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Kanpur News: पिन बनी दवा... चुभी और दर्द छूमंतर

Thu, 30 Oct 2025 02:19 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 30 Oct 2025 02:19 AM IST
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The pin became medicine... pricked and the pain vanished
कानपुर। हैलट का पेन मेडिसिन विभाग नए तरीके से रोगियों को दर्द से निजात दिला रहा है। इसके लिए पिन होल और की होल सर्जरी अपनाई जा रही है। स्लिप डिस्क, सियाटिक, कमर दर्द आदि के रोगियों को एक पिन चुभने भर से दर्द से छुटकारा मिल जाता है। पेन मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर का कहना है कि जो नर्व और नस दबने से दर्द होता है, उस दबाव को हटा दिया जाता है।
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जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज प्रदेश का इकलौता राजकीय मेडिकल कॉलेज है जहां पेन मेडिसिन विभाग खुला हुआ है। विभाग पेन क्लीनिक संचालित करता है। प्रत्येक ओपीडी में औसत 150 दर्द के रोगी आते हैं। उनका पिन होल और की होल सर्जरी से इलाज किया जा रहा है। विभागाध्यक्ष डॉ. चंद्रशेखर ने बताया कि रेडियो फ्रीक्वेंसी वाली पिन से कमर दर्द, स्लिप डिस्क, साइटिका, फ्रोजन शोल्डर, पैरों में झनझनाहट आदि के रोगियों का इलाज किया जाता है।
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उन्होंने बताया कि इसमें एक पिन चुभने भर जैसा दाग आता है। इसके अलावा की-होल सर्जरी में इंडोस्कोपी से इलाज किया जाता है। इससे नसों को चौड़ा करना, पैरों के भारीपन, नसों पर पड़ने वाले दबाव से होने वाले दर्द को खत्म किया जाता है। स्लिप डिस्क अगर बढ़ी है तो बढ़े हुए हिस्से को निकाल लिया जाता है। इंडोस्कोपी के लिए शरीर में एक छेद किया जाता है। इसमें सिर्फ एक टांका लगता है। कुछ रोगियों में टांके की भी जरूरत नहीं पड़ती।
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उन्होंने बताया कि हर घाव फाइब्रोसिस की वजह से भरता है। घाव भरने में नसें दबने लगती हैं जिससे रोगी को दर्द बना रहता है। एक साल में 1500 रोगियों का पिन होल तरीके से इलाज किया गया। की होल तरीका 300 रोगियों में इस्तेमाल किया गया। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने बताया कि विभाग में और संसाधन बढ़ाएंगे। इससे दर्द के रोगियों को राहत मिलेगी।
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