ऐसा होने नहीं देंगे। किसी भी कीमत पर साक्ष्य नष्ट नहीं होगा। मां निर्मला देवी के हाथ को सुरक्षित रखने के लिए पारस हॉस्पिटल प्रबंधन से बात की है। अभी डीप फ्रीजर में सुरक्षित किया है।
विकास सिंह के मुताबिक पिता मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। मां ही उनकी देखभाल कर रही थीं। अब उनका हाथ भी अस्पताल के जिम्मेदारों की वजह से नष्ट हो गया है। बहन की पहले मौत हो चुकी है। घर में छोटा भाई है। बताया पुलिस कमिश्नर से मुलाकात हुई है। उन्होंने रेलबाजार थाने को एफआईआर के लिए निर्देशित किया है। सीएमओ को जल्द से जल्द रिपोर्ट देने के लिए कहा है। तब तक मां के हाथ को सुरक्षित तरीके से रखा जाएगा। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को जांच करानी चाहिए कि आखिर किस तरह की लापरवाही हुई, जिससे हाथ काटने की नौबत आई।
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12 घंटे में खराब हुआ था मां का हाथ
विकास सिंह ने अमर उजाला से हुई बातचीत में बताया कि 13 मई की शाम करीब छह से सात बजे के बीच उन्होंने मां को कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। चेस्ट रोग विशेषज्ञ और फीजीशियन मां को देख रहे थे। उन्होंने आईसीयू में शिफ्ट कर दिया। रात करीब नौ बजे उनके कहा गया कि मां की हालत ठीक नहीं है। वेंटिलेटर पर रखना पड़ेगा। कुछ देर बाद बताया कि मां की तबीयत ठीक है। सांस लेने में कोई दिक्कत नहीं है। वेंटिलेटर पर रखने की आवश्यकता नहीं है। 14 मई की सुबह करीब सात बजे वह मां को देखने आईसीयू गए तो उनके दाहिने हाथ में सूजन थी। वह दर्द बता रही थीं। डॉक्टर ने कहा कि ठीक हो जाएगा। 14 मई को उन्हें पारस हॉस्पिटल में भर्ती कराया। वहां के डॉक्टरों ने देखकर बताया कि कलाई से ब्लड सर्कुलेशन नहीं हो रहा है। 15 मई को कलाई के पास और सूजन आ गई। 17 मई को मां का हाथ काटना पड़ा।-- -- -- -- -- -- -- -- -
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तीन साल पहले आए हैं शहर
आईटीबीपी जवान तीन साल पहले ही शहर में आए हैं। वह परिवार के साथ महाराजपुर की बटालियन के आवास में रह रहे हैं। इससे पूर्व तीन साल तक छत्तीसगढ़ में तैनात थे। उनका चयन 2011 में आईटीबीपी में हुआ। सैन्य कर्मी विकास सिंह का कहना है कि न्याय के लिए वह मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक भी जाएंगे।
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विकास सिंह के मुताबिक पिता मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं। मां ही उनकी देखभाल कर रही थीं। अब उनका हाथ भी अस्पताल के जिम्मेदारों की वजह से नष्ट हो गया है। बहन की पहले मौत हो चुकी है। घर में छोटा भाई है। बताया पुलिस कमिश्नर से मुलाकात हुई है। उन्होंने रेलबाजार थाने को एफआईआर के लिए निर्देशित किया है। सीएमओ को जल्द से जल्द रिपोर्ट देने के लिए कहा है। तब तक मां के हाथ को सुरक्षित तरीके से रखा जाएगा। पुलिस और स्वास्थ्य विभाग को जांच करानी चाहिए कि आखिर किस तरह की लापरवाही हुई, जिससे हाथ काटने की नौबत आई।
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12 घंटे में खराब हुआ था मां का हाथ
विकास सिंह ने अमर उजाला से हुई बातचीत में बताया कि 13 मई की शाम करीब छह से सात बजे के बीच उन्होंने मां को कृष्णा हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। चेस्ट रोग विशेषज्ञ और फीजीशियन मां को देख रहे थे। उन्होंने आईसीयू में शिफ्ट कर दिया। रात करीब नौ बजे उनके कहा गया कि मां की हालत ठीक नहीं है। वेंटिलेटर पर रखना पड़ेगा। कुछ देर बाद बताया कि मां की तबीयत ठीक है। सांस लेने में कोई दिक्कत नहीं है। वेंटिलेटर पर रखने की आवश्यकता नहीं है। 14 मई की सुबह करीब सात बजे वह मां को देखने आईसीयू गए तो उनके दाहिने हाथ में सूजन थी। वह दर्द बता रही थीं। डॉक्टर ने कहा कि ठीक हो जाएगा। 14 मई को उन्हें पारस हॉस्पिटल में भर्ती कराया। वहां के डॉक्टरों ने देखकर बताया कि कलाई से ब्लड सर्कुलेशन नहीं हो रहा है। 15 मई को कलाई के पास और सूजन आ गई। 17 मई को मां का हाथ काटना पड़ा।
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तीन साल पहले आए हैं शहर
आईटीबीपी जवान तीन साल पहले ही शहर में आए हैं। वह परिवार के साथ महाराजपुर की बटालियन के आवास में रह रहे हैं। इससे पूर्व तीन साल तक छत्तीसगढ़ में तैनात थे। उनका चयन 2011 में आईटीबीपी में हुआ। सैन्य कर्मी विकास सिंह का कहना है कि न्याय के लिए वह मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री तक भी जाएंगे।