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आयुर्वेद के क्षेत्र में अनुसंधान की आवश्यकता : प्रो. पाठक
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सीएसजेएमयू में आयुर्वेद दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में शामिल सदस्य।
- फोटो : विश्वविद्यालय
कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज विवि की औषधीय वाटिका में मंगलवार को 10वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस का आयोजन हुआ। मुख्य अतिथि क्षेत्रीय आयुर्वेदिक एवं यूनानी अधिकारी डॉ. कप्तान सिंह ने आयुर्वेद की जन-उपयोगिता पर प्रकाश डाला।
विवि के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि आयुर्वेद के क्षेत्र में और अनुसंधान एवं प्रचार की आवश्यकता है। उन्होंने आयुर्वेदिक डॉक्टरों के लिए एआई आधारित प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं का प्रस्ताव भी रखा।
कार्यक्रम का आयोजन नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) वुमेन फोरम कानपुर एवं स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। औषधीय वाटिका में प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही जिसमें 50 से अधिक महाकषाय प्रदर्शित किए गए।
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कार्यक्रम का संचालन कर रहीं वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक ने इनके लाभ बताए, जिनमें श्रमहर, दाहप्रशमन, बल्य, शीतप्रशमन, शुक्रजनन, संजान्थापन, कृमिघ्न और जीवनीय महाकषाय प्रमुख रहे।
उन्होंने आयुर्वेद की वैज्ञानिक पद्धतियों, औषधीय वनस्पतियों की उपयोगिता और महिला स्वास्थ्य में आयुर्वेद की भूमिका की जानकारी दी। डॉ. निरंकार गोयल ने बताया कि त्रिदोष संतुलन ही स्वास्थ्य का मूल है। कार्यक्रम में डॉ. नीरजा दुबे, डॉ. प्रतिमा गुप्ता, डॉ. मुनीष रस्तोगी सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।
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विवि के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि आयुर्वेद के क्षेत्र में और अनुसंधान एवं प्रचार की आवश्यकता है। उन्होंने आयुर्वेदिक डॉक्टरों के लिए एआई आधारित प्रशिक्षण एवं कार्यशालाओं का प्रस्ताव भी रखा।
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कार्यक्रम का आयोजन नेशनल इंटीग्रेटेड मेडिकल एसोसिएशन (नीमा) वुमेन फोरम कानपुर एवं स्कूल ऑफ हेल्थ साइंसेज के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। औषधीय वाटिका में प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र रही जिसमें 50 से अधिक महाकषाय प्रदर्शित किए गए।
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कार्यक्रम का संचालन कर रहीं वरिष्ठ आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक ने इनके लाभ बताए, जिनमें श्रमहर, दाहप्रशमन, बल्य, शीतप्रशमन, शुक्रजनन, संजान्थापन, कृमिघ्न और जीवनीय महाकषाय प्रमुख रहे।
उन्होंने आयुर्वेद की वैज्ञानिक पद्धतियों, औषधीय वनस्पतियों की उपयोगिता और महिला स्वास्थ्य में आयुर्वेद की भूमिका की जानकारी दी। डॉ. निरंकार गोयल ने बताया कि त्रिदोष संतुलन ही स्वास्थ्य का मूल है। कार्यक्रम में डॉ. नीरजा दुबे, डॉ. प्रतिमा गुप्ता, डॉ. मुनीष रस्तोगी सहित कई विशेषज्ञ मौजूद रहे।