{"_id":"69f11ebd6075a7c1c9003ed8","slug":"the-path-forward-for-ai-is-the-expansion-of-consciousness-dr-ravi-kanpur-news-c-12-1-knp1049-1506012-2026-04-29","type":"story","status":"publish","title_hn":"एआई के आगे का रास्ता चेतना का विस्तार : डॉ. रवि","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
एआई के आगे का रास्ता चेतना का विस्तार : डॉ. रवि
विज्ञापन
कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विवि में मंगलवार को एडवांस्ड रिसर्च एवं एआई-सक्षम नवाचार : वर्तमान चुनौतियां एवं भविष्य की संभावनाएं विषय पर अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस हुई। हाइब्रिड मोड में आयोजित सम्मेलन में देश-विदेश के वैज्ञानिकों, शोधार्थियों और विद्वानों ने भाग लिया।
मुख्य अतिथि व वक्ता स्वीडन के गोथेनबर्ग विवि के केमिस्ट्री और मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के डॉ. रवि कांत पाठक ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आगे का रास्ता चेतना का विस्तार है। यह सनातन संसकृति की ज्ञान परंपरा और दृष्टि के बिना संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता उन्नत विज्ञान है। देश के ऋषि, मुनियों ने सबसे अधिक चेतना के विकास पर काम किया है। इससे मनुष्य प्रकृति के साथ संतुलन रखता है। विशिष्ट अतिथि आईआईटी के प्रो. अमित अग्रवाल ने क्वांटम ट्रांसपोर्ट और टोपोलॉजिकल मैटेरियल्स पर विचार साझा किए। सम्मेलन में एब्स्ट्रैक्ट बुकलेट का विमोचन हुआ।
विज्ञापन
जेएनयू के स्कूल ऑफ फिजिकल साइंस के प्रो. रामसागर मिश्रा ने बताया कि कार्बोहाइड्रेट मॉलिक्यूल और प्रोटीन के संयोजन से कैंसर उपचार में नई संभावनाएं विकसित हो रही हैं जिसका क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है। इससे दवाओं के साइड इफेक्ट कम करने और कैंसर कोशिकाओं की रोकथाम में मदद मिलेगी।
तकनीकी सत्रों में प्रो. सूर्यकांत त्रिपाठी, डॉ. रोहित मेदवाल, प्रो. रामसागर मिश्रा और प्रो. शोभा शुक्ला ने एआई के आधुनिक अनुसंधान में उपयोग पर विस्तार से चर्चा की। हरित ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, अंतरिक्ष विज्ञान और डिजिटल सुरक्षा जैसे विषयों पर भी मंथन हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शानू प्रिया ने किया। मौके पर प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी, प्रो. आरके द्विवेदी, डॉ. अंजू दीक्षित और डॉ. नमिता तिवारी सहित अन्य उपस्थित रहे।
विज्ञापन
मुख्य अतिथि व वक्ता स्वीडन के गोथेनबर्ग विवि के केमिस्ट्री और मॉलिक्यूलर बायोलॉजी के डॉ. रवि कांत पाठक ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आगे का रास्ता चेतना का विस्तार है। यह सनातन संसकृति की ज्ञान परंपरा और दृष्टि के बिना संभव नहीं है।
विज्ञापन
उन्होंने कहा कि आध्यात्मिकता उन्नत विज्ञान है। देश के ऋषि, मुनियों ने सबसे अधिक चेतना के विकास पर काम किया है। इससे मनुष्य प्रकृति के साथ संतुलन रखता है। विशिष्ट अतिथि आईआईटी के प्रो. अमित अग्रवाल ने क्वांटम ट्रांसपोर्ट और टोपोलॉजिकल मैटेरियल्स पर विचार साझा किए। सम्मेलन में एब्स्ट्रैक्ट बुकलेट का विमोचन हुआ।
विज्ञापन
जेएनयू के स्कूल ऑफ फिजिकल साइंस के प्रो. रामसागर मिश्रा ने बताया कि कार्बोहाइड्रेट मॉलिक्यूल और प्रोटीन के संयोजन से कैंसर उपचार में नई संभावनाएं विकसित हो रही हैं जिसका क्लीनिकल ट्रायल चल रहा है। इससे दवाओं के साइड इफेक्ट कम करने और कैंसर कोशिकाओं की रोकथाम में मदद मिलेगी।
तकनीकी सत्रों में प्रो. सूर्यकांत त्रिपाठी, डॉ. रोहित मेदवाल, प्रो. रामसागर मिश्रा और प्रो. शोभा शुक्ला ने एआई के आधुनिक अनुसंधान में उपयोग पर विस्तार से चर्चा की। हरित ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण, अंतरिक्ष विज्ञान और डिजिटल सुरक्षा जैसे विषयों पर भी मंथन हुआ। कार्यक्रम का संचालन डॉ. शानू प्रिया ने किया। मौके पर प्रति कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी, प्रो. आरके द्विवेदी, डॉ. अंजू दीक्षित और डॉ. नमिता तिवारी सहित अन्य उपस्थित रहे।