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Kanpur News: जून में वादी की माैत, विवेचक ने अगस्त में कर ली मुलाकात

Mon, 07 Jul 2025 01:50 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Mon, 07 Jul 2025 01:50 AM IST
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The plaintiff died in June, the investigator met him in August
कानपुर। फर्जी आवंटी बनकर मकान की रजिस्ट्री कराने के मामले में कोर्ट के आदेश पर एक महिला पर एफआईआर लिख ली गई लेकिन विवेचना में लापरवाही बरती गई। जून में वादी मुकदमा की मौत हो गई। विवेचक ने केस डायरी में वादी मुकदमा से अगस्त में मिलने की बात लिख दी। विवेचना में लापरवाही बरतने और थाने में बैठकर ही केस डायरी लिखने को गंभीर अपराध मानते हुए सीजेएम सूरज मिश्रा ने विवेचक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश पुलिस कमिश्नर को दिए हैं।
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बर्रा विश्वबैंक निवासी मुकेश मिश्रा ने मूल आवंटी आसमां खातून से केडीए का प्लाॅट वर्ष 1995 में खरीदा था। वह यहां मकान बनवाकर परिवार सहित रहने लगे। मूल कागजात जल जाने के कारण वह केडीए से फ्री होल्ड नहीं करा सके। इसी बीच एक महिला ने आसमां खातून बनकर फर्जी पते व पहचान पत्र के जरिए केडीए से नवंबर 2019 में अपने नाम फ्री होल्ड रजिस्ट्री करवा ली और जनवरी 2021 में कब्जा लेने पहुंच गई। इस पर मुकेश ने कोर्ट के आदेश पर फरवरी 2021 को बर्रा थाने में आसमां खातून समेत पांच नामजद और अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी। इसी बीच थाने और कोर्ट के चक्कर लगाते-लगाते जून 2021 में मुकेश की मौत हो गई। फौरी तौर पर विवेचना कर विवेचक ने जुलाई 2022 में मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाकर कोर्ट भेज दी। इसमें 21 अगस्त 2021 को मुकेश से मिलने की बात लिखी। मुकेश की पत्नी सुमन ने फाइनल रिपोर्ट पर आपत्ति दर्ज करने के लिए कोर्ट से अनुमति मांगी और आपत्ति दाखिल कर जो तर्क कोर्ट में रखे उससे विवेचक की लापरवाही की पोल खुल गई। कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए अग्रिम विवेचना के आदेश करने के साथ ही विवेचक के खिलाफ बीएनएसएस की धारा 199 ख के तहत रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए हैं।
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क्या है धारा 199 (ख)

किसी अपराध की विवेचना करने वाले लोक सेवक की ओर से कानून के आदेशों का उल्लंघन करने पर इस धारा के तहत दोषी को छह महीने से दो साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।
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इन मुद्दों पर फंसे विवेचक

फाइनल रिपोर्ट पर जताई आपत्ति में सुमन के अधिवक्ता की ओर से जो तर्क रखे गए उन पर विवेचना के दौरान विवेचक ने कोई ध्यान नहीं दिया और कोर्ट में वह फंस गए।

1- मुकेश की 11 जून 2021 को मृत्यु हो गई थी, जबकि विवेचक ने केस डायरी में 21 अगस्त 2021 को मुकेश से उसके घर पर मिलने की बात लिखी है। इसके बाद विवेचना स्थानांतरित हुई तो दूसरे विवेचक ने भी 16 अक्तूबर 2021 को मुकेश से घर पर मिलने की बात लिख दी।


2- आवंटन के समय आसमां का पता बांस मंडी का दर्ज था, जबकि रजिस्ट्री के समय पता दबौली का दर्ज कराया गया जबकि आसमां कभी दबौली में रही ही नहीं।

3- प्लाॅट का आवंटन 1988 में हुआ था और वर्ष 2021 में विवेचक को दिए बयान में आसमां ने अपनी उम्र 42 वर्ष बताई। इस हिसाब से आवंटन के समय उसकी उम्र लगभग आठ वर्ष ही रही होगी। ऐसे में उसके नाम आवंटन कैसे संभव है।
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